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रेवदर जुआकांड: जयपुर तक गूंज: रेवदर जुआकांड: कुएं से निकली कहानी अब जयपुर तक पहुंची

गणपत सिंह मांडोली

सिरोही के रेवदर जुआकांड में खाकी और खादी के गठजोड़ की चर्चा तेज हुई।

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HIGHLIGHTS

  • सिरोही के रेवदर में पूर्व विधायक के कुएं पर जुए की बड़ी कार्रवाई हुई थी।
  • अब इस मामले की गूंज जयपुर पुलिस मुख्यालय और सियासी गलियारों तक पहुंच गई है।
  • मामले में एक पुलिसकर्मी और एक स्थानीय नेता की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
  • एक प्रभावशाली शराब कारोबारी का नाम भी इस पूरे खेल में सामने आ रहा है।
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सिरोही |  राजस्थान के सिरोही जिले के रेवदर क्षेत्र में पूर्व विधायक के कुएं पर पकड़े गए जुए के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस कार्रवाई की गूंज अब जिला मुख्यालय से निकलकर जयपुर के पुलिस मुख्यालय और प्रदेश के सियासी गलियारों तक पहुंच चुकी है।
जिले में इस बात की चर्चा आम है कि यह मामला सिर्फ जुए की एक सामान्य कार्रवाई तक सीमित नहीं है। इसके पीछे पर्दे के कुछ बेहद प्रभावशाली चेहरे सक्रिय बताए जा रहे हैं, जो इसे संरक्षण दे रहे थे।

खाकी और खादी का कथित गठजोड़

सियासी हलकों में दो नामों को लेकर सबसे ज्यादा कानाफूसी हो रही है। इनमें से एक चेहरा पुलिस विभाग यानी 'खाकी' से जुड़ा है, जबकि दूसरा सत्ता पक्ष का करीबी स्थानीय नेता बताया जा रहा है।
इनके साथ ही ठेके और रसूख की दुनिया में बड़ा नाम रखने वाले एक प्रभावशाली शराब कारोबारी की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। सूत्रों का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क काफी समय से सक्रिय था।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह मामला अब आला अधिकारियों के संज्ञान में है और उच्च स्तर पर इसकी विस्तृत जानकारी मांगी जा चुकी है। चर्चा है कि जल्द ही कुछ बड़े एक्शन देखने को मिल सकते हैं।
यदि इस मामले से जुड़े पुलिसकर्मियों और संदिग्धों की कॉल डिटेल खंगाली गई, तो कई रसूखदारों के नाम सार्वजनिक हो सकते हैं और बड़े खुलासे होंगे।

विधानसभा तक पहुंच सकती है आंच

यह मामला पहले स्थानीय स्तर पर दबाने की कोशिश की गई थी, लेकिन अब इसकी आंच भाजपा प्रदेश मुख्यालय तक पहुंच गई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि आगामी सत्र में यह मुद्दा विधानसभा में भी गूंज सकता है।
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी उत्सुकता है कि आखिर वह कौन सा शराब कारोबारी है, जिसकी नजदीकी खाकी के साथ इतनी गहरी है। क्या जांच केवल कागजों तक ही सिमट कर रह जाएगी?
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पुलिस प्रशासन इन पर्दे के पीछे बैठे असली खिलाड़ियों को बेनकाब करेगा। सिरोही की जनता अब निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रही है।

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