जयपुर | राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS) के 11वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति हरिभाऊ बागडे ने शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटल करने के पोर्टल का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 को भारतीय गौरव का प्रतीक बताया और स्वर्णिम भारत के निर्माण का आह्वान किया।
RUHS दीक्षांत: राज्यपाल का संबोधन: RUHS दीक्षांत: राज्यपाल ने किया डिजिटल पोर्टल का शुभारम्भ
राज्यपाल ने RUHS में शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटलीकरण पोर्टल शुरू किया और NEP 2020 की सराहना की।
HIGHLIGHTS
- राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने RUHS के 11वें दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक रिकॉर्ड डिजिटलीकरण पोर्टल का उद्घाटन किया।
- नई शिक्षा नीति 2020 को भारतीय गौरव और प्राचीन ज्ञान परंपरा से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
- स्वास्थ्य मंत्री ने RUHS को AIIMS की तर्ज पर देश का सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थान बनाने का संकल्प व्यक्त किया।
- राज्यपाल ने युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से दूर रहने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने की अपील की।
संबंधित खबरें
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि स्वर्णिम भारत के लिए सबको मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है। उन्होंने अच्छी मनःस्थिति के साथ देश और समाज के समग्र विकास का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि शिक्षा और उपाधियों की सार्थकता यही है कि हम राष्ट्र को सर्वोच्च रखते हुए अपने सभी कार्य करें। दीक्षांत को उन्होंने विद्यार्थी जीवन का एक नया आरम्भ बताया।
नई शिक्षा नीति और भारतीय गौरव
राज्यपाल ने प्राचीन काल के गुरुकुलों में दी जाने वाली शिक्षा और 'समावर्तन संस्कार' की चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज का दीक्षांत समारोह उसी प्राचीन परंपरा का आधुनिक रूप है।
संबंधित खबरें
उन्होंने मैकाले द्वारा लादी गई अंग्रेजी शिक्षा पद्धति की आलोचना करते हुए कहा कि इसने हमें अपने इतिहास से विलग कर दिया। नई शिक्षा नीति अब हमें हमारे गौरव से जोड़ेगी।
राज्यपाल ने खगोल विज्ञान में भारत की प्राचीन देन की चर्चा करते हुए भास्कराचार्य का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि 1150 में ही उन्होंने पृथ्वी के गोल होने की जानकारी दी थी।
गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत को भास्कराचार्य ने ही प्रतिपादित किया था, जिसे बाद में न्यूटन का बताया गया। भारत ने ही विश्व को शून्य का ज्ञान दिया जिससे गिनती संभव हुई।
इतिहास के गौरवशाली प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बप्पा रावल की वीरता का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सातवीं शताब्दी में उन्होंने अरबों को खदेड़कर देश की रक्षा की थी।
राज्यपाल ने जानकारी दी कि पाकिस्तान का रावलपिंडी शहर असल में बप्पा रावल के नाम से ही बसा हुआ है। यह हमारे पूर्वजों के अदम्य साहस और शौर्य का प्रतीक है।
गुरुकुल परंपरा और आत्मनिर्भरता
आजादी से पहले भारत में आठ लाख गुरुकुल थे, जिन्हें अंग्रेजों ने सोची-समझी साजिश के तहत नष्ट किया। वे नहीं चाहते थे कि भारतीय दृष्टिकोण की शिक्षा विकसित हो सके।
अंग्रेजों ने देश के घरेलू उद्योगों को बंद कर भारतीयों को गुलाम बनाए रखने की कोशिश की। इसी कारण नई शिक्षा नीति में अब कौशल विकास पर विशेष जोर दिया गया है।
शिक्षा और उपाधियों की सार्थकता यही है कि हम राष्ट्र को सर्वोच्च रखते हुए अपने सभी कार्य करें।
राज्यपाल ने युवाओं को नशे की प्रवृत्ति से दूर रहने की कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश भारत की युवा शक्ति को कमजोर करने के लिए नशे का व्यापार कर रहे हैं।
नशा व्यक्ति को उम्र से पहले बूढ़ा बना देता है, इसलिए युवाओं को सजग रहना चाहिए। आत्मनिर्भर भारत के विकास के लिए युवाओं का स्वस्थ और शिक्षित होना अनिवार्य है।
RUHS को AIIMS की तर्ज पर विकास
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि RUHS को AIIMS की तर्ज पर देश का सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थान बनाया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।
उन्होंने प्रदेश को मेडिकल टूरिज्म के केंद्र के रूप में विकसित करने के प्रयासों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री आरोग्य आयुष्मान योजना को उन्होंने देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना बताया।
समारोह में सुप्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ. विकास महात्मे ने दीक्षांत व्याख्यान दिया। उन्होंने चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ जीवन की व्यावहारिकता और कौशल विकास को महत्वपूर्ण बताया।
कुलगुरु प्रो. प्रमोद येवले ने विश्वविद्यालय के नवाचारों और शैक्षिक उन्नयन की रिपोर्ट प्रस्तुत की। राज्यपाल ने अंत में मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक और डिग्रियां प्रदान कीं।
यह समारोह राजस्थान में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक नए डिजिटल युग की शुरुआत का गवाह बना। इससे भविष्य में छात्रों के लिए शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन आसान हो जाएगा।
*Edit with Google AI Studio