जयपुर। शौर्य संस्कार सेवा संगठन द्वारा शिवपुरी कॉलोनी, सत्य नगर, झोटवाड़ा में बालिकाओं एवं महिलाओं के लिए निःशुल्क शौर्य एवं संस्कार प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। 15 जून तक चलने वाले इस विशेष समर कैंप में वर्तमान में लगभग 80 बालिकाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।
80 बालिकाएं निःशुल्क ले रहीं शौर्य, संस्कार और योग का प्रशिक्षण: जयपुर में शौर्य संस्कार सेवा संगठन का समर कैंप
HIGHLIGHTS
- 1. तलवारबाजी, दंड शास्त्र और आत्मरक्षा तकनीकों का अभ्यास 2.झोटवाड़ा क्षेत्र में समाजहित की अनूठी पहल। 3.15 जून तक चलेगा निःशुल्क समर कैंप
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कार्यक्रम का उद्देश्य बालिकाओं को शारीरिक रूप से सशक्त, आत्मनिर्भर एवं आत्मविश्वासी बनाना है, ताकि वे किसी भी परिस्थिति में अपनी सुरक्षा स्वयं कर सकें। प्रशिक्षण के अंतर्गत तलवारबाजी, दंड शास्त्र, आत्मरक्षा तकनीक, भारतीय संस्कृति तथा नैतिक संस्कारों का विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
राष्ट्रभक्ति, अनुशासन और संस्कृति का अनूठा संगम
संगठन की संस्थापिका विजयलक्ष्मी शेखावत के मार्गदर्शन एवं अध्यक्ष डिंपल राठौड़ के नेतृत्व में यह अभियान निरंतर संचालित किया जा रहा है। प्रशिक्षण व्यवस्था में दिव्यांशी शेखावत, खुशी नरूका, कृष्णवी शक्तावत, याचिका तंवर, साक्षी शेखावत, पुष्पा शेखावत, राज कंवर एवं बिंदिया राठौड़ सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। सभी प्रशिक्षक बालिकाओं को आत्मरक्षा, शौर्य प्रशिक्षण एवं संस्कार शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

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संस्कृत श्लोकों से होता है शाखा का शुभारंभ
प्रतिदिन प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत ज्योतिर्विद पंडित फणींद्र शास्त्री द्वारा संस्कृत श्लोकों के कंठस्थ अभ्यास से करवाई जाती है। इससे बालिकाओं में भारतीय संस्कृति, संस्कृत भाषा एवं आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति रुचि विकसित हो रही है।
योग और प्राणायाम से बढ़ रही एकाग्रता
कार्यक्रम में योगालय के संस्थापक आशुतोष सक्सेना द्वारा नियमित योगाभ्यास एवं प्राणायाम का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। योग सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों के शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक एकाग्रता और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा मिल रहा है।
अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने की सराहना
स्थानीय नागरिकों एवं अभिभावकों ने इस पहल को समाजहित में एक महत्वपूर्ण कदम बताते हुए संगठन के प्रयासों की सराहना की है। उनका कहना है कि ऐसे प्रशिक्षण शिविर बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें सुरक्षा एवं संस्कारों के प्रति जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।