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सीकर में NEET छात्र ने की खुदकुशी: सीकर: NEET छात्र ने लगाई फांसी, 11 लाख खर्च कर चुका था परिवार

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राजस्थान के सीकर में मेडिकल की तैयारी कर रहे छात्र ने फांसी लगाई, परिवार गहरे सदमे में है।

HIGHLIGHTS

  • झुंझुनूं निवासी 22 वर्षीय प्रदीप मेघवाल ने सीकर के किराए के कमरे में फांसी लगाकर जान दी।
  • मृतक छात्र पिछले तीन वर्षों से सीकर के जीसीआई कोचिंग संस्थान में नीट की तैयारी कर रहा था।
  • परिवार ने आर्थिक तंगी के बावजूद बेटे की पढ़ाई पर 8 से 11 लाख रुपये तक खर्च किए थे।
  • घटना के समय छात्र की बहन कमरे में ही थी, पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।
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सीकर | राजस्थान के सीकर जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहां मेडिकल प्रवेश परीक्षा यानी नीट की तैयारी कर रहे एक होनहार छात्र ने मौत को गले लगा लिया।

मृतक छात्र की पहचान 22 वर्षीय प्रदीप मेघवाल के रूप में हुई है। वह मूल रूप से झुंझुनूं जिले के गुड्डा गोडजी क्षेत्र का रहने वाला था। प्रदीप पिछले तीन वर्षों से सीकर में था।

सीकर के प्रसिद्ध जीसीआई (GCI) कोचिंग संस्थान में वह मेडिकल की पढ़ाई कर रहा था। उसका सपना एक सफल डॉक्टर बनकर अपने परिवार की सेवा करना था। लेकिन शनिवार सुबह यह सपना हमेशा के लिए टूट गया।

सीकर में छात्र की आत्महत्या से सनसनी

यह दुखद घटना शनिवार, 16 मई की सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। प्रदीप अपनी बहन के साथ एक किराए के कमरे में रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसकी बहन भी पढ़ाई में उसका साथ देती थी।

घटना के वक्त कमरे में प्रदीप और उसकी बहन दोनों मौजूद थे। जानकारी के अनुसार, जब प्रदीप की बहन नहाने के लिए गई थी, उसी दौरान छात्र ने कमरे में फांसी का फंदा लगा लिया।

जब बहन बाहर आई तो उसने अपने भाई को फंदे से लटका हुआ पाया। उसकी चीख सुनकर आसपास के लोग तुरंत मौके पर जमा हो गए। इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी।

स्थानीय लोगों ने तुरंत इस मामले की सूचना पुलिस को दी। पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को फंदे से नीचे उतारा। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेजा गया।

परिवार का संघर्ष और लाखों का खर्च

प्रदीप के परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। इसके बावजूद, उसके पिता और परिजनों ने उसे डॉक्टर बनाने के लिए दिन-रात मेहनत की। परिवार ने उसकी शिक्षा के लिए बड़ी राशि जुटाई थी।

परिजनों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में प्रदीप की कोचिंग और रहने-खाने पर करीब 8 से 11 लाख रुपये खर्च हो चुके थे। यह राशि एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए बहुत बड़ी पूंजी थी।

बेटे को डॉक्टर बनाने के जुनून में परिवार ने कई व्यक्तिगत सुखों का त्याग किया था। उन्होंने अपनी जमा पूंजी बेटे के भविष्य पर लगा दी थी। यहां तक कि उन्होंने अपना पक्का घर भी नहीं बनवाया था।

परिवार को पूरी उम्मीद थी कि प्रदीप नीट की परीक्षा पास करेगा और डॉक्टर बनकर घर की गरीबी दूर करेगा। लेकिन इस आत्मघाती कदम ने पूरे परिवार की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

मेहनती और शांत स्वभाव का था प्रदीप

प्रदीप के साथ पढ़ने वाले छात्रों और कोचिंग के शिक्षकों ने उसे एक बेहद अनुशासित छात्र बताया है। वह पढ़ाई के प्रति बहुत गंभीर था और हमेशा अपने काम में व्यस्त रहता था।

कोचिंग संस्थान में भी उसका व्यवहार सभी के साथ सौहार्दपूर्ण था। किसी को इस बात का अंदाजा नहीं था कि वह मानसिक रूप से इतने बड़े दबाव में है कि ऐसा कदम उठा लेगा।

प्रदीप के दोस्तों का कहना है कि वह शांत स्वभाव का था और अक्सर अपनी पढ़ाई को लेकर चर्चा करता था। उसके इस तरह चले जाने से उसके सहपाठी भी गहरे सदमे में हैं।

पुलिस जांच और आत्महत्या के कारण

सीकर पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आखिर प्रदीप ने यह कदम क्यों उठाया।

प्रारंभिक जांच में पुलिस इसे पढ़ाई के दबाव से जोड़कर देख रही है। हालांकि, कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद हुआ है या नहीं, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे छात्र के मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। परिजनों और बहन के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं ताकि सच्चाई सामने आ सके।

पुलिस अधिकारी ने कहा, "हम मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। छात्र के कमरे की तलाशी ली गई है।"

कोचिंग हब में बढ़ता मानसिक तनाव

सीकर और कोटा जैसे कोचिंग हब में छात्रों की आत्महत्या के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। यह घटना एक बार फिर शिक्षा व्यवस्था और छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव पर सवाल खड़े करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि नीट और जेईई जैसी परीक्षाओं का बोझ छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ रहा है। अक्सर छात्र परिवार की उम्मीदों के बोझ तले दब जाते हैं।

प्रदीप के मामले में भी परिवार का भारी निवेश शायद उसके लिए एक मानसिक दबाव बन गया था। उसे लग रहा होगा कि अगर वह सफल नहीं हुआ तो परिवार का क्या होगा।

इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कोचिंग संस्थानों और अभिभावकों को छात्रों के साथ संवाद बढ़ाने की जरूरत है। छात्रों को यह समझाना जरूरी है कि परीक्षा जीवन से बड़ी नहीं है।

शोक की लहर और अंतिम विदाई

प्रदीप की मौत की खबर जैसे ही उसके गांव गुड्डा गोडजी पहुंची, वहां मातम छा गया। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है और हर कोई इस होनहार युवक की मौत पर दुखी है।

परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वे बार-बार यही कह रहे हैं कि अगर उन्हें प्रदीप की परेशानी का पता होता, तो वे उसे वापस घर बुला लेते और पढ़ाई छोड़वा देते।

शव का पोस्टमार्टम होने के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया गया है। प्रदीप का अंतिम संस्कार उसके पैतृक गांव में किया जाएगा। इस घटना ने एक बार फिर समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है।

सीकर की यह घटना केवल एक छात्र की मौत नहीं है, बल्कि एक पूरे परिवार के सपनों की चिता है। प्रशासन और समाज को मिलकर ऐसे कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में कोई दूसरा प्रदीप अपनी जान न दे।

*Edit with Google AI Studio

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