सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले के खांबल गांव में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा खंडित किए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस घटना से दलित समाज और स्थानीय ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है।
सिरोही: अंबेडकर प्रतिमा खंडित, भारी आक्रोश: सिरोही: बाबा साहेब की प्रतिमा खंडित होने पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन और निष्पक्ष जांच की मांग
राजस्थान के सिरोही जिले के खांबल गांव में बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा खंडित किए जाने के बाद तनाव व्याप्त है। गुस्साए ग्रामीणों ने पदयात्रा निकालकर जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की।
HIGHLIGHTS
- खांबल गांव में बाबा साहेब की प्रतिमा खंडित होने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश।
- ग्रामीणों ने रामपुरा से कलेक्ट्रेट तक पदयात्रा निकाल कर प्रदर्शन किया।
- घटना के समय बिजली गुल होने और सीसीटीवी फुटेज डिलीट होने पर उठाए सवाल।
- राज्यमंत्री ओटाराम देवासी और सांसद लुम्बाराम चौधरी के खिलाफ नारेबाजी।
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पदयात्रा और कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन
आक्रोशित ग्रामीणों ने खांबल गांव से रामपुरा होते हुए जिला मुख्यालय तक कई किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली। प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लिए नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे।
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि घटना को 50 घंटे से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अब तक असली आरोपियों को नहीं पकड़ पाई है।
प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर जमकर नारेबाजी की और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस इस संवेदनशील मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है।
साजिश की आशंका और तकनीकी सवाल
ज्ञापन में ग्रामीणों ने घटना के समय बिजली गुल होने और सीसीटीवी फुटेज डिलीट होने पर संदेह जताया है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा हो सकता है।
गांव में लगे सात सीसीटीवी कैमरों में से छह की मेमोरी डिलीट पाई गई है। विशेष रूप से वे कैमरे बंद थे जो प्रतिमा के पीछे की ओर लगे थे। ग्रामीणों ने इसकी उच्चस्तरीय तकनीकी जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का दावा है कि रात के समय जानबूझकर बिजली काटी गई ताकि अपराधी आसानी से घटना को अंजाम दे सकें। इस तकनीकी विफलता की जांच के लिए विशेष टीम गठित करने की मांग की गई है।
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जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने राज्यमंत्री ओटाराम देवासी और सांसद लुम्बाराम चौधरी के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों ने अब तक केवल कोरा आश्वासन ही दिया है।
पुलिस प्रशासन ने पूर्व में आश्वासन दिया था कि 24 घंटे में कार्रवाई होगी, लेकिन अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला है। पुलिस ने संदेह के आधार पर कुछ युवकों को हिरासत में लिया है।
निष्पक्ष जांच की मांग
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों की जल्द पहचान कर कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात है। प्रशासन ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि मामले की हर पहलू से बारीकी से जांच की जा रही है।
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