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सिरोही: क्या कांस्टेबल चलवा सकता है जुए-सट्टे का बड़ा कारोबार

गणपत सिंह मांडोली

रेवदर में पूर्व विधायक के कुएं पर जुआ पकड़े जाने के बाद कांस्टेबल बर्खास्त, उठे गंभीर सवाल।

HIGHLIGHTS

  • - छोटी मछली को किया टारगेट और बड़े मगरमच्छ मस्ती में।
  • - खाकी से खादी तक के हाथ शामिल होने का अनुमान ।
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सिरोही | रेवदर में पूर्व विधायक के कृषि कुएं पर पकड़े गए जुआ प्रकरण में कांस्टेबल को बर्खास्त कर दिया गया। इससे पुलिस ने यह संदेश दिया है कि दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन, यह सोचने वाली है कि पूर्व विधायक के कुएं पर जुए-सट्टे का बड़ा कारोबार क्या एक कांस्टेबल की शह पर चल सकता है।  प्रथमदृष्टया तो यह हो ही नहीं सकता और यदि होता भी है तो इस छोटी मछली की पीठ पर बड़े मगरमच्छों का हाथ अवश्य होगा। माना जा रहा है कि इसमें खाकी से लेकर खादी तक के हाथ शामिल है, लेकिन पुलिस ने अपनी जांच में छोटी मछली को टारगेट कर इतिश्री कर दी।

पर्दे के पीछे बताए जा रहे दो चेहरे
रेवदर क्षेत्र में पूर्व विधायक के कुएं पर पकड़े गए जुए के मामले में चर्चा है कि यह सिर्फ जुए की कार्रवाई तक सीमित नहीं था,  इसके पीछे पर्दे के कुछ प्रभावशाली चेहरे भी सक्रिय बताए जा रहे हैं। इस पूरे खेल में दो नामों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है। खाकी से जुड़ा एक चेहरा और सत्ता पक्ष से नजदीकी रखने वाला स्थानीय नेता को इसमें शामिल बताया जा रहा है। सियासत से जुड़े एक प्रभावशाली की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।

पहले मामला दबाया, अब इतिश्री कर दी
सूत्र बताते हैं कि उच्च स्तर पर इस मामले की पूरी जानकारी ली जाए तो कई खुलासे हो सकते हैं। चर्चा है कि यदि संबंधित कांस्टेबल और इस कारोबार से जुड़े आरोपियों की कॉल डिटेल खंगाली जाए तो चौंकाने वाले खुलासे सामने आ सकते हैं। बताया जा रहा है कि मामला पहले दबा दिया गया था, लेकिन मामला पुलिस मुख्यालय से लेकर सत्तासीन दल के प्रदेश मुख्यालय तक पहुंच चुका है। ऐसे में एक कांस्टेबल को बर्खास्त कर पूरे मामले की इतिश्री कर दी।

फिर भी किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की
उधर, पूर्व विधायक के कुएं पर जुए-सट्टे का कारोबार पकड़ा गया। वहीं, रेवदर क्षेत्र के दांतराई में नशे की फैक्ट्री जब्त की गई। एनसीबी की टीम ने यहां तीन दिन रहकर पूरी जांच की। इसके बाद खुलासा किया कि यहां से कितना माल बनाकर पार किया गाय। इस तरह के दो बड़े मामले इस थाना क्षेत्र में सामने आए, लेकिन एक कांस्टेबल के अलावा किसी पर आंच नहीं आई। जुआ-सट्टा व नशे के बड़े कारोबार के बावजूद न तो किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तक तय नहीं की गई। अब देखना यह रहेगा कि मामले की जांच सिर्फ  कागजों तक ही सीमित रहेगी या पर्दे के पीछे बैठे चेहरे भी उजागर होंगे।

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