सिरोही | कभी खेल, संस्कृति और पारिवारिक आयोजनों की पहचान रहा ऐतिहासिक सरूप क्लब आज गंभीर सवालों के घेरे में है। जिस क्लब की स्थापना खिलाड़ियों को मंच देने, सामाजिक सौहार्द बढ़ाने और परिवारों के लिए स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हुई थी, उसी क्लब को लेकर अब शहर में चर्चा है कि शाम ढलते ही यहां खेल से ज्यादा शराब पार्टियों का माहौल नजर आता है।
सिरोही: ऐतिहासिक सरूप क्लब की गरिमा पर ग्रहण? खेल के मंदिर में क्यों छलक रहे जाम, जिम्मेदार आखिर मौन क्यों?
सिरोही का ऐतिहासिक सरूप क्लब अपनी पहचान खो रहा है? खेल के लिए बने इस क्लब में अब शाम ढलते ही शराब पार्टियों का माहौल होने की चर्चा है, जिससे इसकी गरिमा पर सवाल उठ रहे हैं।
HIGHLIGHTS
- सिरोही का ऐतिहासिक सरूप क्लब अपने मूल उद्देश्य से भटकने के आरोपों का सामना कर रहा है।
- कभी खेल और पारिवारिक आयोजनों का केंद्र रहे क्लब में अब शराब पार्टियों के आयोजन की चर्चा है।
- शहर के कई परिवार अब क्लब में आने से परहेज कर रहे हैं, जिससे इसकी प्रतिष्ठा पर सवाल उठ रहे हैं।
- क्लब प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल उठाए जा रहे हैं और सुधार की मांग हो रही है।
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सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरूप क्लब अपने मूल उद्देश्य से भटक चुका है? यदि क्लब खेल और सामाजिक गतिविधियों के लिए बना था तो फिर इसकी पहचान शराब पार्टियों से क्यों जुड़ रही है? आखिर क्लब का संचालन करने वाले जिम्मेदार पदाधिकारी इस पर चुप क्यों हैं?
शहर के वरिष्ठ नागरिक बताते हैं कि एक समय था जब परिवार यहां सांस्कृतिक कार्यक्रमों, खेल प्रतियोगिताओं और सामाजिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। लेकिन अब कई परिवार क्लब आने से परहेज करने लगे हैं। यदि यह धारणा बन रही है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या क्लब में खेल गतिविधियों को पर्याप्त बढ़ावा दिया जा रहा है या फिर उनका महत्व धीरे-धीरे कम होता जा रहा है? यदि क्लब का उद्देश्य खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करना है तो उसकी प्राथमिकता क्या होनी चाहिए—खेल या शराब पार्टियां?
इतिहास गवाह है कि सरूप क्लब सिरोही की एक गौरवशाली धरोहर रहा है। ऐसे में शहरवासियों का कहना है कि इसकी गरिमा बनाए रखना क्लब प्रबंधन और संबंधित जिम्मेदारों की नैतिक जिम्मेदारी है। यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो यह ऐतिहासिक संस्था अपनी मूल पहचान खो सकती है।
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अब निगाहें क्लब प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों पर हैं। क्या वे इन सवालों का जवाब देंगे? क्या सरूप क्लब को फिर से खेल, संस्कृति और पारिवारिक माहौल का केंद्र बनाया जाएगा? या फिर यह ऐतिहासिक धरोहर केवल विवादों और चर्चाओं तक ही सीमित रह जाएगी?
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