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राजस्थान

सिरोही: कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल: सिरोही में 3.58 करोड़ से बनेगा कामकाजी महिला छात्रावास

मानवेन्द्र जैतावत

राजस्थान के सिरोही में कामकाजी महिलाओं को मिलेगा सुरक्षित आवास, 50 बेड की सुविधा होगी उपलब्ध।

HIGHLIGHTS

  • सिरोही में 3.58 करोड़ की लागत से 50 बेड का कामकाजी महिला छात्रावास बन रहा है।
  • छात्रावास का निर्माण कार्य 4 सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • 50,000 रुपये से कम मासिक आय वाली कामकाजी महिलाएं आवास के लिए पात्र होंगी।
  • विधवा, दिव्यांग और तलाकशुदा महिलाओं को प्रवेश में विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।
sirohi working women hostel construction update

सिरोही | राजस्थान के सिरोही जिले में कामकाजी महिलाओं के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ी और उत्साहजनक सौगात पेश की है। शहर में 3.58 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक और सुरक्षित कामकाजी महिला छात्रावास का निर्माण तेजी से किया जा रहा है।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा नया छात्रावास

यह छात्रावास सिरोही शहर में किशोर गृह के पास विकसित किया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है।

0.32 हेक्टेयर क्षेत्र में फैलने वाले इस भव्य प्रोजेक्ट में कुल 50 महिलाओं के रहने के लिए आधुनिक और सुविधाजनक व्यवस्था की जाएगी।

निर्माण कार्य की समयसीमा 4 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है, जिससे स्थानीय कामकाजी महिलाओं में भारी उत्साह और सुरक्षा की भावना देखी जा रही है।

यह पहल न केवल आवास की समस्या को हल करेगी बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक क्रांतिकारी कदम साबित होने वाली है।

परियोजना का मुख्य लक्ष्य कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें शहरी क्षेत्रों में एक गरिमापूर्ण और सुरक्षित जीवन प्रदान करना है।

प्रशासन का मानना है कि इस छात्रावास के माध्यम से दूर-दराज से आने वाली महिलाओं को शहर में रहने के लिए अब भटकना नहीं पड़ेगा।

किन्हें मिलेगा प्रवेश और क्या हैं पात्रता शर्तें?

इस छात्रावास में प्रवेश के लिए विभाग द्वारा कुछ विशेष मापदंड तय किए गए हैं, जिनका पालन करना सभी आवेदकों के लिए अनिवार्य होगा।

प्राथमिकता सरकारी, गैर-सरकारी और निजी संस्थानों में कार्यरत उन महिलाओं को दी जाएगी जिनकी मासिक आय 50 हजार रुपये से कम है।

इसके अतिरिक्त, स्वरोजगार करने वाली अल्प आय वर्ग की महिलाएं भी इस सुरक्षित आवास योजना का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह पात्र मानी जाएंगी।

छात्रावास में रहने की अवधि प्रारंभिक रूप से 3 वर्ष होगी, जिसे विशेष परिस्थितियों में जिला कलेक्टर की अनुमति से 5 वर्ष तक बढ़ाया जा सकेगा।

विधवा, परित्यक्ता, तलाकशुदा और दिव्यांग महिलाओं को प्रवेश प्रक्रिया में विशेष वरीयता दी जाएगी ताकि उनका सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण हो सके।

आवेदन के लिए आधार कार्ड, नियोक्ता का प्रमाण पत्र, आय घोषणा पत्र और निवास प्रमाण पत्र जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों की आवश्यकता होगी।

"सिरोही के किशोर गृह के पास 50 महिलाओं के लिए 3.58 करोड़ की लागत से कामकाजी महिला छात्रावास का निर्माण कार्य प्रगति पर है। हमने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि निर्माण कार्य 4 सितंबर 2026 तक हर हाल में पूर्ण कर लिया जाए ताकि महिलाओं को जल्द सुविधा मिल सके।" - किशनाराम, उप निदेशक, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग।

सुरक्षा और सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान

छात्रावास का स्थान शहर के मुख्य क्षेत्र में होने के कारण महिलाओं को अपने कार्यस्थल तक पहुंचने में काफी सुगमता और समय की बचत होगी।

निर्माण कार्य की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा समय-समय पर स्थल निरीक्षण किया जा रहा है।

यह छात्रावास उन महिलाओं के लिए वरदान साबित होगा जिनके पास शहर में अपना निजी आवास नहीं है और वे असुरक्षित किराए के कमरों में रहती हैं।

भविष्य में इस छात्रावास को और भी आधुनिक तकनीकों और सुरक्षा उपकरणों जैसे सीसीटीवी कैमरों और सुरक्षा गार्डों से लैस करने की योजना है।

इस छात्रावास के बन जाने से सिरोही में महिलाओं के लिए सुरक्षित और किफायती आवास की एक पुरानी और बड़ी समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा।

यह परियोजना न केवल महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएगी, बल्कि उन्हें समाज में एक नया आत्मविश्वास और सुरक्षित स्थान भी प्रदान करेगी।

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