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राजनीति

राजस्थानी भाषा पर SC का बड़ा फैसला: राजस्थान के स्कूलों में पढ़ाई जाएगी राजस्थानी, SC का आदेश

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स्कूलों में राजस्थानी भाषा पढ़ाने का सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, अब होगी शिक्षकों की भर्ती।

HIGHLIGHTS

  • सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के स्कूलों में राजस्थानी भाषा को पढ़ाने का अनिवार्य आदेश जारी किया है।
  • इस फैसले के बाद राज्य सरकार को हजारों नए राजस्थानी भाषा शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
  • नई शिक्षा नीति के तहत अब छात्रों को प्राथमिक स्तर से ही अपनी मातृभाषा में पढ़ने का विकल्प मिलेगा।
  • विशेषज्ञों के अनुसार मातृभाषा में शिक्षा मिलने से बच्चों की सीखने की क्षमता में 40 फीसदी तक वृद्धि होगी।
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जयपुर | सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की स्कूली शिक्षा में राजस्थानी भाषा को शामिल करने का एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाया है। इस आदेश के बाद अब प्रदेश के संपूर्ण शिक्षा ढांचे में बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

राजस्थानी भाषा के मानक स्वरूप पर विशेषज्ञों की मुहर

अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि राजस्थान में मारवाड़ी, ढूंढाड़ी, हाड़ौती, मेवाती और वागड़ी जैसी कई बोलियां प्रचलित हैं। इस कारण भ्रम बना रहता था कि स्कूलों में किस बोली में पढ़ाई करवाई जाए।

विशेषज्ञों ने इस भ्रांति को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि राजस्थानी एक मानक भाषा है। मारवाड़ी और मेवाती जैसी अन्य सभी बोलियां इसी मुख्य भाषा की क्षेत्रीय उप-बोलियां मात्र हैं।

वर्तमान में जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय और मोहन लाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों में 3000 से अधिक छात्र राजस्थानी भाषा में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। नेट परीक्षा में भी इसका स्वतंत्र विषय होता है।

नई शिक्षा नीति और त्रिभाषा फॉर्मूला में बदलाव

नई शिक्षा नीति (NEP) में प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा देने पर विशेष बल दिया गया है। अब तक कक्षा 6 के बाद छात्र केवल संस्कृत या उर्दू जैसे विकल्प ही चुन पाते थे।

अब राज्य सरकार को प्राथमिक स्तर से ही राजस्थानी भाषा को लागू करने के लिए ठोस तैयारी करनी होगी। इससे बच्चों को अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़ने का सीधा अवसर प्राप्त होगा।

हजारों शिक्षकों की भर्ती और सिलेबस का नया खाका

इस आदेश को धरातल पर उतारने के लिए सरकार को बड़े पैमाने पर शिक्षकों की भर्ती करनी होगी। वर्तमान में स्कूल शिक्षा में राजस्थानी व्याख्याताओं के अधिकांश पद खाली पड़े हैं।

प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर इसे अनिवार्य करने के लिए हजारों नए विशेषज्ञ शिक्षकों की आवश्यकता होगी। निजी स्कूलों को भी अब अनिवार्य रूप से राजस्थानी भाषा के शिक्षक नियुक्त करने होंगे।

सरकार को सीबीएसई स्कूलों के लिए एनसीईटी के सिलेबस में संशोधन करवाना होगा। इसके लिए भाषाविदों और विषय विशेषज्ञों की एक उच्च-स्तरीय सिलेबस कमेटी का गठन करना भी अनिवार्य हो गया है।

मातृभाषा में शिक्षा के लाभ और विशेषज्ञों के विचार

विशेषज्ञों का मानना है कि जब बच्चा अपनी मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करता है, तो उसकी सीखने की क्षमता 40 फीसदी तक बढ़ जाती है। इससे स्कूलों में ड्रॉपआउट रेट भी कम होगा।

सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मूक राजस्थान को जुबान प्रदान करने जैसा है। अब राज्य सरकार को विषय विशेषज्ञों के माध्यम से श्रेष्ठ सिलेबस का निर्माण करना चाहिए और नई भर्तियां निकालनी चाहिए।

जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर कल्याण सिंह शेखावत ने कहा कि यह 10 साल के लंबे संघर्ष की जीत है। अब समय आ गया है कि हमारी बिखरी हुई भाषा को बच्चों तक पहुँचाया जाए।

इस ऐतिहासिक निर्णय से न केवल राजस्थानी भाषा को संवैधानिक पहचान की दिशा में मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए शिक्षण क्षेत्र में रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे।

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