चेन्नई | तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों जबरदस्त हलचल मची हुई है। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद जिसे इंडिया गठबंधन का सबसे अभेद्य किला माना जा रहा था, अब वहां दरारें पड़ती दिख रही हैं। ताजा ओपिनियन पोल के आंकड़ों ने राज्य की सत्ताधारी पार्टी डीएमके और उसके सहयोगियों की नींद उड़ा दी है। 2026 के विधानसभा चुनाव अब केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि एक भीषण संग्राम होने वाले हैं। ओपिनियन पोल के मुताबिक, एमके स्टालिन के नेतृत्व वाले गठबंधन को अन्नाद्रमुक (AIADMK) और बीजेपी के गठबंधन से कड़ी चुनौती मिल रही है। मुकाबला इतना करीबी है कि किसी भी तरफ पलड़ा झुक सकता है।
तमिलनाडु में इंडिया गठबंधन का किला खतरे में?: तमिलनाडु चुनाव 2026: क्या ढह जाएगा इंडिया गठबंधन का सबसे मजबूत किला? ओपिनियन पोल में बीजेपी-अन्नाद्रमुक की बढ़ी ताकत
तमिलनाडु में 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले सियासी पारा चढ़ गया है। ताजा ओपिनियन पोल के मुताबिक, मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन को एनडीए से कड़ी टक्कर मिल रही है, जिससे सत्ता परिवर्तन के संकेत मिल रहे हैं।
HIGHLIGHTS
- तमिलनाडु में डीएमके-कांग्रेस गठबंधन और अन्नाद्रमुक-बीजेपी के बीच मुकाबला बेहद करीबी हुआ।
- मुख्यमंत्री पद की पसंद में एमके स्टालिन और ईपीएस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है।
- राज्य की 39% जनता सरकार के कामकाज से असंतुष्ट है, जो सत्ता विरोधी लहर का संकेत है।
- अभिनेता विजय तीसरे विकल्प के रूप में उभर रहे हैं, जो चुनावी समीकरण बिगाड़ सकते हैं।
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सत्ता विरोधी लहर का असर
सर्वे में सबसे चौंकाने वाली बात सरकार के कामकाज को लेकर जनता की राय है। आंकड़ों के अनुसार, केवल 35.8 प्रतिशत लोग ही वर्तमान सरकार के कामकाज से संतुष्ट नजर आ रहे हैं। इसके विपरीत, लगभग 39 प्रतिशत लोगों ने सरकार के प्रति अपनी असंतुष्टि जाहिर की है। यह आंकड़ा सत्ता विरोधी लहर की ओर साफ इशारा कर रहा है। तमिलनाडु की जनता अब बदलाव के मूड में दिख रही है, जो इंडिया गठबंधन के लिए खतरे की घंटी है। इसके साथ ही, महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों ने भी जनता के बीच असंतोष को बढ़ाने का काम किया है।
नेतृत्व की रेस में कौन आगे?
मुख्यमंत्री पद की पसंद को लेकर भी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया है। वर्तमान मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी (EPS) के बीच लोकप्रियता का अंतर लगभग खत्म हो गया है। दोनों नेता जनता की पसंद के मामले में लगभग बराबरी पर खड़े हैं। ईपीएस की बढ़ती लोकप्रियता ने अन्नाद्रमुक खेमे में नया उत्साह भर दिया है, जिससे जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में हलचल तेज हो गई है। वहीं, स्टालिन के लिए अपनी कुर्सी बचाना एक बड़ी चुनौती साबित होने वाला है।
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अभिनेता विजय की एंट्री और समीकरण
इस बार के चुनाव में केवल दो बड़े गठबंधन ही नहीं हैं, बल्कि एक तीसरा कोण भी उभर रहा है। दक्षिण भारतीय फिल्मों के सुपरस्टार थलपति विजय अब राजनीति के मैदान में उतर चुके हैं। ओपिनियन पोल में उन्हें तीसरे सबसे पसंदीदा विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। विजय की लोकप्रियता युवाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में काफी अधिक है। उनकी पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) किसका वोट काटेगी, यह देखना दिलचस्प होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वे इंडिया गठबंधन के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं।
बीजेपी और अन्नाद्रमुक की रणनीति
बीजेपी इस बार तमिलनाडु में अपने पैर जमाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है। अन्नाद्रमुक के साथ मिलकर पार्टी एक 'अभेद दीवार' तैयार करने की कोशिश में है। ओपिनियन पोल बताते हैं कि बीजेपी का वोट शेयर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। यदि अन्नाद्रमुक और बीजेपी का तालमेल सही रहा, तो वे इंडिया गठबंधन के किले को ढहाने में सफल हो सकते हैं। भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था और परिवारवाद जैसे मुद्दे इस चुनाव में हावी रहने वाले हैं। बीजेपी की आक्रामक रणनीति ने इस बार मुकाबले को काफी रोचक बना दिया है।
क्या होगा 2026 का परिणाम?
तमिलनाडु का राजनीतिक इतिहास हमेशा से बारी-बारी से सत्ता परिवर्तन का रहा है। हालांकि, पिछला चुनाव जीतकर डीएमके ने इस परंपरा को चुनौती दी थी। लेकिन 2026 में हालात बदले हुए नजर आ रहे हैं। क्या स्टालिन अपनी योजनाओं के दम पर वापसी करेंगे या फिर विपक्ष का गठबंधन सत्ता छीन लेगा? फिलहाल, ओपिनियन पोल ने यह साफ कर दिया है कि इंडिया गठबंधन की राह अब आसान नहीं है। जनता का मूड बदल रहा है और मुकाबला ऐतिहासिक होने वाला है। आने वाले समय में चुनावी रैलियां और गठबंधन के नए समीकरण इस लड़ाई को और भी धार देंगे।
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