चेन्नई | दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार थलपति विजय ने अपनी नई राजनीतिक पारी के साथ तमिलनाडु की सियासत में जबरदस्त धमाका किया है। उनकी पार्टी तमिझागा वेत्री कड़गम (TVK) राज्य में सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है। दक्षिण भारत में सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि वहां अभिनेताओं को देवताओं की तरह पूजा जाता है।
तमिलनाडु चुनाव: एक्टर विजय की TVK सबसे बड़ी पार्टी बनी
तमिलनाडु में थलपति विजय की पार्टी TVK ने मचाया धमाल, 104 सीटों पर बढ़त के साथ बनी सबसे बड़ी शक्ति।
HIGHLIGHTS
- थलापति विजय की पार्टी TVK तमिलनाडु चुनाव में 104 सीटों पर आगे चल रही है।
- सत्ताधारी DMK और विपक्षी AIADMK को पछाड़कर TVK सबसे बड़ी पार्टी बनी।
- विजय ने इरोड की रैली में किसानों के मुद्दों और क्षेत्रीय गौरव को प्रमुखता से उठाया।
- MGR और जयललिता की तरह सिनेमाई पर्दे से निकलकर राजनीति में किंग बने विजय।
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तमिलनाडु में TVK की ऐतिहासिक बढ़त
चुनावी रुझानों के अनुसार, थलापति विजय की पार्टी TVK 104 सीटों पर आगे चल रही है। यह पहली बार चुनाव लड़ रही पार्टी के लिए एक असाधारण उपलब्धि मानी जा रही है।
इस चुनावी लहर में राज्य की दो पारंपरिक द्रविड़ पार्टियां काफी पिछड़ती नजर आ रही हैं। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की अगुवाई वाली सत्ताधारी डीएमके तीसरे स्थान पर खिसक गई है।
वहीं, ईपीएस के नेतृत्व वाली एआईएडीएमके दूसरे स्थान पर बनी हुई है। विजय की पार्टी ने स्पष्ट बहुमत के करीब पहुंचकर चेन्नई के सियासी हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
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रुझानों के बाद अब सरकार गठन को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। बताया जा रहा है कि कई निर्दलीय और छोटे दल विजय के संपर्क में हैं।
सिनेमा से सिंहासन तक का सफल सफर
दक्षिण भारत में सिनेमा और राजनीति का गहरा रिश्ता रहा है। एमजीआर, जयललिता और एनटीआर जैसे सितारों ने पहले पर्दे पर राज किया और फिर जनता का दिल जीता।
एमजीआर ने फिल्मों में गरीबों के मसीहा के रूप में पहचान बनाई थी। इसके बाद जब वे राजनीति में आए, तो जनता ने उन्हें मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुँचाया।
जयललिता को 'अम्मा' के रूप में पूजा गया, जिन्होंने छह बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री के रूप में सेवा की। एनटीआर ने भी आंध्र प्रदेश में तीन बार सत्ता संभाली।
पवन कल्याण जैसे हालिया उदाहरणों ने साबित किया है कि रील लाइफ के नायक रियल लाइफ में भी जननायक बन सकते हैं। विजय अब इसी गौरवशाली कतार में शामिल हो गए हैं।
इरोड की रैली और विजय का वैचारिक रुख
विजय ने अपनी रैलियों में स्थानीय गौरव और किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। इरोड में उन्होंने एक खास डिजाइन की बस के ऊपर चढ़कर भाषण दिया था।
भाषण की शुरुआत में उन्होंने तीन बार 'मंजल, मंजल, मंजल' (हल्दी) कहा। उन्होंने इरोड को हल्दी की राजधानी बताते हुए डीएमके सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया।
विजय ने भाजपा और केंद्र सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने भाजपा को अपना वैचारिक दुश्मन बताते हुए किसी भी गठबंधन की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया।
कलिंगरायन ने विकास के लिए जो साहस दिखाया, वह उन्हें अपनी मां से मिला था। आज वही साहस मुझे तमिल जनता के अटूट प्यार और विश्वास से मिल रहा है।
इतिहास का जिक्र और जनता से जुड़ाव
इरोड की रैली में उन्होंने 13वीं सदी के महान सरदार कलिंगरायन का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कैसे कलिंगरायन ने इलाके के विकास के लिए अपना सब कुछ समर्पित कर दिया था।
विजय ने अपनी तुलना ऐतिहासिक नायकों से करते हुए जनता से भावनात्मक अपील की। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सत्ता नहीं, बल्कि लोगों की सेवा करना है।
करूर भगदड़ जैसे हादसों ने पार्टी के मनोबल को प्रभावित किया था, लेकिन विजय ने हार नहीं मानी। उन्होंने अपनी फिल्मों की तरह राजनीति में भी खुद को रिवाइव किया है।
थलपति विजय की यह जीत तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत है। जनता ने एक बार फिर फिल्मी नायक को अपना जननायक स्वीकार कर लिया है।
इस परिणाम ने द्रविड़ राजनीति के पुराने किलों में दरारें डाल दी हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विजय राज्य की प्रगति के लिए कौन से बड़े कदम उठाते हैं।
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