माउंट आबू | लंबे समय से माउंट आबू का इतिहास गवा रहा है कि यहां पर अवैध निर्माण वतिक्रमण की कार्रवाई केवल छोटे-मोटे व्यवसाय दुकानदार या साजन सामान्य व्यक्ति पर ही सीमित होकर रह जाती किसी बड़े ताकतवर नेता या राजनेता या उसकी रिश्तेदारी या फिर किसी बड़े धनाढ्य व्यक्तित्व के आगे प्रशासन के सारे अफसर समर्पित हो जाते हैं और नोटों या उपहार की चमक के आगे सब कुछ जायज सिद्ध हो जाता है ।।
माउंट आबू: नियमों के विरुद्ध अवैध रूप से बने बड़े कॉटेज बंग्लोज पर चल पाएगा पीला पंजा
HIGHLIGHTS
- अतिक्रमण व अवैध निर्माण के रूप में आम व गरीब व्यक्तियों के छोटे-मोटे व्यवसाय व दुकान तक सीमित हो जाएगा यह अभियान
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गुरु शिखर रोड पर जवाई गांव के ठीक सामने आप जो बंगला देख रहे हैं यह नियमों के विपरीत ही नहीं बिल्कुल नियमों के बहुत ज्यादा का रे जा करके बनाया गया है इको सेंसेटिव जोन के हिसाब से तो इस ग्रामीण क्षेत्र में नवनिर्माण की अनुमतियां कभी नहीं थी मास्टर प्लान भी 2025 में लागू हुआ और इस तरीके से करीबन जो डेढ़ सौ फीट की हाइट पर बना हुआ बांग्ला दिखाई दे रहा है या किसी बड़े सेट का बताया जा रहा है इस पर प्रशासन के पीले पंजे के पहुंचने का साहस तो दूर शायद सोचना भी प्रशासन की एजेंडा में शामिल नहीं होगा क्योंकि उन्हें सारी समस्या इन जन सामान्य लोगों से ही होती है ।
ऐसे तो माउंट आबू में एक से बढ़कर एक अवैध निर्माण और नियमों के पार जाकर बने अवैध निर्माण की एक लंबी श्रृंखला है जिसे उजागर करने जाएंगे तो महीना लग जाएंगे लेकिन बड़ी-बड़ी तालिकाएं जो केवल नियमों नहीं नियमों की धज्जियां उड़ती हुई नजर आ रही है और वह चट्टानों पर बनी हुई है और इको सेंसेटिव जोन का नियम यह कहता है कि 60 डिग्री के ऊपर कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया जा सकता अब यह जो निर्माण कार्य आपको नजर आ रहा है यह 150 डिग्री तो छोड़िए उससे भी ज्यादा हो सकता है अगर नाप लिया जाए तो लेकिन रसूख व धनबल का प्रभाव देखिए यहां प्रशासन की नजरे ही इनायत नहीं हो रही टूटना तो बहुत दूर की बात है ।
बकौल इस तरह की पिक एन्ड चूज अर्थात चयनित व्यक्तियों को ही निशाना बनाकर प्रशासन अपना वह शक्ति प्रदर्शन यहां पूर्व में भी करता आया है और अभी भी यही हुआ है
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असल में पूरे शहर में चर्चा है कि आम व्यक्ति का तो घर कभी भी टूट जाता है वह चाहता है जब भी कुछ बनाना तो प्रशासन के कारण दे वहां पर तुरंत पहुंच जाते हैं और नहीं तो बाद में तो तोड़ ही दिया जाता है लेकिन क्या आप ऐसी बड़ी-बड़ी अट्टालिकाओं या बंगलो उसे पर कभी कार्रवाई होगी या भविष्य में ही तय हो पाएगा फिलहाल इसका जवाब हाल तक निरुत्तर है ।