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राज्य

गृह क्षेत्रों से हटेंगे अधिकारी: राजस्थान पंचायत चुनाव: गृह क्षेत्रों से हटेंगे अधिकारी

महेन्द्रसिंह शेखावत

राजस्थान निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनावों को लेकर अधिकारियों के तबादले के कड़े निर्देश दिए हैं।

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HIGHLIGHTS

  • राज्य निर्वाचन आयोग ने 15 अगस्त 2026 तक सभी गृह क्षेत्र वाले अधिकारियों को हटाने के निर्देश दिए हैं।
  • यह आदेश आगामी पंचायतीराज संस्थाओं और नगरीय निकायों के आम चुनावों को निष्पक्ष बनाने के लिए जारी किया गया है।
  • 30 नवंबर 2026 को कट-ऑफ मानकर पिछले 4 वर्षों में 3 वर्ष से अधिक समय तक जमे अधिकारियों का तबादला होगा।
  • चुनावों की घोषणा के बाद आयोग की अनुमति के बिना किसी भी अधिकारी का स्थानांतरण नहीं किया जा सकेगा।
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जयपुर | राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग ने आगामी पंचायतीराज संस्थाओं और नगरीय निकायों के आम चुनावों को स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। आयोग ने राज्य के सभी जिलों में अपने गृह क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों को आगामी 15 अगस्त तक हटाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

चुनाव आयोग के कड़े निर्देश

आयोग ने राज्य के सभी जिलों में अपने गृह क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों को आगामी 15 अगस्त तक हटाने के कड़े निर्देश जारी किए हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव राजेश वर्मा ने इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश और गाइडलाइन जारी कर दी है।

इस आदेश के तहत चुनाव प्रक्रिया से सीधे तौर पर जुड़े प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को स्थानांतरित किया जाएगा।

इन अधिकारियों पर लागू होगा नियम

आयोग के इस नए फैसले का असर कई वरिष्ठ और कनिष्ठ अधिकारियों पर सीधे तौर पर पड़ने वाला है।

इनमें संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर, जिला निर्वाचन अधिकारी और अतिरिक्त जिला कलेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पद शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त उपखण्ड अधिकारी, सहायक कलेक्टर, तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी इस दायरे में आएंगे।

पुलिस प्रशासन के लिए विशेष नियम

निष्पक्ष चुनाव के लिए पुलिस प्रशासन की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है ताकि भयमुक्त माहौल बना रहे।

पुलिस विभाग में रेंज आईजी, डीआईजी, एसपी, एडिशनल एसपी और डीएसपी को गृह जिलों से हटाया जाएगा।

जयपुर और जोधपुर के पुलिस कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर, डीसीपी और एसीपी भी गृह जिलों में तैनात नहीं रह सकते।

थानाधिकारी और उपनिरीक्षक भी अपने गृह नगरीय या पंचायत समिति क्षेत्र में कार्य नहीं कर सकेंगे।

कट-ऑफ डेट और समय सीमा

आयोग ने इस पूरी तबादला प्रक्रिया के लिए एक विशेष कट-ऑफ तारीख भी निर्धारित की है।

इसके लिए आयोग ने आगामी 30 नवंबर 2026 की तिथि को आधार माना है।

पिछले चार वर्षों में जो अधिकारी तीन वर्ष से अधिक समय से एक ही स्थान पर हैं, वे हटाए जाएंगे।

यह नियम संबंधित जिले, नगरीय क्षेत्र और पंचायत समिति क्षेत्र में समान रूप से लागू होगा।

लापरवाह अधिकारियों पर शिकंजा

चुनाव आयोग ने पिछले चुनावों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त रुख अपनाया है।

ऐसे किसी भी अधिकारी को चुनाव ड्यूटी में नहीं लगाया जाएगा, जिसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश थे।

"स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पुलिस और प्रशासन को मुस्तैदी से काम करना होगा ताकि मतदाता बिना किसी भय के मतदान कर सकें।" - राजेश वर्मा, सचिव, राज्य निर्वाचन आयोग

स्थानांतरण पर रहेगी पूर्ण रोक

आयोग ने स्पष्ट किया है कि चुनावों की आधिकारिक घोषणा होने के बाद किसी भी कर्मी का तबादला नहीं होगा।

विशेष परिस्थितियों में तबादला करने के लिए राज्य सरकार को आयोग से लिखित मंजूरी लेनी होगी।

इसके लिए सरकार को पूर्ण विवरण के साथ अपना प्रस्ताव राज्य निर्वाचन आयोग को भेजना आवश्यक होगा।

संवैधानिक शक्तियों का प्रयोग

राज्य निर्वाचन आयोग ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 243के और 243जेडए के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग किया है।

इन अनुच्छेदों के तहत आयोग को मतदाता सूची तैयार करने और चुनावों के संचालन पर नियंत्रण की शक्ति प्राप्त है।

इसी संवैधानिक अधिकार का प्रयोग करते हुए आयोग ने यह कड़ा कदम उठाने का निर्णय लिया है।

आयोग का मानना है कि स्थानीय चुनावों में अधिकारियों का स्थानीय जुड़ाव मतदान को प्रभावित कर सकता है।

नगरीय निकायों के लिए विशेष दिशा-निर्देश

यह आदेश केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं है बल्कि नगरीय क्षेत्रों पर भी समान रूप से लागू होगा।

नगर निगमों और नगर परिषदों के आयुक्त और उपायुक्त भी अपने गृह नगरीय क्षेत्र में तैनात नहीं रह सकेंगे।

नगर सुधार न्यास के सचिव और विकास प्राधिकरणों के उपायुक्त स्तर के अधिकारियों पर भी यह नियम लागू होगा।

नगरपालिकाओं के अधिशाषी अधिकारी और आबकारी निरीक्षकों को भी अपने गृह क्षेत्र से बाहर जाना होगा।

पंचायत समितियों के लिए कड़े मापदंड

ग्रामीण स्तर पर पंचायत समिति क्षेत्रों में भी आयोग ने कड़े मापदंड लागू करने के निर्देश दिए हैं।

खंड विकास अधिकारी अपने गृह पंचायत समिति क्षेत्र में किसी भी परिस्थिति में तैनात नहीं रह सकेंगे।

थानाधिकारी, आबकारी निरीक्षक और नायब तहसीलदार भी अपने गृह पंचायत समिति क्षेत्र से हटाए जाएंगे।

इस कदम से ग्रामीण स्तर पर होने वाले चुनावों में किसी भी तरह के स्थानीय प्रभाव को पूरी तरह रोका जा सकेगा।

आयोग की सख्त चेतावनी

राज्य निर्वाचन आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि कोई अधिकारी इन मापदंडों के विपरीत तैनात पाया गया तो कड़ी कार्रवाई होगी।

सभी संबंधित विभागों को 15 अगस्त 2026 तक स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी कर आयोग को रिपोर्ट सौंपनी होगी।

चुनावों की घोषणा के बाद किसी भी प्रकार की कोताही या नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

राज्य सरकार को इन दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के आदेश दिए गए हैं ताकि लोकतंत्र सुदृढ़ हो सके।

आदेश का व्यापक प्रभाव और निष्कर्ष

इस बड़े प्रशासनिक बदलाव से राज्य की चुनावी मशीनरी में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।

सभी जिलों में नए अधिकारियों की तैनाती से स्थानीय प्रभाव और पक्षपात की आशंका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

यह कदम राजस्थान में पंचायतीराज संस्थाओं और नगरीय निकायों के चुनावों को लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप संपन्न कराएगा।

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