thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राजस्थान

उज्ज्वला गैस: बायोमेट्रिक अनिवार्य: उज्ज्वला योजना: सब्सिडी के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन जरूरी

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को अब साल में एक बार केवाईसी कराना होगा, वरना सब्सिडी रुक जाएगी।

HIGHLIGHTS

  • उज्ज्वला गैस लाभार्थियों के लिए साल में एक बार बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन अनिवार्य हुआ।
  • वेरिफिकेशन न कराने पर गैस रिफिल पर मिलने वाली सब्सिडी रोकी जा सकती है।
  • राजस्थान के करीब 73 लाख उपभोक्ताओं पर इस नए नियम का सीधा असर पड़ेगा।
  • जिन उपभोक्ताओं ने कभी केवाईसी नहीं कराई, उनके लिए 30 जून आखिरी तारीख है।
ujjwala gas subsidy biometric kyc mandatory update

जयपुर | राजस्थान समेत देशभर के उज्ज्वला गैस कनेक्शन उपभोक्ताओं के लिए केंद्र सरकार ने नया नियम लागू किया है। अब लाभार्थियों को साल में कम से कम एक बार आधार बेस्ड बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करवाना अनिवार्य होगा।

ऐसा नहीं करने पर गैस रिफिल पर मिलने वाली सब्सिडी रोकी जा सकती है। पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस मंत्रालय ने तेल कंपनियों को इस आदेश को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं।

30 जून तक की समय सीमा

मंत्रालय ने उन उपभोक्ताओं के लिए 30 जून तक की समय सीमा तय की है, जिन्होंने कनेक्शन लेने के बाद अब तक एक बार भी बायोमेट्रिक केवाईसी नहीं करवाई है।

तय समय सीमा तक वेरिफिकेशन नहीं करवाने वाले उपभोक्ताओं की सब्सिडी जून के बाद रोक दी जाएगी। यह प्रक्रिया सभी गैस एजेंसियों पर शुरू कर दी गई है।

8वीं रिफिल पर सख्त नियम

मंत्रालय के आदेश के मुताबिक, अगर लाभार्थी साल में 7 रिफिल लेने के बाद 8वीं रिफिल बुक करवाता है, तो उसे पहले वेरिफिकेशन करवाना जरूरी होगा। तभी सब्सिडी की राशि मिलेगी।

"मृतकों और स्थानांतरित लोगों के नाम पर चल रहे फर्जी कनेक्शनों को रोकने के लिए सरकार फ्रेश डेटा तैयार करना चाहती है ताकि पात्र लोगों को लाभ मिले।"

राजस्थान में 73 लाख उपभोक्ता

राजस्थान में वर्तमान में तीनों तेल कंपनियों के करीब 73 लाख उज्ज्वला कनेक्शनधारी हैं। इन उपभोक्ताओं को सरकार साल में 9 सिलेंडर लेने तक सब्सिडी की राशि सीधे बैंक खाते में प्रदान करती है।

केवाईसी का मुख्य उद्देश्य फर्जीवाड़े को रोकना है। कई कनेक्शन ऐसे लोगों के नाम पर चल रहे हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है या जो स्थान छोड़कर जा चुके हैं।

यह कदम गैस वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है। उपभोक्ता अपने नजदीकी गैस वितरक के पास जाकर बायोमेट्रिक अपडेट करवा सकते हैं ताकि उनकी सब्सिडी निर्बाध रूप से जारी रहे।

*Edit with Google AI Studio

शेयर करें: