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राजस्थान

आइसक्रीम में यूरिया-डिटर्जेंट!: बच्चों की आइसक्रीम में यूरिया-डिटर्जेंट, सेहत से खिलवाड़

Pradeep Beedawat

बरेली में फूड सेफ्टी विभाग की जांच में आइसक्रीम में यूरिया और डिटर्जेंट जैसी खतरनाक मिलावट का खुलासा हुआ है।

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HIGHLIGHTS

  • बरेली में आइसक्रीम के 50% से ज्यादा सैंपल जांच में फेल हो गए।
  • मिलावट में यूरिया, डिटर्जेंट और सिंथेटिक केमिकल का इस्तेमाल किया जा रहा है।
  • यह मिलावट बच्चों के लिवर, किडनी और पाचन तंत्र पर 'स्लो पॉइजन' जैसा असर करती है।
  • विशेषज्ञों ने सड़क किनारे बिकने वाली बिना ब्रांड की आइसक्रीम से बचने की सलाह दी है।
urea detergent found in ice cream in bareilly health risk

बरेली | गर्मी से राहत देने वाली रंग-बिरंगी आइसक्रीम अब आपके बच्चों की सेहत के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है। फूड सेफ्टी विभाग की हालिया जांच रिपोर्ट ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसमें बाजार में बिक रही कई आइसक्रीम में यूरिया और डिटर्जेंट जैसी खतरनाक चीजें मिली हैं।

यह मिलावट बच्चों के शरीर में 'धीमे जहर' की तरह काम कर रही है, जिससे पेट, किडनी और लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

गर्मी बढ़ते ही सक्रिय हुए मिलावटखोर

जैसे-जैसे तापमान बढ़ रहा है, आइसक्रीम और सॉफ्टी की मांग आसमान छू रही है। इसी मौके का फायदा उठाकर मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं।

वे दूध और क्रीम की जगह सिंथेटिक फैट, सस्ते केमिकल, आर्टिफिशियल फ्लेवर और इंडस्ट्रियल रंगों का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे वे कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं।

विभागीय अधिकारियों ने पुष्टि की है कि कुछ नमूनों में दूध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए यूरिया और आइसक्रीम का टेक्सचर सुधारने के लिए डिटर्जेंट का इस्तेमाल किया गया है।

आंकड़े बताते हैं कि पिछले चार महीनों में जांचे गए 529 खाद्य नमूनों में से 200 से अधिक फेल हो गए। चिंता की बात यह है कि आइसक्रीम के 50 प्रतिशत से ज्यादा नमूने गुणवत्ता परीक्षण में खरे नहीं उतरे

बच्चों की सेहत पर सीधा हमला

बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। इस वजह से मिलावटी आइसक्रीम का असर उन पर सबसे पहले और सबसे ज्यादा होता है।

लगातार ऐसी आइसक्रीम खाने से फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त, पेट का संक्रमण और एलर्जी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वंदना नेगी कहती हैं, "गर्मियों में फूड पॉइजनिंग और पेट की बीमारियों के कई मामलों के पीछे सस्ती और मिलावटी आइसक्रीम एक बड़ी वजह बन रही है।"

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. महेश कुमार मेहरोत्रा ने भी चेतावनी दी है कि सिंथेटिक फ्लेवर और कृत्रिम रंग बच्चों के हार्मोनल सिस्टम और लिवर को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं।

कैसे पहचानें मिलावटी आइसक्रीम?

आप कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर मिलावटी आइसक्रीम की पहचान कर सकते हैं।

अगर आइसक्रीम का रंग जरूरत से ज्यादा चमकीला है या उसमें तेज कृत्रिम खुशबू आ रही है, तो सावधान हो जाएं।

खाने पर मुंह में साबुन जैसा स्वाद महसूस होना भी मिलावट का संकेत है।

इसके अलावा, पैकेट पर लाइसेंस नंबर और निर्माता की जानकारी जरूर जांचें। सड़क किनारे बिकने वाली खुली और बिना ब्रांड वाली आइसक्रीम से बचना सबसे सुरक्षित है।

विभाग की लगातार कार्रवाई

फूड सेफ्टी विभाग के जिला अधिकारी राहुल सिंह ने बताया कि मिलावटी डेयरी उत्पाद शरीर के लिए धीमे जहर की तरह हैं। विभाग लगातार सैंपलिंग और कार्रवाई कर रहा है। लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है कि वे केवल प्रमाणित और सुरक्षित खाद्य उत्पाद ही खरीदें। यह सुनिश्चित करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि बच्चे जो खा रहे हैं वह सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक हो।

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