अरुंधति का सम्मान करेगी सरकार: अरुंधति चौधरी अब सम्मान समारोह करेगी सरकार
ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता अरुंधति चौधरी के स्वागत विवाद के बाद राजस्थान क्रीड़ा परिषद ने उनकी नाराजगी दूर करने और सम्मान समारोह आयोजित करने का आश्वासन दिया है।
HIGHLIGHTS
- कॉमनवेल्थ गेम्स की स्वर्ण पदक विजेता अरुंधति चौधरी के स्वागत पर विवाद।
- राजस्थान क्रीड़ा परिषद ने बेरुखी के आरोपों के बाद सम्मान समारोह का ऐलान किया।
- परिषद सचिव ने कहा- व्यस्तता के कारण एयरपोर्ट नहीं जा सका, नाराजगी दूर करेंगे।
- राज्य सरकार की नीति के तहत अरुंधति को एक करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि मिलेगी।
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कोटा की रहने वाली अरुंधति चौधरी जब मंगलवार को जयपुर लौटीं, तो एयरपोर्ट पर राजस्थान क्रीड़ा परिषद द्वारा कथित तौर पर बेरुखी दिखाए जाने से वह और उनका परिवार निराश हो गया।
परिषद ने दी सफाई
इस मामले पर राजस्थान क्रीड़ा परिषद के सचिव राजकेश मीणा ने गुरुवार को अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि व्यस्तता के कारण वह स्वयं एयरपोर्ट पर स्वागत के लिए उपस्थित नहीं हो सके थे।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि परिषद की ओर से एक खेल अधिकारी को उनकी अगवानी के लिए भेजा गया था। मीणा ने अरुंधति की किसी भी नाराजगी को दूर करने का आश्वासन दिया है।
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जल्द होगा सम्मान समारोह
परिषद सचिव ने यह भी घोषणा की कि अरुंधति चौधरी के सम्मान में जल्द ही एक भव्य समारोह का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने कहा, "समारोह की तिथि और स्थान जल्द ही तय कर लिए जाएंगे।"
मीणा ने यह भी बताया कि ग्लासगो से लौटने के बाद उनकी अरुंधति से कई बार बातचीत हुई है और यदि कोई गलतफहमी है तो उसे सुलझा लिया जाएगा।
मिलेगी एक करोड़ की पुरस्कार राशि
राजकेश मीणा ने राज्य सरकार की खेल नीति का हवाला देते हुए बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाले खिलाड़ी को एक करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि दी जाती है।
उन्होंने पुष्टि की कि यह राशि अरुंधति को भी प्रदान की जाएगी। उन्होंने खिलाड़ियों को तैयारी के लिए अनुदान नहीं मिलने के आरोपों को भी खारिज कर दिया और कहा कि परिषद हरसंभव सहयोग प्रदान करती है।
बुखार में लड़ा था फाइनल मुकाबला
जयपुर पहुंचने पर अरुंधति ने अपनी ऐतिहासिक जीत के अनुभव को साझा किया था। उन्होंने बताया था कि फाइनल मुकाबले के दिन उन्हें तेज बुखार था और शरीर में काफी कमजोरी थी।
इसके बावजूद, देश के लिए स्वर्ण पदक जीतने का जुनून उन पर हावी रहा। उन्होंने कहा, "मेरे दिमाग में सिर्फ भारत के लिए तिरंगा लहराने का लक्ष्य था।"
अरुंधति ने बताया कि कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे बड़े टूर्नामेंट चार साल में एक बार आते हैं, और वह इस मौके को गंवाना नहीं चाहती थीं। उन्होंने तय किया था कि चाहे कुछ भी हो, उन्हें रिंग में अपना शत-प्रतिशत देना है।
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