अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ईरान के तेल निर्यात को प्रभावी रूप से रोक दिया है।
ईरान के तेल निर्यात पर रोक: होर्मुज स्ट्रेट में ईरान के तेल निर्यात पर लगी रोक: अमेरिका
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के अनुसार अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट से ईरानी तेल के निर्यात को रोक दिया है, जबकि अन्य देशों का तेल बाजार में पहुंच रहा है।
HIGHLIGHTS
- अमेरिकी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट से ईरान का तेल निर्यात प्रभावी रूप से रोक दिया है।
- हर दिन लगभग 13 से 14 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंच रहा है।
- अमेरिकी सैन्य बल वाणिज्यिक जहाजों को हमलों से बचाने में जुटे हुए हैं।
- प्रतिबंधों का मकसद ईरान की सेना और उससे जुड़े समूहों के संसाधन घटाना है।
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इसके बावजूद अन्य देशों का करोड़ों बैरल कच्चा तेल अब भी अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक लगातार पहुंच रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट में तेल की आपूर्ति
रुबियो ने बताया कि रोजाना करीब 13 से 14 मिलियन बैरल तेल इस अहम समुद्री मार्ग से होकर दुनिया के बाजारों में जा रहा है।
अमेरिकी सैन्य बल वाणिज्यिक जहाजों को ईरानी हमलों से बचाने और उनकी पूर्ण सुरक्षा करने में पूरी तरह लगे हुए हैं।
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यह रणनीति ईरान की अर्थव्यवस्था को कमजोर करने और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने की कोशिश का हिस्सा है।
साक्षात्कार में किए गए दावे
यह टिप्पणी उन्होंने 15 अक्टूबर को 'ब्रेटबार्ट न्यूज' को दिए इंटरव्यू में की थी, जिसे अमेरिकी विदेश विभाग ने 19 अक्टूबर को जारी किया।
रुबियो के अनुसार, पिछले 10 से 30 दिनों के औसत के आधार पर वैश्विक बाजारों में तेल की आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।
रणनीतिक ऊर्जा मार्ग का महत्व
होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है।
खाड़ी क्षेत्र के उत्पादक देश अपना तेल भारत और एशिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं तक इसी जलमार्ग से पहुंचाते हैं।
विदेश मंत्री ने दावा किया कि सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान इस जलमार्ग पर अपना पुराना प्रभाव खो चुका है।
प्रतिबंधों के जरिए जो भी एक डॉलर आप उनसे रोकते हैं, वह एक डॉलर कम हो जाता है जो हिज्बुल्लाह, हमास या इराक के समूहों को मिल सकता था।
प्रतिबंध और सैन्य अभियान
हालांकि इस दावे के साथ कोई स्वतंत्र शिपिंग डेटा या आंकड़े पेश नहीं किए गए हैं।
रुबियो ने कहा कि अमेरिकी अभियानों ने ईरान की नौसैनिक ताकत, वायु रक्षा प्रणाली और मिसाइल-ड्रोन सुविधाओं को कमजोर किया है।
प्रशासन की कोशिश है कि ईरान ऊर्जा आपूर्ति का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए न कर सके और परमाणु हथियार विकसित न कर पाए।
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