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भारत

वाराणसी की महिलाओं की ईरान को मदद: वाराणसी की महिलाओं ने ईरान के लिए खोला दिल: दान किए सोने-चांदी के गहने और बच्चों ने दी पॉकेट मनी

मानवेन्द्र जैतावत मानवेन्द्र जैतावत

वाराणसी के शिवपुर स्थित मदरसे में शिया समुदाय की महिलाओं ने ईरान की मदद के लिए एक अभियान चलाया। इस दौरान महिलाओं ने नकद राशि के साथ अपने कीमती गहने भी दान किए ताकि युद्ध प्रभावितों की मदद हो सके।

HIGHLIGHTS

  • वाराणसी के शिवपुर में शिया महिलाओं ने ईरान की मदद के लिए विशेष कैंप लगाया।
  • महिलाओं ने अपनी हैसियत के अनुसार सोने की अंगूठियां और चांदी के कड़े दान किए।
  • बच्चों ने भी अपनी पॉकेट मनी और चांदी के गहने सहायता राशि के रूप में प्रदान किए।
  • अब तक करीब 50 हजार रुपये नकद और भारी मात्रा में आभूषण एकत्र किए गए हैं।
varanasi women donate gold silver for iran relief

वाराणसी | उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवता और सहानुभूति की नई मिसाल पेश की है। शहर के शिवपुर स्थित एक मदरसे में शिया समुदाय की महिलाओं ने ईरान के लोगों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है।

मानवता के लिए एकजुट हुईं महिलाएं

ईरान में चल रहे संघर्ष और वहां की विषम परिस्थितियों को देखते हुए वाराणसी की महिलाओं ने एक विशेष कैंप का आयोजन किया। इस कैंप का उद्देश्य खाड़ी युद्ध से प्रभावित मासूम बच्चों और आम नागरिकों के लिए आर्थिक सहायता जुटाना था।

इस अभियान में महिलाओं ने न केवल बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, बल्कि अपनी प्रिय वस्तुओं का भी त्याग किया। कई महिलाओं ने अपनी सोने की अंगूठियां और चांदी के गहने ईरान के पीड़ितों के नाम कर दिए।

बच्चों ने पेश की मिसाल

इस नेक काम में केवल बड़े ही नहीं, बल्कि बच्चे भी पीछे नहीं रहे। वाराणसी के इन नन्हे बच्चों ने अपने गुल्लक तोड़कर अपनी पॉकेट मनी दान कर दी। कुछ बच्चों ने तो अपने चांदी के कड़े तक उतारकर दे दिए।

इन बच्चों का यह निस्वार्थ प्रेम देखकर वहां मौजूद हर व्यक्ति भावुक हो गया। बच्चों का कहना था कि वे ईरान के उन बच्चों की मदद करना चाहते हैं जो युद्ध के कारण मुश्किलों का सामना कर रहे हैं।

आर्थिक और भावनात्मक सहयोग

मुहिम का नेतृत्व कर रही तनवीर फातिमा ने बताया कि अमेरिका और इजरायल की नीतियों के कारण ईरान संकट में है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ईरान एक कठिन दौर से गुजर रहा है, इसलिए उसका समर्थन करना जरूरी है।

एकत्रित की गई सहायता राशि में लगभग 50 हजार रुपये नकद और बड़ी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण शामिल हैं। इस पूरी सहायता को एक विशेष कमेटी के माध्यम से ईरान भेजने की तैयारी की जा रही है।

ईरान से गहरा जुड़ाव

वाराणसी की महिलाओं का ईरान से एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव भी है। फातिमा के अनुसार, शिया समुदाय के बड़ी संख्या में बच्चे उच्च शिक्षा और धार्मिक तालीम हासिल करने के लिए ईरान जाते हैं।

यही कारण है कि वहां के लोगों के प्रति उनके मन में विशेष सहानुभूति है। महिलाओं का मानना है कि इस संकट की घड़ी में ईरान के लोगों को अकेला नहीं छोड़ा जा सकता।

देशभक्ति का जज्बा भी बरकरार

मदद करने के साथ-साथ इन महिलाओं ने अपनी देशभक्ति का परिचय भी दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भले ही वे ईरान की मदद कर रही हैं, लेकिन उनके लिए भारत सबसे पहले है।

महिलाओं ने जोर देकर कहा कि यदि कभी भारत और ईरान के बीच किसी प्रकार का तनाव होता है, तो वे हमेशा अपने देश भारत के साथ मजबूती से खड़ी रहेंगी। उनका यह सहयोग पूरी तरह से मानवीय आधार पर है।

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