जयपुर | राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधानसभा की समितियों को और अधिक प्रभावी, क्रियाशील और जवाबदेह बनाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने समितियों की कार्यप्रणाली में सुधार की आवश्यकता जताई है।
देवनानी ने हाल ही में विधानसभा की समितियों के सभापतियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य समितियों के माध्यम से शासन पर बेहतर नियंत्रण और निगरानी सुनिश्चित करना था।
समितियों को सक्रिय बनाएंगे देवनानी: विधानसभा समितियों को देवनानी का मंत्र: बढ़ेगी जवाबदेही
विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने समितियों की कार्यप्रणाली सुधारने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं।
HIGHLIGHTS
- विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने समितियों को अधिक सक्रिय और जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए।
- समितियों के सदस्यों की उपस्थिति बढ़ाने और महीने में दो परीक्षण अनिवार्य करने पर जोर दिया गया।
- सभापतियों ने मानदेय बढ़ाने और घटनाओं पर स्वतः संज्ञान लेने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
- बैठक में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित कई वरिष्ठ विधायक और सभापति मौजूद रहे।
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विधानसभा समितियों का प्रशासनिक महत्व
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि समितियां वास्तव में सदन का एक छोटा रूप होती हैं। इनका मुख्य कार्य विभिन्न सरकारी विभागों के कामकाज और उनके द्वारा किए गए खर्चों की बारीकी से जांच करना है।
वित्तीय समितियों के जरिए प्रदेश के वित्तीय प्रबंधन की पूरी निगरानी की जाती है। राजकीय उपक्रम समिति सरकारी संस्थानों की कार्यप्रणाली पर नजर रखती है, जिससे भ्रष्टाचार और लापरवाही पर अंकुश लगाया जा सके।
अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए बनी समितियां इन वर्गों के बजट की समीक्षा करती हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि विकास की योजनाएं जमीनी स्तर तक पहुंचें।
सदस्यों की सक्रियता और उपस्थिति पर जोर
देवनानी ने सभापतियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे अपनी समितियों में सदस्यों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करें। सदस्यों को विधायी कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल करना लोकतंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक सदस्य को समिति की बैठक के समय का पूरा सदुपयोग करना चाहिए। सदस्यों की रुचि बढ़ाने के लिए सभापतियों को नई कार्यप्रणाली विकसित करनी होगी ताकि परिणाम सकारात्मक और जनहितकारी हों।
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परीक्षणों की संख्या बढ़ाने का लक्ष्य
विधानसभा अध्यक्ष ने निर्देश दिया कि समितियों को संबंधित विभागों के मामलों में परीक्षणों की संख्या बढ़ानी चाहिए। इसके लिए विभागों से आवश्यक जानकारी और विवरण अनिवार्य रूप से समय पर मंगवाए जाने चाहिए।
देवनानी ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि एक महीने में कम से कम दो परीक्षण आवश्यक रूप से किए जाएं। इससे प्रशासनिक सुधारों को गति मिलेगी और सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
यदि कोई विभागीय अधिकारी जानकारी देने के लिए समय बढ़ाने का अनुरोध करता है, तो उसे दो दिन से अधिक का समय नहीं दिया जाना चाहिए। इससे जांच प्रक्रियाओं में होने वाली देरी कम होगी।
"विधानसभा की समितियां सदन का लघुरूप होती हैं। इन्हें प्रभावी बनाना और इनकी जवाबदेही तय करना हमारी प्राथमिकता है ताकि जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।" - वासुदेव देवनानी
सभापतियों के सुझाव और भविष्य की रणनीति
बैठक में उपस्थित सभापतियों ने समितियों को अधिक सशक्त बनाने के लिए कई उपयोगी सुझाव दिए। इनमें समितियों की बैठक 10 दिन करने और सदस्यों के मानदेय को बढ़ाने का प्रस्ताव शामिल था।
सभापतियों ने सुझाव दिया कि समितियों को किसी भी बड़ी घटना या दुर्घटना पर स्वतः संज्ञान लेने का अधिकार मिलना चाहिए। इससे शासन में समितियों का प्रभाव और अधिक बढ़ेगा और न्याय सुनिश्चित होगा।
बैठक में एक जिले में हर महीने एक बार जाकर प्रत्यक्ष समीक्षा करने का भी सुझाव आया। इससे समितियों को धरातल पर हो रहे कार्यों की वास्तविक स्थिति का पता चल सकेगा।
बैठक के समय में बदलाव के सुझाव भी दिए गए, जिसमें सुबह 11 से 2 बजे और दोपहर 2:30 से 5:30 बजे तक की दो पारियों में काम करने की बात कही गई।
इस महत्वपूर्ण बैठक में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, कालीचरण सराफ, राजेंद्र पारीक और अन्य वरिष्ठ विधायक उपस्थित रहे। विधानसभा के प्रमुख सचिव भारत भूषण शर्मा ने भी प्रशासनिक सहयोग का आश्वासन दिया।
वासुदेव देवनानी की इस पहल से राजस्थान विधानसभा की समितियों की कार्यशैली में बड़े बदलाव की उम्मीद है। समितियों की बढ़ती सक्रियता से न केवल सुशासन मजबूत होगा, बल्कि जनता का लोकतंत्र में विश्वास भी बढ़ेगा।
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