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राजस्थान

सनातन की वैज्ञानिकता और युवा: युवाओं को बताएं सनातन की वैज्ञानिकता: वासुदेव देवनानी

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

विधानसभा अध्यक्ष ने युवाओं को रामायण और गीता पढ़ने के लिए किया प्रेरित।

HIGHLIGHTS

  • विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने युवाओं को सनातन धर्म की वैज्ञानिकता समझाने पर विशेष जोर दिया।
  • उन्होंने नई पीढ़ी को रामायण और गीता के गहन अध्ययन के लिए प्रेरित कर सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा दिया।
  • सनातन संवाद कार्यक्रम को अब प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित कर व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।
  • मंदिरों की गृहस्थ और परिवार आधारित सेवा परंपरा को सामाजिक समरसता के लिए एक जीवंत उदाहरण बताया गया।
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जयपुर | राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा है कि युवाओं को सनातन धर्म की वैज्ञानिकता से परिचित कराना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने रामायण और गीता के अध्ययन पर जोर दिया। देवनानी ने जयपुर में 'सनातन संवाद' कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि सनातन शाश्वत है और इसे कोई भी खत्म नहीं कर सका है। उन्होंने युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत को अपनाने का आह्वान किया।

सनातन की वैज्ञानिकता और युवा शक्ति

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सनातन संस्कृति पर गहन मंथन के साथ व्यावहारिक पहल की आवश्यकता है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों को सनातन के माध्यम से एक सूत्र में पिरोने की बात पर बल दिया। देवनानी ने संस्कृति युवा संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में दीप प्रज्ज्वलन किया। उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही सनातन संस्कृति का विस्तार होगा और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन मूल्यों की प्रासंगिकता वर्तमान समय में और अधिक बढ़ गई है। सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक संरक्षण और जनजागरण जैसे मुद्दों पर निरंतर चर्चा होना समाज के हित में बहुत जरूरी है।

मंदिरों की जीवंत गृहस्थ परंपरा

राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष डॉ. अरूण चतुर्वेदी ने कहा कि गृहस्थ परंपरा से संचालित मंदिर आज भी समाज में एक सशक्त व्यवस्था के रूप में कार्य कर रहे हैं। यह परंपरा अनुकरणीय और जीवंत है। चतुर्वेदी के अनुसार, परिवार आधारित सेवा में श्रद्धा और पारदर्शिता का संतुलित समन्वय होता है। यह व्यवस्था मंदिरों को सीधे समाज से जोड़ती है, जिससे उत्तरदायित्व और निरंतरता का भाव बना रहता है।

"सनातन संस्कृति हमारी पहचान और समाज की आधारशिला है। इसे सशक्त बनाए रखने के लिए संवाद, जागरूकता और समाज की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।" - वासुदेव देवनानी

प्रदेशव्यापी जनजागरण अभियान की योजना

कार्यक्रम के आयोजक पंडित सुरेश मिश्रा ने बताया कि समाज में समन्वय की भारी आवश्यकता है। प्रदेश में अनेक स्थानों पर गृहस्थ आधारित सेवा परंपरा सफलतापूर्वक संचालित हो रही है, जो एक शुभ संकेत है। कार्यक्रम संयोजक पंडित राजकुमार चतुर्वेदी ने जानकारी दी कि सनातन संवाद को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश के विभिन्न जिलों में भी कार्यक्रम होंगे। इसके माध्यम से हर वर्ग तक पहुँचकर जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।

परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन

संवाद में उपस्थित विद्वानों ने कहा कि समाज को जोड़ने के लिए ऐसे मंचों की बहुत जरूरत है। इसके माध्यम से ही हम अपनी प्राचीन परंपरा और आधुनिक जीवनशैली के बीच बेहतर संतुलन स्थापित कर सकते हैं। संस्था के संरक्षक एच.सी. गणेशिया ने कहा कि सनातन संवाद केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक सतत विचार प्रक्रिया है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन लाना है। इस अवसर पर त्रिवेणी धाम के आचार्य संत राम रिछपाल दास और संत धन्ना पीठाधीश्वर बजरंग देवाचार्य सहित कई गणमान्य संत उपस्थित रहे। सभी ने सनातन के संरक्षण पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए। कार्यक्रम में श्रीमती ज्योति खंडेलवाल, पुनीत कर्णावट और अन्य प्रमुख हस्तियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में सनातन मूल्यों को आधुनिक संदर्भ में समझने पर जोर दिया। अंततः, देवनानी का यह संदेश युवाओं को अपनी जड़ों की ओर लौटने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा देता है। यह संवाद समाज को एक नई और सकारात्मक दिशा देने में निश्चित ही सफल होगा।

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