जयपुर | राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नाम से फर्जी पत्र और एआई जनरेटेड वीडियो वायरल करने के मामले में बड़ी खबर आई है। जयपुर की एक ट्रायल कोर्ट ने गिरफ्तार चारों आरोपियों को जमानत दे दी है।
वसुंधरा राजे फर्जी लैटर केस में जमानत: वसुंधरा राजे का फर्जी लैटर वायरल करने वालों को मिली जमानत
ट्रायल कोर्ट ने एआई जनरेटेड वीडियो वायरल करने वाले चारों आरोपियों को दी राहत।
HIGHLIGHTS
- ट्रायल कोर्ट ने वसुंधरा राजे फर्जी लैटर केस के चारों आरोपियों को जमानत दे दी है।
- आरोपियों ने एआई तकनीक का इस्तेमाल कर न्यूज चैनल का फर्जी वीडियो बनाया था।
- मध्यप्रदेश पुलिस ने कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े इन आरोपियों को हिरासत में लिया था।
- वसुंधरा राजे ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस पत्र को पूरी तरह फर्जी बताया था।
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कोर्ट ने दी चारों आरोपियों को राहत
लिंक जज श्रृंगिका जाजू ने अमृता धूमाल, बिलाल खान, इमाम अहमद और निखिल प्रजापत को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। आरोपियों ने दलील दी कि उनका नाम मूल एफआईआर में नहीं था।
बचाव पक्ष की दलीलें और मामला
आरोपियों के वकील ने कहा कि उन्हें इस मामले में फंसाया गया है और जांच प्रक्रिया लंबी चलने वाली है। ऐसे में उन्हें जेल में रखना उचित नहीं है, जिसके बाद अदालत ने राहत प्रदान की।
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"आरोपियों का कहना है कि उन्हें इस मामले में फंसाया गया है और जांच में समय लगेगा, इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए।"
निजी चैनल की शिकायत पर कार्रवाई
यह मामला एक निजी न्यूज चैनल के रिपोर्टर की शिकायत पर ज्योति नगर थाने में दर्ज हुआ था। आरोप था कि चैनल के लोगो और एंकर का इस्तेमाल कर वीडियो एडिट किया गया था।इस वीडियो के जरिए वसुंधरा राजे के हवाले से आरक्षण पर भाजपा के रुख को लेकर भ्रामक जानकारी फैलाई गई थी। राजे ने इस पत्र को पूरी तरह फर्जी बताते हुए खंडन किया था।
कांग्रेस आईटी सेल से जुड़ा मामला
सोशल मीडिया पर भ्रम फैलाने के आरोप में मध्यप्रदेश पुलिस ने कांग्रेस आईटी सेल से जुड़े इन चार लोगों को हिरासत में लिया था। बाद में जयपुर पुलिस इन्हें गिरफ्तार कर यहां लाई थी।अब जमानत मिलने के बाद इस मामले में कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी, लेकिन आरोपियों को फिलहाल जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। डिजिटल जालसाजी के इस मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं।
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