नई दिल्ली | भारतीय महिला पहलवान विनेश फोगाट के लिए एशियन गेम्स 2026 का सपना अभी भी अधर में लटका हुआ नजर आ रहा है। दिल्ली हाईकोर्ट से ट्रायल में शामिल होने की अनुमति मिलने के बाद भी उनकी राह आसान नहीं है।
विनेश फोगाट: एशियन गेम्स पर संशय: विनेश फोगाट को राहत, पर एशियन गेम्स की राह कठिन
दिल्ली हाईकोर्ट की राहत के बावजूद विनेश फोगाट के एशियन गेम्स खेलने पर सस्पेंस बरकरार है।
HIGHLIGHTS
- विनेश फोगाट को दिल्ली हाईकोर्ट ने एशियन गेम्स ट्रायल में शामिल होने की अनुमति दी।
- एशियन गेम्स की 'लांग लिस्ट' में विनेश का नाम शामिल नहीं होने से पेंच फंसा है।
- WFI ने एंटी-डोपिंग नियमों और नोटिस पीरियड का हवाला देकर विनेश को अयोग्य कहा था।
- अंतिम फैसला एशियन ओलंपिक परिषद (OCA) और जापान की आयोजन समिति के हाथ में है।
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अदालत ने विनेश फोगाट की याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें बड़ी राहत प्रदान की है। लेकिन तकनीकी नियमों और समय-सीमा के चलते उनके जापान जाने पर सवालिया निशान लगा हुआ है।
विनेश फोगाट ने हाल ही में कुश्ती महासंघ के फैसलों को अदालत में चुनौती दी थी। महासंघ ने उन्हें कुछ तकनीकी कारणों से आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था।
दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला और मातृत्व का अधिकार
दिल्ली हाईकोर्ट ने 23 मई को दिए अपने फैसले में एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि मातृत्व को किसी महिला खिलाड़ी के करियर में बाधा नहीं बनाया जा सकता।
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अदालत ने माना कि मातृत्व को किसी महिला खिलाड़ी के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल करना गलत है। इसी आधार पर विनेश को आगामी ट्रायल में हिस्सा लेने की छूट दी गई है।
यह ट्रायल 30 और 31 मई को आयोजित किए जाने हैं। विनेश के लिए यह ट्रायल जीतना पहली और सबसे अनिवार्य शर्त है। इसके बिना वे एशियन गेम्स के लिए दावा पेश नहीं कर सकेंगी।
लांग लिस्ट का तकनीकी पेंच
एशियन गेम्स की प्रक्रिया के अनुसार, सभी देशों को संभावित खिलाड़ियों की एक 'लांग लिस्ट' पहले ही भेजनी होती है। विनेश का नाम इस सूची में शामिल नहीं किया गया था।
भारतीय कुश्ती फेडरेशन (WFI) ने यह लिस्ट इंडियन ओलिंपिक एसोसिएशन (IOA) को भेजी थी। आईओए ने इसे आगे एशियन ओलंपिक परिषद (OCA) और जापान की आयोजन समिति को भेज दिया है।
अब चूंकि विनेश का नाम मूल सूची में नहीं है, इसलिए उन्हें शामिल करना एक विशेष परिस्थिति होगी। इसके लिए भारत सरकार और आईओए को विशेष अनुरोध करना होगा।
समय-सीमा का उल्लंघन
नियमों के अनुसार, राष्ट्रीय खेल महासंघों को 4 मई तक अपनी सूची भेजनी थी। वहीं भारतीय ओलंपिक संघ के लिए यह समय-सीमा 14 मई 2026 निर्धारित की गई थी।
यह समय-सीमा अब समाप्त हो चुकी है। ऐसे में विनेश फोगाट का नाम सिस्टम में दर्ज करना पूरी तरह से एशियन ओलंपिक परिषद (OCA) के विवेक पर निर्भर करता है।
WFI के आरोप और विनेश की दलीलें
भारतीय कुश्ती महासंघ ने विनेश फोगाट पर एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया था। महासंघ का कहना था कि संन्यास से वापसी के लिए विनेश ने तय नोटिस नहीं दिया।
नियमों के मुताबिक, संन्यास से वापस आने वाले एथलीट को छह महीने पहले सूचना देनी होती है। विनेश ने इस नियम का पालन नहीं किया, ऐसा महासंघ का दावा था।
इसी आधार पर डब्ल्यूएफआई ने विनेश को 26 जून 2026 तक घरेलू प्रतियोगिताओं से प्रतिबंधित कर दिया था। हालांकि, कोर्ट ने अब इस प्रतिबंध के बीच ट्रायल का रास्ता खोल दिया है।
"पिछले डेढ़ साल से मैं रेसलिंग मैट से काफी दूर थी। अब मैं पूरी ईमानदारी से मेहनत कर रही हूं ताकि फिर से देश के लिए मेडल जीत सकूं और तिरंगे का मान बढ़ाऊं।"
बृजभूषण शरण सिंह के साथ विवाद
विनेश फोगाट पिछले लंबे समय से कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। उन्होंने यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे।
विनेश ने आरोप लगाया था कि महासंघ के टूर्नामेंट ऐसे स्थानों पर आयोजित किए जाते हैं जहां बृजभूषण का दबदबा है। उन्होंने गोंडा में होने वाले टूर्नामेंट पर भी सवाल उठाए थे।
विनेश का कहना है कि वहां खिलाड़ियों को न्याय मिलना नामुमकिन है। उन्होंने खेल मंत्रालय और सरकार पर मूक दर्शक बने रहने का भी आरोप लगाया था।
मैदान पर विनेश की असली चुनौती
अगर विनेश को तकनीकी रूप से मंजूरी मिल भी जाती है, तो उन्हें मैट पर खुद को साबित करना होगा। 57 किलो वेट कैटेगरी में उनका मुकाबला आसान नहीं है।
इस कैटेगरी में उनका मुकाबला मनीषा भानवाला और नेहा शर्मा जैसी दिग्गज खिलाड़ियों से होगा। मनीषा एशियन चैंपियनशिप में गोल्ड जीत चुकी हैं, जबकि नेहा वर्ल्ड मेडलिस्ट हैं।
विनेश फोगाट को अपनी फिटनेस और लय वापस पानी होगी। लंबे समय तक मैट से दूर रहने के कारण उनकी मैच प्रैक्टिस पर भी असर पड़ा है, जो ट्रायल में चुनौती बनेगा।
पेरिस ओलंपिक का दर्द
विनेश फोगाट के लिए पिछला एक साल काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। पेरिस ओलंपिक 2024 में वे फाइनल तक पहुंची थीं, लेकिन 100 ग्राम ज्यादा वजन के कारण डिस्क्वालिफाई हो गईं।
उस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। विनेश ने इसके बाद संन्यास का मन बना लिया था, लेकिन बाद में उन्होंने फिर से वापसी करने का साहसिक निर्णय लिया।
अब एशियन गेम्स उनके लिए खुद को फिर से साबित करने का सबसे बड़ा मंच है। हालांकि, कोर्ट की राहत के बाद अब सबकी नजरें अंतरराष्ट्रीय खेल निकायों के फैसले पर टिकी हैं।
निष्कर्ष और भविष्य की संभावना
विनेश फोगाट की यह कानूनी लड़ाई केवल उनके करियर के लिए नहीं, बल्कि महिला खिलाड़ियों के अधिकारों के लिए भी महत्वपूर्ण है। कोर्ट का रुख सकारात्मक रहा है।
यदि विनेश ट्रायल जीतती हैं और ओसीए उन्हें विशेष अनुमति देता है, तो यह भारतीय कुश्ती के लिए एक बड़ी खबर होगी। खेल प्रेमी उनकी वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
आगामी कुछ दिन विनेश के करियर की दिशा तय करेंगे। क्या वे सभी बाधाओं को पार कर जापान की धरती पर तिरंगा लहरा पाएंगी, यह देखना दिलचस्प होगा।
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