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भारत

सोना: दुनिया में सस्ता, भारत में महंगा क्यों? जानें वजह

जोगेन्द्र सिंह शेखावत

WGC रिपोर्ट के अनुसार, मई 2026 में वैश्विक सोना 1.4% सस्ता हुआ, पर भारत में 4.1% महंगा हो गया।

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HIGHLIGHTS

  • मई 2026 में वैश्विक सोना 1.4% गिरा, भारत में 4.1% बढ़ा।
  • सरकार ने सोने पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% किया।
  • डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से भी कीमतें बढ़ीं।
  • 2026 में अब तक सोने ने भारत में 17.6% का रिटर्न दिया है।
why gold price is increasing in india despite global fall

नई दिल्ली | वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की एक हालिया रिपोर्ट ने सोने के बाजार में एक दिलचस्प विरोधाभास को उजागर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2026 में जहां वैश्विक स्तर पर सोने की कीमतों में 1.4% की गिरावट आई, वहीं भारत में यह 4.1% महंगा हो गया।

भारत में सोना महंगा क्यों हो रहा है?

यह सवाल हर किसी के मन में है कि जब दुनिया में सोना सस्ता हो रहा है, तो भारतीय बाजार में इसकी कीमतें क्यों बढ़ रही हैं? इसके पीछे एक नहीं, बल्कि कई बड़े कारण हैं जो घरेलू कीमतों को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहे हैं।

इन कारणों में सरकारी नीतियां, रुपये की चाल और अंतरराष्ट्रीय हालात शामिल हैं। आइए इन वजहों को विस्तार से समझते हैं।

आयात शुल्क में भारी बढ़ोतरी

भारत में सोने की कीमतों में उछाल का सबसे बड़ा कारण आयात शुल्क (Import Duty) में हुई भारी बढ़ोतरी है। सरकार ने हाल ही में सोने पर लगने वाले आयात शुल्क को दोगुना से भी ज्यादा कर दिया है।

यह शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर सीधे 15 फीसदी कर दिया गया। यह नई दर 13 मई 2026 से लागू हो गई, जिसके कारण आयातित सोना ज्वैलर्स के लिए महंगा हो गया और इसका असर सीधे ग्राहकों पर पड़ा।

कमजोर रुपये का असर

सोने की कीमतों को प्रभावित करने वाला दूसरा अहम कारक डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का कारोबार डॉलर में होता है।

जब रुपया कमजोर होता है, तो हमें उतनी ही मात्रा में सोना खरीदने के लिए ज्यादा रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसलिए, भले ही वैश्विक कीमतें कम हों, कमजोर रुपया घरेलू बाजार में कीमतों को बढ़ा देता है।

निवेश और रिटर्न का गणित

कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, सोना अभी भी निवेशकों के लिए एक आकर्षक विकल्प बना हुआ है। WGC की रिपोर्ट बताती है कि 2026 में अब तक सोने ने भारतीय निवेशकों को लगभग 17.6% का शानदार रिटर्न दिया है।

यही वजह है कि इसे आज भी एक सुरक्षित निवेश माना जाता है।

भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव

मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने भी सोने की कीमतों को समर्थन दिया है। जब भी दुनिया में अनिश्चितता का माहौल बनता है, निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं, जिससे इसकी मांग बढ़ जाती है।

भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है, इसलिए वैश्विक मांग का असर यहां भी दिखता है।

पीएम मोदी की अपील और मांग में नरमी

इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिकों से सोने की खरीद को लेकर एक खास अपील की थी।

उन्होंने कहा था कि भारत की विदेशी मुद्रा का एक बड़ा हिस्सा सोने के आयात पर खर्च होता है, इसलिए लोगों को एक साल तक सोना खरीदने से बचना चाहिए।

इस अपील का असर बाजार पर भी देखने को मिला। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सोने की फिजिकल मांग में कुछ नरमी आई है और बाजार में डिस्काउंट पर भी सोना बिका।

हालांकि, केंद्रीय बैंकों, खासकर भारत और चीन द्वारा की जा रही खरीदारी से सोने की कीमतों को लंबे समय तक समर्थन मिलने की उम्मीद है। लेकिन अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो डॉलर मजबूत हो सकता है, जो सोने पर दबाव डाल सकता है।

*Edit with Google AI Studio

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