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राजस्थान

Rajasthan: यमुना जल पाइपलाइन हरियाणा ने दी लिखित सहमति

बलजीत सिंह शेखावत

हरियाणा ने यमुना जल पाइपलाइन के लिए लिखित सहमति भेजी, राजस्थान को मिलेगा 1917 क्यूसेक पानी।

HIGHLIGHTS

  • हरियाणा सरकार ने यमुना जल पाइपलाइन की डीपीआर के लिए लिखित सहमति का पत्र भेज दिया है।
  • इस परियोजना की कुल लागत 33,379.29 करोड़ रुपये है, जिसमें भूमि अवाप्ति भी शामिल है।
  • पाइपलाइन हरियाणा के यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और हिसार जिलों से होकर गुजरेगी।
  • राजस्थान को इस पाइपलाइन के माध्यम से लगभग 1917 क्यूसेक पानी प्राप्त होगा।
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जयपुर | राजस्थान और हरियाणा के बीच यमुना जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध अब समाप्त होता दिख रहा है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की बैठक के बाद हरियाणा ने लिखित सहमति दी है।

यमुना जल पाइपलाइन: राजस्थान के लिए बड़ी सौगात

हरियाणा सरकार द्वारा भेजी गई लिखित सहमति के बाद अब परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) केंद्रीय जल आयोग को भेजी जाएगी। इस परियोजना से राजस्थान के चूरू और आसपास के इलाकों को पानी मिलेगा। इस ऐतिहासिक समझौते के तहत हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के बीच मौखिक सहमति के अगले ही दिन कागजी कार्रवाई पूरी कर ली गई। यह कदम दोनों राज्यों के बीच सहयोगात्मक संघवाद का उदाहरण है।

परियोजना की लागत और मुख्य बिंदु

इस विशाल जल परियोजना की कुल अनुमानित लागत 33,379 करोड़ 29 लाख रुपये तय की गई है। इसमें से लगभग 3,900 करोड़ रुपये केवल भूमि अवाप्ति के लिए खर्च किए जाएंगे। परियोजना के तहत पाइपलाइन हरियाणा के पांच प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगी। इनमें यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और हिसार शामिल हैं। इन जिलों से गुजरते हुए पाइपलाइन राजस्थान की सीमा में प्रवेश करेगी।

हाइब्रिड मोड और तकनीकी विशेषता

यह पाइपलाइन हथिनी कुंड बैराज से शुरू होकर राजगढ़, चूरू तक जाएगी। हथिनी कुंड और राजगढ़ के बीच भूतल स्तर में करीब 110 मीटर का अंतर है, जिससे पानी का प्रवाह सुगम होगा। तकनीकी रूप से इसे 'हाइब्रिड मोड' पर डिजाइन किया गया है। इसका अर्थ है कि सामान्य परिस्थितियों में पानी गुरुत्वाकर्षण के जरिए बहेगा, लेकिन जल स्तर कम होने पर पंपिंग स्टेशनों का उपयोग किया जाएगा।

हरियाणा की विशिष्ट मांगें

हरियाणा ने इस पाइपलाइन के मार्ग में विभिन्न स्थानों से पानी की आपूर्ति की मांग की है। इसमें दानोदा कलां से 10 क्यूसेक और नयागांव के पास सारसौद डिस्ट्रीब्यूट्री से 80 क्यूसेक पानी शामिल है। इसके अलावा, चौधरी माइनर पर हिंदवान से 70 क्यूसेक और कैथल टाउन के पास पेओदा से 43 क्यूसेक पानी की मांग रखी गई है। कुल मिलाकर हरियाणा ने सात से अधिक स्थानों से पानी लेने का प्रस्ताव दिया है। यमुना जल पाइपलाइन परियोजना न केवल राजस्थान की प्यास बुझाएगी, बल्कि दोनों राज्यों के कृषि और आर्थिक विकास में एक नया अध्याय जोड़ेगी।

अगला कदम और कार्यान्वयन

अब केंद्रीय जल आयोग (CWC) इस डीपीआर की बारीकी से समीक्षा करेगा। मंजूरी मिलने के बाद केंद्र सरकार और राज्य सरकारों द्वारा वित्तीय संसाधन जुटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसमें ऋण या केंद्रीय सहायता के माध्यम से धन का प्रबंधन किया जाएगा। भूमि अवाप्ति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण के लिए टेंडर जारी किए जाएंगे और जल्द ही धरातल पर काम शुरू होगा। यह परियोजना राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। पानी की उपलब्धता से क्षेत्र में हरियाली आएगी और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।

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