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क्रिकेट

जफर गोहर ने छोड़ा पाकिस्तान, अब इंग्लैंड के लिए खेलेंगे

बलजीत सिंह शेखावत

पाकिस्तानी स्पिनर जफर गोहर ने पीसीबी पर लगाया भेदभाव का आरोप, अब इंग्लैंड के लिए खेलेंगे क्रिकेट।

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HIGHLIGHTS

  • जफर गोहर ने पीसीबी की चयन नीतियों से निराश होकर पाकिस्तान क्रिकेट छोड़ने का औपचारिक ऐलान कर दिया है।
  • 31 वर्षीय खिलाड़ी अब ब्रिटिश नागरिक बन चुके हैं और इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं।
  • गोहर ने काउंटी क्रिकेट में 50 विकेट और 500 रन बनाने के बावजूद चयन न होने पर गहरा दुख व्यक्त किया।
  • पूर्व कोच मिस्बाह-उल-हक के साथ हुई अपनी बातचीत का हवाला देते हुए उन्होंने बोर्ड के रवैये की आलोचना की।
zafar gohar leaves pakistan to play for england pcb criticism

लाहौर | पाकिस्तान क्रिकेट के गलियारों से एक बड़ी खबर सामने आई है। ऑलराउंडर जफर गोहर ने पीसीबी से नाराज होकर देश छोड़ने का फैसला किया है।

31 वर्षीय जफर गोहर अब इंग्लैंड की ओर से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने बोर्ड पर अनदेखी का आरोप लगाया है।

जफर ने महज 19 साल की उम्र में अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था, जिससे उनकी प्रतिभा का अंदाजा लगाया जा सकता है। लेकिन उन्हें मौके नहीं मिले।

जफर ने साल 2015 में वनडे डेब्यू किया था, लेकिन उन्हें टीम में नियमित जगह नहीं दी गई। 2021 के बाद उन्हें पूरी तरह बाहर कर दिया गया।

पीसीबी की नीतियों की कड़ी आलोचना

जफर गोहर वर्तमान में इंग्लिश काउंटी क्रिकेट में मिडिलसेक्स के लिए खेल रहे हैं। उनके पास अब ब्रिटिश नागरिकता भी है, जो नया रास्ता खोलती है।

गोहर ने कहा कि पाकिस्तान में उन्हें वे अवसर नहीं मिले, जिनके वे हकदार थे। उन्होंने ग्लॉस्टरशायर के लिए 2022 में बेहतरीन प्रदर्शन किया था।

उस सीजन में उन्होंने 50 विकेट झटके और बल्ले से 500 रन बनाए। इसके बावजूद चयनकर्ताओं ने उनके प्रदर्शन को महत्व नहीं दिया।

एक चयनकर्ता ने उनसे कहा कि काउंटी क्रिकेट के प्रदर्शन की पाकिस्तान में कोई अहमियत नहीं है। इस बात ने जफर को काफी आहत किया।

जफर का मानना है कि पीसीबी विदेशी प्रदर्शन को नजरअंदाज करता है। यही कारण है कि उन्होंने अपना भविष्य इंग्लैंड में तलाशने का मन बना लिया।

मिस्बाह-उल-हक और न्यूजीलैंड टेस्ट का सच

जफर ने 2021 के क्राइस्टचर्च टेस्ट को याद करते हुए कोच मिस्बाह-उल-हक के साथ हुई अपनी बातचीत का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि उन्हें कैसे इस्तेमाल किया गया।

"टेस्ट मैच से पहले मिस्बाह-उल-हक मेरे पास आए थे और कहा था कि हमारे पास पर्याप्त ऑलराउंडर नहीं हैं, इसलिए तुम नंबर 8 पर खेलोगे।"

उस मैच में जफर ने बल्ले से 34 और 37 रनों का योगदान दिया था। लेकिन गेंदबाजी में विकेट न मिलने पर उन्हें दोबारा कभी नहीं चुना गया।

बोर्ड की ओर से इसके बाद उनसे किसी भी प्रकार का संपर्क नहीं किया गया। जफर ने महसूस किया कि उनके प्रयासों की बोर्ड में कोई कद्र नहीं है।

इंग्लैंड की राष्ट्रीय टीम पर टिकी नजरें

पिछले सीजन में वह मिडिलसेक्स में शामिल हुए और लगातार अच्छा खेल रहे हैं। उनकी बल्लेबाजी में भी पिछले कुछ समय में काफी सुधार आया है।

हाल ही में नॉर्थम्पटनशायर के खिलाफ उन्होंने 84 रनों की अहम पारी खेली थी। इंग्लैंड के चयनकर्ता अक्सर बॉलिंग ऑलराउंडरों को अपनी टीम में प्राथमिकता देते हैं।

जफर इस बात से अच्छी तरह वाकिफ हैं और उन्होंने कहा कि अगर मौका मिला तो वे तैयार रहेंगे। वे अब पूरी तरह इंग्लैंड के लिए समर्पित हैं।

यह फैसला पाकिस्तान के क्रिकेट टैलेंट के पलायन की समस्या को दर्शाता है। बोर्ड की नीतियां खिलाड़ियों को दूसरे देशों की ओर जाने पर मजबूर कर रही हैं।

निष्कर्ष: पीसीबी के लिए एक सबक

जफर गोहर का यह कदम पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के लिए एक बड़ी चेतावनी है। खिलाड़ियों के साथ होने वाला भेदभाव देश की टीम को कमजोर कर रहा है।

यदि बोर्ड ने अपनी चयन प्रक्रिया में सुधार नहीं किया, तो भविष्य में और भी खिलाड़ी देश छोड़ सकते हैं। जफर अब नए सपनों के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

*Edit with Google AI Studio

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