thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 📰 जालोर 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
राजस्थान

माउंट आबू: 44 साल बाद उसी पद पर पोते की तैनाती, जहां दादा रहे थे DSP

गणपत सिंह मांडोली
+Follow us
thinQ360 को गूगल पर फेवरेट बनाएँ

HIGHLIGHTS

  • माउंट आबू में DSP जितेंद्र सिंह राठौड़ की पोस्टिंग, जहां 44 साल पहले उनके दादा भी इसी पद पर तैनात थे।
  • दादा रघुनाथ सिंह राठौड़ वर्ष 1981-82 में माउंट आबू में DSP रहे थे।
  • जितेंद्र सिंह राठौड़ ने करीब एक माह पहले माउंट आबू DSP का कार्यभार संभाला।
  • 44 साल बाद उसी पद पर पोते की तैनाती से राठौड़ परिवार में पुरानी यादें ताजा हो गईं।
  • माउंट आबू में कानून-व्यवस्था, पर्यटकों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था DSP की प्रमुख जिम्मेदारियां हैं।
  • एक ही पद और शहर पर दो पीढ़ियों की तैनाती राठौड़ परिवार के लिए खास संयोग बन गई।
44 saal baad mount abu dsp jitendra singh rathore dada raghunath singh rathore

माउंट आबू । पर्यटन नगरी माउंट आबू में पुलिस उपाधीक्षक (DSP) जितेंद्र सिंह राठौड़ की पोस्टिंग एक खास पारिवारिक संयोग लेकर आई है। करीब 44 साल पहले उनके दादा रघुनाथ सिंह राठौड़ इसी पद पर माउंट आबू में सेवाएं दे चुके हैं। अब उसी पद और उसी शहर में पोते ने जिम्मेदारी संभाली है।


जोधपुर जिले के गिलाकोर गांव निवासी राठौड़ परिवार के लिए यह महज एक प्रशासनिक नियुक्ति नहीं, बल्कि दो पीढ़ियों को जोड़ने वाला यादगार संयोग बन गया है।


करीब एक माह पहले संभाला कार्यभार
जितेंद्र सिंह राठौड़ ने करीब एक माह पहले माउंट आबू DSP का कार्यभार संभाला। संयोग से उनके दादा दिवंगत रघुनाथ सिंह राठौड़ वर्ष 1981-82 में माउंट आबू में DSP पद पर तैनात रहे थे। करीब 44 वर्ष बाद उसी पद पर पोते की तैनाती ने परिवार से जुड़ी पुरानी यादों को फिर से ताजा कर दिया।


बदला शहर, बदली चुनौतियां… जिम्मेदारी वही
आज माउंट आबू देश-विदेश के पर्यटकों का प्रमुख आकर्षण है। ऐसे में DSP के सामने कानून-व्यवस्था के साथ पर्यटकों की सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और स्थानीय लोगों के साथ पुलिस समन्वय जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। 

चार दशक से अधिक समय में माउंट आबू का स्वरूप और पुलिसिंग की चुनौतियां जरूर बदली हैं, लेकिन आमजन की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी आज भी वही है। दादा ने जहां वर्दी में जिम्मेदारी निभाई, 44 साल बाद उसी जगह पोते ने संभाली कमान—राठौड़ परिवार के लिए यह पदस्थापन एक यादगार संयोग बन गया है।

शेयर करें: