राजस्थान | राजस्थान में हाल ही में संपन्न हुए 309 नगरीय निकाय चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने निर्विरोध बोर्ड बनाने के मामले में एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। प्रदेश की वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के कार्यकाल में बिना किसी मुकाबले के यानी निर्विरोध रूप से 33 निकायों में बोर्ड गठित हुए हैं। यह उपलब्धि पिछली कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल की तुलना में तीन गुना अधिक है।
राजस्थान निकाय चुनाव 2026: बीजेपी ने बनाया 33 निर्विरोध बोर्ड का रिकॉर्ड
राजस्थान के 309 नगरीय निकाय चुनावों में बीजेपी ने 33 निकायों में निर्विरोध बोर्ड गठित कर नया रिकॉर्ड बनाया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में बीजेपी ने पिछली कांग्रेस सरकार के 11 निर्विरोध बोर्डों के आंकड़े को पीछे छोड़ते हुए शानदार जीत दर्ज की है।
HIGHLIGHTS
- बीजेपी ने राजस्थान के 33 नगरीय निकायों में बिना किसी मुकाबले के निर्विरोध बोर्ड बनाकर नया रिकॉर्ड कायम किया है।
- पिछली अशोक गहलोत सरकार के पांच साल के कार्यकाल में केवल 11 निकायों में ही निर्विरोध बोर्ड बन पाए थे।
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह संभाग भरतपुर और डीग जिले की 90 प्रतिशत नगरपालिकाओं में बीजेपी का कब्जा रहा।
- कुल 309 निकायों में चुनाव हुए, जिनमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाएं शामिल हैं।
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बीजेपी का ऐतिहासिक प्रदर्शन और नया रिकॉर्ड
राजस्थान के स्थानीय निकाय चुनावों में बीजेपी ने निर्विरोध बोर्ड बनाने के मामले में पिछली सरकार को काफी पीछे छोड़ दिया है।
भजनलाल सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में 33 निकायों में बिना किसी मुकाबले के बोर्ड बने हैं।
यह आंकड़ा पिछली कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल की तुलना में तीन गुना अधिक है।
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इस जीत को राज्य सरकार के कामकाज पर जनता की मोहर के रूप में देखा जा रहा है।
बीजेपी ने 30 निकायों पर पूरी तरह से एकतरफा कब्जा जमाया है।
कांग्रेस बनाम बीजेपी: आंकड़ों का विश्लेषण
राजस्थान के राजनीतिक इतिहास में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान निर्विरोध बोर्ड बनना हमेशा से सांगठनिक मजबूती का पैमाना माना जाता रहा है।
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के पांच साल के कार्यकाल में कुल 11 निकायों में बिना किसी मुकाबले के बोर्ड बने थे।
इन 11 बोर्डों में से कांग्रेस के पास 6, बीजेपी के पास 3 और निर्दलीयों के पास 2 बोर्ड आए थे।
मौजूदा बीजेपी सरकार में यह आंकड़ा तीन गुना बढ़कर 33 निकायों तक पहुंच गया है।
इन 33 निर्विरोध बोर्डों में बीजेपी ने अकेले 30 निकायों में जीत हासिल की है।
वहीं कांग्रेस को केवल 2 निकायों में निर्विरोध जीत मिली, जबकि 1 पर बीजेपी समर्थित बोर्ड बना।
भरतपुर और डीग में बीजेपी का दबदबा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह संभाग भरतपुर और नवगठित जिले डीग में बीजेपी का प्रदर्शन सबसे शानदार रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, इन दोनों जिलों की लगभग 90 प्रतिशत नगरपालिकाओं में बीजेपी अपना बोर्ड बनाने में सफल रही।
विपक्ष इन क्षेत्रों में अपना खाता खोलने के लिए भी संघर्ष करता नजर आया।
बीजेपी समर्थित पार्षदों ने इन क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ साबित की है।
निकायों की संख्या और चुनावी प्रक्रिया
इस बार प्रशासनिक पुनर्गठन के बाद कुल 309 नगरीय निकायों में एक साथ मतदान कराया गया था।
इसमें 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाएं शामिल थीं।
पिछली कांग्रेस सरकार के समय केवल 196 नगरीय निकायों में चुनाव आयोजित हुए थे।
निकायों की संख्या अधिक होने के बावजूद बीजेपी ने जमीनी स्तर पर अपनी राजनीतिक पकड़ को और अधिक मजबूत किया है।
जीत के पीछे के मुख्य कारण
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ईआरसीपी (ERCP) परियोजना को धरातल पर उतारने का सीधा फायदा बीजेपी को मिला है।
पूर्वी राजस्थान के जिलों जैसे भरतपुर, डीग, धौलपुर और करौली में पेयजल योजनाओं का सकारात्मक असर दिखा।
शहरी विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे के लिए जारी बजट ने भी मतदाताओं को प्रभावित किया।
सड़कों के निर्माण और स्वच्छता अभियानों के लिए जारी किए गए बजट का सकारात्मक असर मतदान के रुख में देखने को मिला।
संगठनात्मक रणनीति और भविष्य की राह
बीजेपी संगठन ने असंतुष्ट कार्यकर्ताओं और स्थानीय दावेदारों को साधने के लिए विशेष रणनीति अपनाई थी।
इसी रणनीति के कारण 30 से अधिक स्थानों पर विपक्षी दल अपने उम्मीदवार तक खड़े नहीं कर सके।
बीजेपी के पन्ना प्रमुख और बूथ स्तर के नेटवर्क की यह एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
अब इन निकायों में नए अध्यक्षों और सभापतियों के शपथ ग्रहण की तैयारियां शुरू हो गई हैं।
बीजेपी कैडर में इस जीत से आगामी पंचायत चुनावों के लिए नया उत्साह देखने को मिल रहा है।
कांग्रेस के लिए इन नतीजों को एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
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