नई दिल्ली | टाटा समूह के स्वामित्व वाली एअर इंडिया से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। एयरलाइन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
एअर इंडिया CEO का इस्तीफा: एअर इंडिया के CEO कैंपबेल विल्सन ने दिया इस्तीफा: अहमदाबाद विमान हादसे की रिपोर्ट के बाद छोड़ेंगे पद; 2026 में 20 हजार करोड़ के घाटे की आशंका
एअर इंडिया के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वे सितंबर में पद छोड़ सकते हैं, जबकि उनका कार्यकाल 2027 तक था। विमानन क्षेत्र में भारी घाटे और अहमदाबाद हादसे की जांच के बीच यह बड़ा बदलाव हो रहा है।
HIGHLIGHTS
- विल्सन का कार्यकाल सितंबर 2027 तक था, लेकिन वे सितंबर 2024 में ही पद छोड़ सकते हैं।
- अहमदाबाद-लंदन फ्लाइट क्रैश की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद नए सीईओ की नियुक्ति होगी।
- वित्त वर्ष 2026 में एअर इंडिया को करीब 20,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान है।
- टाटा समूह ने जनवरी से ही नए सीईओ की तलाश के लिए हाई-लेवल बातचीत शुरू कर दी है।
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विल्सन का अचानक इस्तीफा
न्यूज एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि कैंपबेल विल्सन सितंबर में अपना पद छोड़ सकते हैं। पिछले सप्ताह हुई कंपनी की बोर्ड बैठक में उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है।
विल्सन को साल 2022 में एअर इंडिया की कमान सौंपी गई थी। उनका अनुबंध जुलाई 2027 तक था, लेकिन उन्होंने कार्यकाल पूरा होने से पहले ही पद छोड़ने का फैसला किया है।
टाटा समूह के साथ एअर इंडिया के दोबारा जुड़ने के बाद विल्सन ने ही एयरलाइन के कायाकल्प की जिम्मेदारी संभाली थी। उनके नेतृत्व में कई बड़े बदलावों की नींव रखी गई थी।
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अहमदाबाद विमान हादसे का साया
रिपोर्ट्स के मुताबिक, विल्सन के जाने के बाद नए सीईओ की नियुक्ति में थोड़ा समय लग सकता है। एयरलाइन अहमदाबाद प्लेन क्रैश की फाइनल जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने जुलाई 2025 में हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट दी थी। अब अंतिम रिपोर्ट जून 2026 में आने की संभावना जताई जा रही है।
हादसे के बाद से ही एयरलाइन के प्रबंधन पर काफी दबाव देखा जा रहा था। अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट AI 171 के हादसे में 260 लोगों की जान गई थी।
नए CEO की तलाश तेज
एअर इंडिया ने आधिकारिक तौर पर इस इस्तीफे पर कोई टिप्पणी नहीं की है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि नए नेतृत्व के लिए संभावित उम्मीदवारों से बातचीत शुरू हो चुकी है।
बताया जा रहा है कि कंपनी ने जनवरी में ही नए सीईओ की तलाश शुरू कर दी थी। तब विल्सन ने संकेत दिए थे कि वे अपना वर्तमान अनुबंध पूरा होने के बाद पद छोड़ देंगे।
विमानन क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि अगले हफ्ते होने वाली बोर्ड की बैठक में नए सीईओ के नाम पर चर्चा हो सकती है। एयरलाइन एक अनुभवी नेतृत्व की तलाश में है।
भारी वित्तीय घाटे की आशंका
एअर इंडिया इस समय केवल नेतृत्व के संकट से ही नहीं, बल्कि भारी वित्तीय नुकसान से भी जूझ रही है। वित्त वर्ष 2026 में एयरलाइन को ₹20,000 करोड़ का घाटा हो सकता है।
इस नुकसान के पीछे मुख्य कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव को माना जा रहा है। तनाव की वजह से एयरस्पेस पर कई तरह के प्रतिबंध लगे हुए हैं।
इन प्रतिबंधों के कारण एअर इंडिया की उड़ानों को लंबे रूट लेने पड़ रहे हैं। इससे न केवल समय ज्यादा लग रहा है, बल्कि फ्यूल स्टॉप्स की संख्या भी बढ़ गई है।
ऑपरेटिंग कॉस्ट में भारी इजाफा
लंबे रूट और अतिरिक्त ईंधन की खपत ने एयरलाइन की ऑपरेटिंग कॉस्ट को काफी बढ़ा दिया है। इसका सबसे ज्यादा बुरा असर अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और लॉन्ग-हॉल रूट्स पर पड़ा है।
इसके अलावा, नए विमानों की डिलीवरी में हो रही देरी ने भी एअर इंडिया की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। कंपनी अपनी क्षमता विस्तार की योजना को समय पर लागू नहीं कर पा रही है।
विमानों की कमी और पुराने विमानों के रखरखाव के खर्च ने एयरलाइन के बजट को पूरी तरह से बिगाड़ दिया है। इन चुनौतियों के बीच नया सीईओ चुनना एक बड़ी चुनौती होगी।
कैंपबेल विल्सन का लंबा अनुभव
विल्सन के पास विमानन क्षेत्र में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है। उन्होंने फुल-सर्विस और लो-कॉस्ट दोनों ही तरह की एयरलाइनों में अपनी सेवाएं दी हैं।
एअर इंडिया से पहले वे सिंगापुर एयरलाइंस की सहायक कंपनी 'स्कूट' के सीईओ थे। विल्सन ने अपने करियर की शुरुआत 1996 में एक मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में की थी।
उन्होंने न्यूजीलैंड, कनाडा, हॉन्ग कॉन्ग और जापान जैसे देशों में काम किया है। उनकी विशेषज्ञता मार्केटिंग और सेल्स के साथ-साथ ऑपरेशनल मैनेजमेंट में भी रही है।
इंडिगो में भी हुआ था ऐसा ही बदलाव
एअर इंडिया से पहले इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने भी मार्च में इस्तीफा दिया था। इंडिगो ने उनके जाने के तुरंत बाद विलियम वॉल्श को नया सीईओ नियुक्त किया था।
इंडिगो को भी पिछले साल भारी ऑपरेशनल संकट का सामना करना पड़ा था। सैकड़ों उड़ानें रद्द होने से कंपनी को करोड़ों का नुकसान हुआ था, जिसके बाद नेतृत्व बदला गया।
अब एअर इंडिया भी उसी राह पर है। टाटा समूह को उम्मीद है कि नया नेतृत्व एयरलाइन को इस वित्तीय और ऑपरेशनल संकट से बाहर निकालने में सफल होगा।
भविष्य की चुनौतियां
एअर इंडिया के लिए आने वाला समय काफी चुनौतीपूर्ण होने वाला है। एक तरफ उसे अपनी सार्वजनिक छवि सुधारनी है, तो दूसरी तरफ घाटे को कम करना है।
रीस्ट्रक्चरिंग और विस्तार की योजनाएं अभी भी अधर में लटकी हुई हैं। विमानों की कमी के कारण कई नए रूट्स पर सेवाएं शुरू करने में दिक्कतें आ रही हैं।
अहमदाबाद हादसे का असर अभी भी एयरलाइन के माहौल पर दिख रहा है। सुरक्षा मानकों को लेकर एयरलाइन अब किसी भी तरह की लापरवाही बरतने के मूड में नहीं है।
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