अलवर | राजस्थान के अलवर जिले में ग्राम पंचायत अलावड़ा के नंगली गांव स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे मील वितरण के दौरान एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। सोमवार को स्कूल में बच्चों के लिए एनजीओ की ओर से भेजी गई दाल में एक मरा हुआ चूहा मिलने से हड़कंप मच गया, जिससे बच्चों के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा मंडरा सकता था। जैसे ही रसोइयों ने भोजन वितरण के लिए दाल का बड़ा बर्तन खोला, उनकी नजर अंदर पड़े मरे हुए चूहे पर पड़ी, जिसके बाद तुरंत परोसने का काम रोक दिया गया। इस घटना के कारण स्कूल के करीब 120 से अधिक नौनिहाल दोपहर का भोजन नहीं कर सके और उन्हें खाली पेट ही अपने घरों की ओर लौटना पड़ा। विद्यालय प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत दाल के बर्तन को अलग किया और साक्ष्य के तौर पर घटना के वीडियो और फोटो भी बनाए। ग्रामीणों और अभिभावकों ने इस लापरवाही पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि यदि समय रहते चूहे का पता नहीं चलता, तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
मिड-डे मील में मरा चूहा: अलवर: मिड-डे मील में मिला मरा चूहा, 120 बच्चे भूखे रहे
अलवर के नंगली स्कूल में एनजीओ द्वारा भेजी गई दाल में मरा चूहा मिलने से हड़कंप मच गया।
HIGHLIGHTS
- अलवर के नंगली स्कूल में मिड-डे मील की दाल में मरा चूहा मिला।
- लापरवाही के कारण 120 से अधिक स्कूली बच्चों को भूखा रहना पड़ा।
- ग्रामीणों ने दोषी एनजीओ को ब्लैकलिस्ट करने की मांग की है।
- शिक्षा विभाग ने मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है।
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लापरवाही पर ग्रामीणों का गुस्सा
इस घटना के बाद स्कूल परिसर में अभिभावकों और स्थानीय निवासियों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिन्होंने एनजीओ की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अभिभावकों ने मांग की है कि भोजन आपूर्ति करने वाले दोषी एनजीओ को तत्काल प्रभाव से ब्लैकलिस्ट किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। ग्रामीणों का तर्क है कि बच्चों के स्वास्थ्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और प्रशासन को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्कूल स्तर पर भोजन वितरण से पहले उसकी सघन जांच के लिए एक अनिवार्य व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए। हालांकि, जब इस संबंध में प्रधानाध्यापक कुंदन लाल मीणा से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, जिससे ग्रामीणों की नाराजगी और बढ़ गई।
प्रशासनिक जांच और सख्त निर्देश
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और संबंधित एनजीओ के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है। ब्लॉक शिक्षा अधिकारी विश्राम गोस्वामी ने स्पष्ट किया है कि रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद एनजीओ के खिलाफ अनुबंध निरस्त करने जैसी आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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"मामले में चूक कहां हुई इसकी तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रधानाध्यापक से मांगी गई है। जांच के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।" - सतपाल सिंह, पीईओ
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने हाल ही में मिड-डे मील योजना के तहत दूध की गुणवत्ता को लेकर भी जीरो टॉलरेंस नीति लागू की है। अब किसी भी स्कूल में घटिया गुणवत्ता या मिलावटी खाद्य सामग्री मिलने पर सीधे एफआईआर दर्ज करने और सप्लायर को ब्लैकलिस्ट करने का प्रावधान है। आयुक्तालय ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि हर खेप की मात्रा, गुणवत्ता और पैकिंग की मौके पर जांच करना अब विद्यालय प्रशासन के लिए अनिवार्य होगा।
बच्चों के स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा
मिड-डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पोषण प्रदान करना है, लेकिन ऐसी घटनाएं योजना की विश्वसनीयता और स्वच्छता मानकों पर बड़े सवाल खड़े करती हैं। अलवर की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जमीनी स्तर पर निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता है। बच्चों के अभिभावकों ने चेतावनी दी है कि यदि एनजीओ के खिलाफ सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल, स्कूल में भोजन वितरण की व्यवस्था को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और प्रशासन जल्द से जल्द वैकल्पिक समाधान खोजने में जुटा हुआ है। अलवर की यह घटना सरकारी स्कूलों में भोजन की स्वच्छता के प्रति बरती जा रही घोर लापरवाही का एक जीता-जागता उदाहरण है। प्रशासन की त्वरित जांच और सख्त दंडात्मक कार्रवाई ही भविष्य में मासूम बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।
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