अलवर में टाइगर रिजर्व पर महामंथन: अलवर में 58 टाइगर रिजर्व के निदेशकों का महामंथन: बाघों के संरक्षण और सुरक्षा पर बनी नई रणनीति

अलवर में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में देश के 58 टाइगर रिजर्व के विशेषज्ञों ने बाघों की सुरक्षा, ईको-टूरिज्म और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने पर गहन चर्चा की।

अलवर | राजस्थान का अलवर जिला इन दिनों देश के वन्यजीव विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के लिए चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है। शहर के होटल प्राइड प्रीमियर में आयोजित दो-दिवसीय नेशनल कॉन्फ्रेंस में भारत के सभी 58 टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर्स और चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन्स एक साथ जुटे हैं। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत के राष्ट्रीय पशु, बाघ को और अधिक सुरक्षित बनाना और उनके संरक्षण के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करना है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में टाइगर रिजर्व की बढ़ती संख्या हमारी पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली का प्रमाण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बाघ केवल एक जानवर नहीं हैं, बल्कि वे हमारे जंगलों, जल स्रोतों और जैव विविधता की रीढ़ हैं। यदि बाघ सुरक्षित है, तो हमारा पूरा इकोसिस्टम सुरक्षित रहेगा।

इस बैठक में चार प्रमुख चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने रिजर्व क्षेत्रों के बाहर बढ़ते मानव-बाघ संघर्ष को रोकने, निगरानी तंत्र को आधुनिक तकनीक से लैस करने और संरक्षण कार्यों में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर सहमति जताई। साथ ही, पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और मुआवजे की प्रक्रिया को सरल व तेज बनाने पर भी जोर दिया गया।

दो दिनों तक चलने वाले इस मंथन से निकलने वाला ब्लूप्रिंट भविष्य की टाइगर कंजर्वेशन पॉलिसी का आधार बनेगा। इसमें फील्ड स्टाफ को और अधिक सशक्त बनाने और उत्तरदायी पर्यटन को प्रोत्साहित करने जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं। इस सम्मेलन से उम्मीद है कि आने वाले समय में बाघों का कुनबा और अधिक सुरक्षित माहौल में बढ़ सकेगा।