मनोहर भादू सुसाइड केस: सरकार से समझौते के बाद धरना समाप्त: जयपुर: व्याख्याता मनोहर भादू सुसाइड मामले में प्रशासन और परिजनों के बीच बनी सहमति, धरना समाप्त
जयपुर में व्याख्याता मनोहर भादू सुसाइड मामले में प्रशासन द्वारा एसओजी अधिकारियों पर एफआईआर और नौकरी की मांग मानने के बाद परिजनों ने धरना खत्म कर दिया है।
JAIPUR | राजस्थान की राजधानी जयपुर में निलंबित व्याख्याता मनोहर लाल भादू के सुसाइड मामले में चल रहा गतिरोध शुक्रवार को समाप्त हो गया। प्रशासन और मृतक के परिजनों के बीच मांगों पर सहमति बनने के बाद परिजनों ने धरना खत्म करने का निर्णय लिया। इस मामले में पूर्व मंत्री सुखराम बिश्नोई भी धरने में शामिल हुए थे, जिसके बाद सरकार ने परिजनों की प्रमुख मांगों को स्वीकार कर लिया है।
SOG अधिकारियों पर दर्ज होगी प्राथमिकी
मृतक मनोहर भादू ने अपने 4 पन्नों के सुसाइड नोट में विशेष अभियान समूह के दो अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए थे। परिजनों की मांग पर सरकार अब इन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने पर सहमत हुई है। इसके साथ ही, प्रशासन ने परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने और मृतक के सभी सेवा संबंधी लाभ प्रदान करने का आश्वासन दिया है। पुलिस उपाधीक्षक रामकिशन विश्नोई ने परिवार से लंबी बातचीत कर धरना समाप्त करवाया।
महेश नगर थाना क्षेत्र का मामला
बता दें कि 35 वर्षीय व्याख्याता मनोहर लाल भादू ने महेश नगर थाना क्षेत्र में ट्रेन के सामने कूदकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली थी। घटना के बाद परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया था और सवाई मानसिंह अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर धरना शुरू कर दिया था। सरकार और प्रशासन की सहमति के बाद अब शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है और परिजनों ने शव लेने पर रजामंदी दे दी है।
डमी प्रकरण और प्रताड़ना के आरोप
मनोहर भादू को साल 2021 में एक परीक्षा में डमी कैंडिडेट बैठाने के मामले में आरोपी बनाया गया था, जिसके बाद उन्हें विभाग द्वारा निलंबित कर दिया गया था। सुसाइड नोट में भादू ने आरोप लगाया था कि एसओजी के अधिकारी उन्हें झूठे मामलों में फंसाने की धमकी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। इसी प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया। अब निष्पक्ष जांच के बाद ही इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ पाएगी।