चित्तौड़गढ़ : पुलिस का ऑपरेशन विष हरण: ड्रोन से निगरानी और पहाड़ियों में छिपी हाईटेक ड्रग फैक्ट्री का ऐसे हुआ अंत

चित्तौड़गढ़ पुलिस ने ऑपरेशन विष हरण के तहत एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गंगरार क्षेत्र में चल रही एक हाईटेक ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है.

चित्तौड़गढ़ | चित्तौड़गढ़ पुलिस ने नशे के सौदागरों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई को अंजाम दिया है. इस पूरे अभियान को पुलिस ने ऑपरेशन विष हरण का नाम दिया है जो अब सफल साबित हो रहा है.

मामूली गिरफ्तारी से खुला बड़ा राज

इस पूरे मामले की शुरुआत चित्तौड़गढ़ के कोतवाली थाने से हुई थी. यहां थानाधिकारी तुलसीराम प्रजापत ने गश्त के दौरान दो संदिग्ध युवकों को पकड़ा था.

इन युवकों के नाम सत्तू माली और जीवन वैष्णव बताए जा रहे हैं. तलाशी के दौरान उनके पास से महज 8 ग्राम एमडी बरामद की गई थी.

आमतौर पर इतनी कम मात्रा मिलने पर पुलिस इसे छोटी घटना मानकर छोड़ देती है. लेकिन एसपी मनीष त्रिपाठी ने इस मामले की गहराई तक जाने का फैसला किया.

डिजिटल सुराग और मोबाइल का सच

पुलिस ने गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन को बारीकी से खंगाला. इसमें कई संदिग्ध नंबर और चैट्स पुलिस के हाथ लगे.

इन मोबाइल रिकॉर्ड्स के आधार पर पुलिस की जांच गंगरार के एक छोटे से गांव तक पहुंच गई. इस गांव का नाम जीवा नायकों का खेड़ा बताया जा रहा है.

पुलिस को सूचना मिली कि इस गांव के पास पहाड़ियों के बीच कुछ अवैध गतिविधियां चल रही हैं. यहां जगदीश बंजारा के मकान में ड्रग्स बनाने का काम हो रहा था.

ड्रोन से पुलिस की जासूसी

ड्रग माफियाओं ने अपनी सुरक्षा के लिए बेहद आधुनिक तरीके अपना रखे थे. उन्होंने पहाड़ियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का सहारा लिया था.

जैसे ही कोई अनजान व्यक्ति या वाहन उस इलाके में आता ड्रोन उसे देख लेता था. यह इलेक्ट्रॉनिक जासूस माफियाओं को तुरंत सतर्क कर देता था.

इस चुनौती से निपटने के लिए पुलिस ने एक विशेष रणनीति तैयार की. पुलिस ने तकनीक का जवाब तकनीक और भारी बल से देने की योजना बनाई.

100 जवानों का बड़ा हमला

इस ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए 8 थानों की पुलिस फोर्स को बुलाया गया. कुल 100 जवानों ने इस रेड में अपना योगदान दिया.

पूरी कार्रवाई का नेतृत्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सरिता सिंह और सीओ गंगरार शिवन्या सिंह कर रही थीं. पुलिस ने आधी रात को पहाड़ियों की घेराबंदी शुरू की.

पुलिस की योजना इतनी सटीक थी कि अपराधियों को संभलने का मौका नहीं मिला. हालांकि घने अंधेरे और भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर कुछ मुख्य आरोपी भाग निकले.

लैब जैसा आधुनिक सेटअप

जब पुलिस टीम जगदीश बंजारा के घर के अंदर दाखिल हुई तो नजारा हैरान करने वाला था. वहां एक पूरी प्रयोगशाला स्थापित की गई थी.

कमरों में चारों तरफ एसिड और रसायनों के डिब्बे रखे हुए थे. एसिटिक एसिड और सोडियम कार्बोनेट जैसी चीजें वहां भारी मात्रा में मिलीं.

पुलिस ने वहां से मास्क और रेस्पिरेटर सेट भी बरामद किए हैं. इनका उपयोग नशीले पदार्थों को बनाते समय जहरीली गैसों से बचने के लिए किया जाता था.

भारी नकदी और डिजिटल साक्ष्य

पुलिस को मौके से 14 लाख 16 हजार रुपये से ज्यादा की नकदी बरामद हुई है. यह पैसा ड्रग्स की बिक्री से कमाया गया माना जा रहा है.

इसके साथ ही वहां से 33 मोबाइल फोन और 4 लैपटॉप भी जब्त किए गए हैं. इन उपकरणों में तस्करी के पूरे नेटवर्क का कच्चा चिट्ठा छिपा हुआ है.

पुलिस अब इन लैपटॉप और मोबाइल के डेटा को रिकवर करने में जुटी है. इससे यह पता चलेगा कि यह जहर किन शहरों में सप्लाई किया जा रहा था.

लग्जरी वाहन और भविष्य की जांच

मौके से एक लग्जरी क्रेटा कार और एक तेज रफ्तार स्पोर्ट्स बाइक भी मिली है. इन वाहनों का उपयोग माल को तेजी से पहुंचाने के लिए किया जाता था.

एसपी मनीष त्रिपाठी ने मीडिया को बताया कि यह केवल एक ट्रेलर है. पुलिस अब उन बड़े चेहरों की तलाश कर रही है जो इस रैकेट के पीछे हैं.

जगदीश बंजारा, अशोक और राहुल बंजारा अंधेरे का लाभ उठाकर फरार होने में सफल रहे. पुलिस उनकी धरपकड़ के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है.

पुलिस टीम ने बताया कि ड्रग लैब में तापमान नियंत्रित करने के भी इंतजाम थे. यह दर्शाता है कि यहां बहुत ही पेशेवर तरीके से काम किया जा रहा था.

जब्त किए गए रसायनों की जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला की मदद ली जा रही है. इससे ड्रग्स की शुद्धता और उसकी घातकता का पता लगाया जा सकेगा.

चित्तौड़गढ़ पुलिस का यह अभियान आने वाले दिनों में और तेज होगा. नशे के खिलाफ इस युद्ध में पुलिस किसी भी दोषी को नहीं बख्शेगी.