पाली में अवैध पाइपलाइन पर कार्रवाई: पाली में कलेक्टर की सख्ती के बाद एक्शन: विकास नगर में अवैध पाइपलाइन उखाड़ी और फैक्ट्री की कंसेंट निरस्त
पाली में जिला कलेक्टर की फटकार के बाद प्रदूषण नियंत्रण मंडल और नगर निगम ने विकास नगर में अवैध पाइपलाइन को हटाया और औद्योगिक क्षेत्रों में नालों पर रोक लगाई।
पाली | राजस्थान के पाली जिले में औद्योगिक प्रदूषण की समस्या एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। जिला कलेक्टर एलएन मंत्री के कड़े रुख और फटकार के बाद प्रशासन पूरी तरह से हरकत में आ गया है। पाली शहर के विकास नगर और विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण मंडल और नगर निगम की संयुक्त टीमों ने गुरुवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। इस कार्रवाई के दौरान जमीन के भीतर बिछाई गई अवैध पाइपलाइनों को जेसीबी की मदद से उखाड़ दिया गया। प्रशासन की इस सख्ती से उन फैक्ट्री मालिकों में हड़कंप मच गया है जो चोरी-छिपे फैक्ट्रियों का जहरीला और रंगीन पानी नालों में बहा रहे थे।
कलेक्टर के औचक निरीक्षण से शुरू हुई कार्रवाई
पाली के औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण की स्थिति का जायजा लेने के लिए जिला कलेक्टर एलएन मंत्री ने बुधवार को पूनायता औद्योगिक क्षेत्र का दौरा किया था। इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने देखा कि ट्रीटमेंट प्लांट के पास से गुजर रहे नाले में गहरे रंग का पानी बह रहा है। कलेक्टर ने मौके पर ही अधिकारियों को फटकार लगाई और नाले के पानी का टीडीएस चेक करने के निर्देश दिए। पानी की गुणवत्ता बेहद खराब पाए जाने पर उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण मंडल और नगर निगम के अधिकारियों को तुरंत उन स्रोतों का पता लगाने को कहा जहां से यह अवैध पानी आ रहा था।
विकास नगर में अवैध होदी और पाइपलाइन का भंडाफोड़
कलेक्टर के निर्देश मिलते ही प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सहायक अभियंता विकास दुलारिया और नगर निगम की टीम सक्रिय हुई। टीम ने विकास नगर क्षेत्र में सघन तलाशी अभियान चलाया। जांच के दौरान एक मकान के पास बनी होदी और उससे जुड़ी एक अवैध पाइपलाइन का पता चला। यह पाइपलाइन जमीन के नीचे इस तरह बिछाई गई थी कि किसी को शक न हो। इस पाइप के जरिए फैक्ट्रियों का रंगीन पानी सीधे मुख्य नाले में डाला जा रहा था। टीम ने तुरंत जेसीबी मशीन बुलवाकर खुदाई करवाई और उस पूरी पाइपलाइन को उखाड़ दिया। यह अवैध निर्माण रावताराम नामक व्यक्ति के घर के पास पाया गया था।
औद्योगिक क्षेत्रों में नालों की तालाबंदी
प्रदूषण नियंत्रण मंडल के कनिष्ठ अभियंता लोकेश कुमार के नेतृत्व में एक अन्य टीम ने इंडस्ट्रीयल एरिया फेज एक और दो में कार्रवाई की। यहां टीम ने पाया कि कई फैक्ट्रियों के बाहर बने रीको के बरसाती नालों का दुरुपयोग किया जा रहा था। टीम ने करीब सात से आठ ऐसी फैक्ट्रियों की पहचान की जो अपने कचरे और रंगीन पानी को इन नालों में बहा रही थीं। इन नालों को ईंट और सीमेंट की मदद से बंद करने का काम शुरू किया गया है ताकि भविष्य में कोई भी फैक्ट्री अपना पानी इनमें न छोड़ सके। अधिकारियों का कहना है कि अगले तीन से चार दिनों के भीतर सभी संदिग्ध नालों को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया जाएगा।
गणपति डाइंग पर गिरी गाज
प्रशासन की जांच का दायरा पूनायता औद्योगिक क्षेत्र तक भी पहुंचा। यहां स्थित गणपति डाइंग नामक फैक्ट्री में जब टीम ने जांच की तो वहां कई तरह की अवैध गतिविधियां और नियमों का उल्लंघन पाया गया। प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी अमित सोनी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फैक्ट्री की कंसेंट यानी संचालन की अनुमति को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया। इसके साथ ही डिस्कॉम विभाग को पत्र लिखकर फैक्ट्री का बिजली कनेक्शन काटने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। यह कार्रवाई उन अन्य उद्यमियों के लिए एक सख्त संदेश है जो पर्यावरण नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।
दैनिक भास्कर के खुलासे का बड़ा असर
इस पूरे मामले में दैनिक भास्कर डिजिटल की रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। दस दिसंबर को भास्कर ने एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए खुलासा किया था कि किस तरह रात के अंधेरे में बिना नंबर वाले टैंकरों से फैक्ट्रियों का जहरीला पानी सीवरेज की होदी और नालों में डाला जा रहा है। रिपोर्ट में उस जगह की भी पहचान की गई थी जहां से पाइपलाइन बिछाई गई थी। हालांकि उस समय आरटीओ और प्रदूषण मंडल ने इस पर ध्यान नहीं दिया था लेकिन कलेक्टर की नाराजगी के बाद अब उसी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।
बांडी नदी को बचाने की जद्दोजहद
पाली की बांडी नदी लंबे समय से औद्योगिक प्रदूषण की मार झेल रही है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सख्त आदेशों के बावजूद कुछ फैक्ट्री मालिक और टैंकर माफिया चोरी-छिपे प्रदूषण फैलाने से बाज नहीं आ रहे हैं। इस ताजा कार्रवाई से बांडी नदी तक पहुंचने वाले जहरीले पानी की मात्रा में कमी आने की उम्मीद है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल पाइपलाइन उखाड़ने से काम नहीं चलेगा बल्कि इस अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई और भारी जुर्माना भी लगाया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लग सके।
प्रशासन की भविष्य की योजना
नगर निगम और प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान अभी थमेगा नहीं। आने वाले दिनों में जिले के अन्य औद्योगिक क्षेत्रों जैसे मंडिया रोड और हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में भी सघन जांच की जाएगी। प्रशासन अब उन टैंकरों पर भी नजर रख रहा है जो शहर के बाहर से पानी लाकर अवैध रूप से डंप करते हैं। जिला कलेक्टर ने साफ कर दिया है कि पर्यावरण के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति या संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा। इस कार्रवाई से स्थानीय निवासियों ने राहत की सांस ली है लेकिन वे प्रशासन से निरंतर निगरानी की मांग कर रहे हैं।