Railway: रेलवे पार्सल लोडिंग नियम हुए आसान: टर्नओवर शर्त खत्म, फीस आधी
भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने पार्सल लोडिंग से जुड़े नियमों को आसान कर दिया है, जिसमें 50 लाख टर्नओवर (Turnover) की शर्त खत्म कर दी गई है और एग्रीगेटर (Aggregator) फीस आधी कर दी गई है। इससे ट्रांसपोर्ट (Transport) और बिजनेस (Business) सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।
जयपुर: भारतीय रेलवे (Indian Railways) ने पार्सल लोडिंग से जुड़े नियमों को आसान कर दिया है, जिसमें 50 लाख टर्नओवर (Turnover) की शर्त खत्म कर दी गई है और एग्रीगेटर (Aggregator) फीस आधी कर दी गई है। इससे ट्रांसपोर्ट (Transport) और बिजनेस (Business) सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।
रेलवे का लक्ष्य व्यापारियों, किसानों और छोटे लॉजिस्टिक्स कारोबार को अपने विशाल पार्सल नेटवर्क से जोड़ना है। ये बदलाव कम पूंजी वाले व्यापारियों को भी बिना अधिक औपचारिकताओं के रेलवे सेवाओं का उपयोग करने में मदद करेंगे।
छोटे व्यापारियों और किसानों को मिलेगा लाभ
पहले कुछ शर्तों के कारण छोटे व्यापारी 'एग्रीगेटर' के रूप में पंजीकरण नहीं करा पाते थे। अब यह प्रक्रिया काफी सरल हो गई है, जिससे अधिक से अधिक लोग जुड़ रहे हैं।
हाल ही में जम्मू-कश्मीर तक रेल कनेक्टिविटी शुरू होने के बाद वहां पार्सल कारोबार में तेजी आई है। रेलवे ने विशेष रूप से छोटे किसानों और कृषि उत्पादों से जुड़े व्यापारियों को ध्यान में रखते हुए नियमों में ढील दी है।
इसका परिणाम यह है कि जम्मू डिवीजन में ही 20 से अधिक एग्रीगेटर पंजीकृत हो चुके हैं। यह दर्शाता है कि नए नियमों का सीधा लाभ मिल रहा है।
13 सितंबर से जम्मू-कश्मीर के बडगाम से दिल्ली के आदर्श नगर तक पार्सल कार्गो एक्सप्रेस सेवा शुरू की गई। इस सेवा ने क्षेत्र में व्यापार को नई गति दी है।
बडगाम से दिल्ली तक 224 पार्सल वैन और एक एसएलआर के माध्यम से 5,380 टन माल भेजा गया है। वहीं वापसी में दिल्ली से बडगाम 134 पार्सल वैन और 17 एसएलआर के जरिए 4,055 टन माल पहुंचाया गया।
ये आंकड़े स्पष्ट करते हैं कि नए क्षेत्रों में भी रेलवे की पार्सल सेवा को तेजी से अपनाया जा रहा है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
प्रमुख बदलाव जो लाएगी क्रांति
50 लाख टर्नओवर की शर्त समाप्त
उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शशि किरण ने बताया कि लॉजिस्टिक्स या ट्रांसपोर्ट बिजनेस के लिए 50 लाख रुपए के नेट टर्नओवर की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। यह छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों के लिए बड़ी राहत है।
एग्रीगेटर बनने की फीस भी पहले 20 हजार रुपए प्लस जीएसटी थी, जिसे घटाकर 10 हजार रुपए प्लस जीएसटी कर दिया गया है। इससे पंजीकरण प्रक्रिया और भी सुलभ हो गई है।
पार्सल कार्गो एक्सप्रेस लीज पॉलिसी में सरलता
इसके अलावा, पार्सल कार्गो एक्सप्रेस ट्रेन (PCET) की लीज पॉलिसी को भी ज्यादा आसान बनाया गया है। PCET टेंडर में भाग लेने के लिए 10 करोड़ रुपए के नेट टर्नओवर की शर्त भी हटा दी गई है।
यह बदलाव बड़े ट्रांसपोर्टरों के लिए भी लीज प्रक्रिया को सरल बनाएगा। इससे रेलवे के साथ व्यापार करना और अधिक आकर्षक हो जाएगा।
ई-नीलामी और लीज प्रक्रिया में राहत
शशि किरण ने बताया कि पार्सल वैन और एसएलआर की ई-नीलामी में भी टर्नओवर से जुड़ी शर्तें हटा दी गई हैं। इन बदलावों के बाद एग्रीगेटर की संख्या 24 से बढ़कर 102 तक पहुंच गई है।
इससे रेलवे के पार्सल स्पेस का बेहतर उपयोग हो पा रहा है, जो राजस्व वृद्धि में सहायक होगा। अब एसएलआर, पार्सल वैन या पूरे कंपार्टमेंट को 10 दिन से लेकर 90 दिन तक के लिए लीज पर लिया जा सकता है।
यह छोटे और लंबे समय, दोनों तरह की जरूरतों के हिसाब से विकल्प प्रदान करता है। इससे व्यापारियों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार लचीलापन मिलता है।
खाली दिशा में माल भेजना हुआ सस्ता
रेलवे ने उन रूट्स पर भी राहत दी है, जहां आमतौर पर पार्सल खाली लौटता था। अब ऐसी दिशा में सस्ते किराए पर माल लोड करने की सुविधा दी जा रही है।
इससे व्यापारियों की लागत कम होगी और रेलवे के संसाधनों का पूरा इस्तेमाल हो सकेगा। यह एक जीत-जीत की स्थिति है।
भविष्य की योजनाएं: CONCOR और डोर-टू-डोर सेवा
CONCOR (कंटेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) को भी एग्रीगेटर के रूप में पंजीकृत किया गया है। यह रेलवे की लॉजिस्टिक्स क्षमताओं को और मजबूत करेगा।
मुंबई से कोलकाता रूट पर फर्स्ट माइल-लास्ट माइल (FMLM) सेवा शुरू कर दी गई है। इसे आगे और शहरों तक बढ़ाया जाएगा, जिससे अंतिम छोर तक डिलीवरी सुनिश्चित होगी।
हैदराबाद में भी FMLM के साथ पार्सल बुकिंग की अनुमति दी गई है। यहां जल्द ही डोर-टू-डोर सेवा शुरू करने की तैयारी है।
इसकी सफलता के आधार पर इसे दूसरे जोन में भी लागू किया जाएगा। यह ग्राहकों के लिए सुविधा बढ़ाएगा।
ऑनलाइन बुकिंग और आधुनिक सुविधाएं
रेलवे पार्सल सेवाओं को और मजबूत करने के लिए आगे भी कई योजनाओं पर काम कर रहा है। इसमें ट्रांसशिपमेंट की सुविधा प्रमुख है।
ऑनलाइन बुकिंग के लिए मोबाइल ऐप जैसी सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है। यह प्रक्रिया को डिजिटल और आसान बनाएगा।
डोर-टू-डोर सेवा के लिए ज्यादा साझेदारियां की जाएंगी। डबल डेकर कोच जिनके नीचे पार्सल स्पेस होगा, भी योजना में शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली पार्सल ईएमयू ट्रेनें भी शुरू की जाएंगी। ये ट्रेनें तेजी से माल परिवहन सुनिश्चित करेंगी।
रेलवे के इन बदलावों से पार्सल परिवहन अब ज्यादा आसान, सस्ता और व्यापारी-अनुकूल बनाया जा रहा है। इससे छोटे और मध्यम व्यापारी, किसान और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को नई गति मिलने की उम्मीद है।