माउंट आबू |
AI मानव का विकल्प नहीं: मेघवाल: AI चुनौती है, पर इंसान का रिप्लेसमेंट नहीं: अर्जुन राम मेघवाल
माउंट आबू में विधि एवं न्याय विभाग के चिंतन शिविर में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि एआई एक चुनौती है, लेकिन यह इंसानों की जगह नहीं ले सकता।
HIGHLIGHTS
- माउंट आबू में विधि एवं न्याय विभाग के दो दिवसीय चिंतन शिविर का समापन हुआ।
- केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा कि एआई एक चुनौती है, पर ह्यूमन बीइंग का रिप्लेसमेंट नहीं कर सकेगा।
- विकसित भारत-2047 को लेकर मंत्रालय ने अपना विजन तैयार किया।
- शिविर में देश में मुकदमों को कम करने के तरीकों पर भी चिंतन किया गया।
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ब्रह्माकुमारीज़ के ज्ञान सरोवर, माउंट आबू में भारत सरकार के कानून एवं विधि न्याय मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय रिफॉर्म्स उत्सव एवं चिंतन शिविर का रविवार को समापन हो गया।
इस शिविर में विधि एवं न्याय विभाग, केंद्रीय मंत्रालय, नई दिल्ली से आए अधिकारियों ने गहन चिंतन और मंथन किया।
दो दिनों तक चले इस विचार-विमर्श का मुख्य उद्देश्य 'विकसित भारत-2047' के लिए मंत्रालय का विजन तैयार करना था।
एआई चुनौती, पर इंसान का विकल्प नहीं: मेघवाल
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शिविर के समापन समारोह में केंद्रीय कानून एवं विधि न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने अपने विचार रखे।
उन्होंने कहा, "एआई एक चुनौती जरूर है, लेकिन ह्यूमन बीइंग का रिप्लेसमेंट कोई नहीं कर सकेगा। मानव मस्तिष्क का दुनिया में दूसरा कोई विकल्प नहीं है।"
मंत्री मेघवाल ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में पैदा होना अपने आप में एक सौभाग्य की बात है।
उन्होंने कहा कि भारत में सुधारों के लिए अमृत काल का यह समय सबसे उपयुक्त और अनमोल है।
विकसित भारत का सपना होगा साकार
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमें भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में लगातार आगे बढ़ना है।
उन्होंने कहा, "देश का काम आगे बढ़ना चाहिए, रुकना नहीं चाहिए। समस्या का समाधान होना चाहिए, तभी विकसित भारत का सपना साकार होगा।"
कानूनी मसौदे और मुकदमेबाजी पर चिंतन
मंत्री मेघवाल ने मंत्रालय के कामकाज पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया, "हमारे मंत्रालय में लीगल अफेयर्स डिपार्टमेंट और लेजिस्लेटिव डिपार्टमेंट हैं।"
उन्होंने आगे कहा, "हम देखते हैं कि यदि ड्रॉफ्टिंग में छोटे-छोटे शब्दों को ध्यान में नहीं रखते हैं तो लिटिगेशन (मुकदमेबाजी) बढ़ते हैं। कौन सा शब्द कहां लगना चाहिए, वह बहुत महत्वपूर्ण है।"
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि शिविर में इस बात पर भी चिंतन किया गया कि देश में मौजूदा मुकदमों की संख्या को कैसे कम किया जा सकता है।
समाधान के लिए सुझावों का स्वागत
केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने उपस्थित लोगों से सकारात्मक समाधान के लिए सुझाव देने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, "यदि आप लोगों के पास किसी समस्या का पॉजिटिव समाधान है तो निसंकोच सुझाव दे सकते हैं।"
उन्होंने बताया कि शिविर में पुराने कानूनों में आवश्यक बदलावों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
सोच में बदलाव की आवश्यकता
मेघवाल ने सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा, "हम आज समाज में सात्विक प्रवृत्ति के लोगों को प्रमोट नहीं करते हैं। तामसिक प्रवृत्ति के लोगों को सात्विक प्रवृत्ति के लोगों के साथ रखेंगे तो उनमें भी सकारात्मक बदलाव आएगा।"
उन्होंने मन की मजबूती पर जोर देते हुए कहा कि हर किसी के मन में नकारात्मक विचार आते हैं, लेकिन यदि मन मजबूत हो तो वे विचार निकल जाते हैं।
ब्रह्माकुमारीज़ की सराहना
केंद्रीय मंत्री ने ब्रह्माकुमारीज़ संस्थान की सराहना करते हुए कहा कि यहां की सकारात्मक ऊर्जा महसूस होती है।
उन्होंने कहा, "यहां हजारों भाई-बहनों के पॉजीटिव वाइब्रेशन, पॉजीटिव थॉट्स का ही कमाल है कि जो इस दायरे में आता है उसे यहां की सकारात्मक ऊर्जा और शांति महसूस होती है।"
उन्होंने कबीर दास के दोहे 'बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय, जो दिल खोजा आपना, मुझसा बुरा न कोय' का उल्लेख करते हुए हमेशा अच्छे विचार रखने की सलाह दी।
अन्य वक्ताओं के विचार
इस अवसर पर संस्थान के अतिरिक्त महासचिव डॉ. बीके मृत्युंजय भाई ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य 'स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन' है।
विधि सचिव डॉ. राजीव मणि त्रिपाठी ने कहा कि शिविर से निकले अच्छे विचारों को लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
विधि एवं न्याय विभाग के एडिशनल सेक्रेट्री डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि यहां आकर सभी ने बहुत कुछ सीखा है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. बीके मृत्युंजय भाई ने केंद्रीय मंत्री और सभी अधिकारियों का मोमेंटो और शॉल पहनाकर सम्मान किया।
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