ईस्ट सियांग |
अरुणाचल में 'मुस्कान 2.0': अरुणाचल पुलिस की 'मुस्कान 2.0', बच्चों की सुरक्षा का अभियान
अरुणाचल प्रदेश में बच्चों की सुरक्षा के लिए 'मुस्कान 2.0' अभियान शुरू हुआ है। पहले चरण में 104 स्कूलों के 16,897 छात्रों तक पहुंचने के बाद अब माता-पिता और शिक्षकों को भी जोड़ा जाएगा।
HIGHLIGHTS
- अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट सियांग जिले में 'मुस्कान 2.0' अभियान शुरू।
- पहले चरण में 104 स्कूलों के 16,897 छात्रों को जागरूक किया गया।
- अब बच्चों के साथ-साथ अभिभावकों और शिक्षकों को भी अभियान से जोड़ा जाएगा।
- अभियान का उद्देश्य बच्चों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल बनाना है।
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अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट सियांग जिले में बच्चों की सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से 'मुस्कान 2.0' अभियान की शुरुआत की गई है। यह अभियान पहले चरण की अपार सफलता के बाद लॉन्च किया गया है, जिसका लक्ष्य अब बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों और शिक्षकों को भी इस महत्वपूर्ण पहल से जोड़ना है।
क्या है 'मुस्कान 2.0' अभियान?
यह अरुणाचल प्रदेश पुलिस द्वारा बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए चलाया जा रहा एक व्यापक जागरूकता कार्यक्रम है। इसका दूसरा चरण, 'मुस्कान 2.0', अब समुदाय के अन्य महत्वपूर्ण स्तंभों, यानी माता-पिता और शिक्षकों को भी शामिल करेगा ताकि एक समग्र सुरक्षा कवच तैयार किया जा सके।
पहले चरण की शानदार सफलता
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अरुणाचल प्रदेश के गृह मंत्री मामा नातुंग ने इस पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि अभियान का पहला चरण यह साबित करता है कि जब पुलिस, स्कूल और समाज मिलकर काम करते हैं तो उत्कृष्ट परिणाम प्राप्त होते हैं।
ईस्ट सियांग पुलिस के नेतृत्व में पहले चरण के दौरान 104 स्कूलों तक पहुंच बनाई गई, जिसमें कुल 16,897 छात्र शामिल हुए।
बच्चों को मिली महत्वपूर्ण जानकारी
इस दौरान, छात्रों को उनकी सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर जानकारी दी गई। उन्हें बाल अधिकारों, शरीर की सुरक्षा, पॉक्सो कानून के प्रावधानों, साइबर सुरक्षा के खतरों और बुलिंग से बचाव के तरीकों के बारे में विस्तार से जागरूक किया गया।
शिकायत पेटियों से हुआ मामलों का खुलासा
अभियान के एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में, सभी 104 स्कूलों में 'चाइल्ड सेफ्टी शिकायत बॉक्स' स्थापित किए गए। इन शिकायत पेटियों के माध्यम से बच्चों ने अपनी समस्याओं को बिना किसी डर के साझा किया।
इन पेटियों से प्राप्त शिकायतों के आधार पर 45 गैर-पॉक्सो मामलों का समाधान काउंसलिंग के माध्यम से सफलतापूर्वक किया गया।
इसके अलावा, स्कूलों के नियमित निरीक्षण के दौरान पॉक्सो अधिनियम से जुड़े तीन गंभीर मामलों की भी पहचान की गई, जिन पर तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू की गई।
राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने की सराहना
अरुणाचल प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (APSCPCR) ने भी पुलिस की इस पहल की सराहना की है। आयोग ने इस अभियान को बच्चों के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और जागरूकता
अभियान के दौरान पुलिसकर्मियों को बाल-अनुकूल पुलिसिंग (Child-Friendly Policing) का विशेष प्रशिक्षण देने के लिए 10 प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किए गए।
छात्रों को महिला पुलिस थाने में विशेष रूप से बनाए गए 'एनेज होम' का भ्रमण कराया गया, जहाँ उन्हें बच्चों के लिए उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी दी गई।
बच्चों ने आपातकालीन सेवाओं की प्रक्रिया को समझने के लिए डायल-112, चाइल्डलाइन-1098 और पुलिस कंट्रोल रूम पर लाइव टेस्ट कॉल भी किए।
'मुस्कान 2.0' में क्या होगा खास?
ईस्ट सियांग के पुलिस अधीक्षक (SP) पंकज लांबा ने बताया कि 'मुस्कान 2.0' में अब अभिभावकों और शिक्षकों की सक्रिय भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अभिभावकों और शिक्षकों की होगी भागीदारी
एसपी लांबा ने कहा कि दूसरे चरण में अभिभावक-शिक्षक बैठकों (PTMs) के दौरान विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। शिक्षकों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे ताकि वे बच्चों की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझ सकें और उनकी मदद कर सकें।
स्कूलों में लगाए गए शिकायत बॉक्स की नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि बच्चों की शिकायतों का समय पर समाधान हो सके।
सुरक्षित भविष्य का लक्ष्य
पुलिस का कहना है कि इस अभियान का अंतिम लक्ष्य बच्चों के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल तैयार करना है। यह तभी संभव है जब समाज, स्कूल और परिवार मिलकर अपनी संयुक्त जिम्मेदारी निभाएं और बच्चों को एक सुरक्षित भविष्य प्रदान करें।
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