जयपुर | राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने नगरीय निकाय चुनावों में धनबल के प्रयोग और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग पर गहरी चिंता व्यक्त की।
गहलोत का भाजपा पर बड़ा हमला: राजस्थान निकाय चुनाव: गहलोत का आरोप, पार्षदों को 2 करोड़ का ऑफर
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा पर शहरी निकाय चुनावों में लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि भाजपा बहुमत न होने के बावजूद धनबल से बोर्ड बना रही है।
HIGHLIGHTS
- अशोक गहलोत का आरोप: राजस्थान में पार्षदों को 2 करोड़ रुपये तक के प्रलोभन देकर खरीदने की कोशिश की जा रही है।
- भाजपा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और कई केंद्रीय मंत्रियों के गृह क्षेत्रों में भी बहुमत हासिल करने में विफल रही है।
- राज्य के 309 नगरीय निकायों में से 223 में भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, जो जनता का वास्तविक फैसला है।
- गहलोत ने परिसीमन में गड़बड़ी और पुलिस के जरिए निर्दलीय व कांग्रेस पार्षदों को डराने-धमकाने का गंभीर आरोप लगाया।
संबंधित खबरें
गहलोत ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए 'इक्वल लेवल प्लेइंग फील्ड' का होना अनिवार्य है। हालांकि, राजस्थान में इसके विपरीत एकतरफा पुलिस कार्रवाई की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्षदों को डराया और धमकाया जा रहा है। मंत्रियों को पार्षदों को 1.5 करोड़, 2 करोड़ और यहां तक कि 2.5 करोड़ रुपये के भारी प्रलोभन देने के लिए तैनात किया गया है।
लोकतंत्र पर धनबल का प्रहार
पूर्व मुख्यमंत्री ने तीखा हमला करते हुए कहा कि देश में भाजपा के पास धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि धनबल का उपयोग कर चुनी हुई सरकारों को गिराने का तमाशा अब जिलों और ब्लॉकों तक पहुंच गया है।
संबंधित खबरें
गहलोत ने इसे 'जैसा देश वैसा भेष' के सिद्धांत का अनुसरण बताया। उन्होंने सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग और मनमाने परिसीमन की भी कड़ी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के रोड शो और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) की निगरानी के बावजूद 64% वोट भाजपा के खिलाफ पड़े हैं। इसके बावजूद प्रधानमंत्री का बधाई देना दुर्भाग्यपूर्ण है।
दिग्गजों के गढ़ में भाजपा की स्थिति
गहलोत ने चुनाव आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भाजपा कई वरिष्ठ नेताओं के गृह क्षेत्रों में बहुमत हासिल करने में विफल रही है। इनमें निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का भरतपुर
- केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी का अजमेर
- केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव का अलवर
- केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का जोधपुर
- प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ का पाली
- पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का झालावाड़
वोटों का गणित और परिसीमन का खेल
गहलोत ने बताया कि राजस्थान भर में भाजपा और कांग्रेस के बीच कुल वोट शेयर का अंतर केवल 0.94% था। भाजपा को 35.19% और कांग्रेस को 34.25% वोट मिले।
हालांकि, सीटों का अंतर 5.5% तक बढ़ गया। उन्होंने जोधपुर नगर निगम का उदाहरण दिया, जहां कांग्रेस को भाजपा से 14,282 अधिक वोट मिले, फिर भी दोनों दलों ने 44-44 सीटें जीतीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि जोधपुर के वार्ड नंबर 99 में कांग्रेस समर्थित चार वार्डों को एक में मिला दिया गया। वहीं, भाजपा समर्थित क्षेत्रों को दो या तीन वार्डों में विभाजित कर दिया गया।
चुनाव परिणामों का विश्लेषण
गहलोत ने परिणामों का विश्लेषण पेश करते हुए कहा कि राज्य के कुल 10,244 वार्डों में से भाजपा 6,065 वार्डों (59%) में चुनाव हार गई है।
राज्य के 309 नगरीय निकायों में से भाजपा 223 (72%) में स्पष्ट बहुमत हासिल करने में विफल रही। 10 नगर निगमों में से भाजपा केवल 4 में बहुमत पा सकी:
- भीलवाड़ा
- जयपुर
- कोटा
- उदयपुर
डराने-धमकाने और पुलिस दबाव की साजिश
अशोक गहलोत ने कहा कि चुनावी हार स्वीकार करने के बजाय मुख्यमंत्री कार्यालय का एक आईएएस अधिकारी सीधे कलेक्टरों और एसडीएम पर दबाव बना रहा है।
उन्होंने झुंझुनू (मंडावा), नीमराना, टोंक, जोधपुर, कोटपुतली-बहरोड़, सीकर, धौलपुर, जालौर, अजमेर और बूंदी जैसे क्षेत्रों से डराने-धमकाने की घटनाओं की रिपोर्ट होने का दावा किया।
गहलोत ने खैरथल के पार्षद विक्रम चौधरी का उदाहरण दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पाला बदलने के लिए राजी किया गया और दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव द्वारा भाजपा में शामिल कराया गया।
उन्होंने अंत में कहा कि 2 करोड़ रुपये का ऑफर देकर भाजपा भ्रष्टाचार का नया रिकॉर्ड बना रही है। करोड़ों खर्च कर अध्यक्ष या मेयर बनने वाले लोग सेवा के बजाय पैसा वसूलने पर ध्यान देंगे।
*Edit with Google AI Studio