जयपुर | राजस्थान की राजनीति के एक अनुभवी स्तंभ और कठूमर विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे बाबूलाल बैरवा का रविवार तड़के निधन हो गया। 73 वर्षीय बैरवा पिछले कुछ दिनों से बीमार थे और जयपुर में उपचाररत थे।
पूर्व विधायक बाबूलाल बैरवा का निधन: राजस्थान के दिग्गज नेता बाबूलाल बैरवा का 73 वर्ष की उम्र में निधन
कठूमर से 4 बार के विधायक रहे बाबूलाल बैरवा ने जयपुर में ली अंतिम सांस, राजनीतिक जगत में शोक।
HIGHLIGHTS
- कठूमर के पूर्व विधायक बाबूलाल बैरवा का 73 वर्ष की आयु में जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में निधन हो गया।
- वे लंबे समय से ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे और 13 अप्रैल से अस्पताल में भर्ती थे।
- बैरवा ने अपने 44 साल के लंबे राजनीतिक करियर में 9 बार चुनाव लड़ा और 4 बार विधानसभा पहुंचे।
- साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उनका टिकट काटकर संजना जाटव को उम्मीदवार बनाया था।
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उनका निधन जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में हुआ। वे 13 अप्रैल से वहां भर्ती थे। वे लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी बीमारियों से संघर्ष कर रहे थे।
सुबह करीब 3 बजे उन्होंने अस्पताल में आखिरी सांस ली। उनके निधन की खबर फैलते ही कठूमर और अलवर सहित पूरे राजस्थान के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है।
44 साल का लंबा और सफल राजनीतिक सफर
बाबूलाल बैरवा का राजनीतिक सफर लगभग 44 वर्षों का रहा। वे क्षेत्र में एक जमीनी नेता के रूप में पहचाने जाते थे। उन्होंने अपनी सक्रियता से जनता के बीच गहरी पैठ बनाई थी।
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वे बीमार होने से पहले तक राजनीति में पूरी तरह सक्रिय रहे। उन्होंने अपने जीवनकाल में कुल नौ बार विधानसभा चुनाव लड़ा। इनमें से चार बार वे विधायक के रूप में चुने गए।
बैरवा ने अपना पहला चुनाव 1980 में एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा था। पहली ही बार में उन्होंने शानदार जीत दर्ज कर सबको चौंका दिया था। इसके बाद वे कांग्रेस में शामिल हो गए।
कांग्रेस और भाजपा दोनों के टिकट पर जीते
बाबूलाल बैरवा की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे कांग्रेस और भाजपा दोनों ही प्रमुख दलों से विधायक चुने गए थे। वे दल से ऊपर एक जननेता थे।
साल 1985 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता। इसके बाद 2008 में वे भाजपा में शामिल हुए और वहां से भी विधानसभा पहुंचे। 2018 में उन्होंने फिर कांग्रेस से जीत हासिल की।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार उन्होंने 9 बार चुनाव लड़ा जिसमें 5 बार हार मिली। लेकिन हार का अंतर हमेशा बहुत कम रहा। वे हर चुनाव में दूसरे नंबर के कैंडिडेट रहे।
संजना जाटव और टिकट का समीकरण
साल 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने बाबूलाल बैरवा का टिकट काट दिया था। पार्टी ने उनकी जगह युवा चेहरे संजना जाटव को मैदान में उतारने का फैसला किया था।
हालांकि संजना जाटव वह चुनाव हार गई थीं। समर्थकों का कहना है कि बाबूलाल बैरवा चुनाव हारें या जीतें, वे हमेशा अपने कार्यकर्ताओं और जनता के बीच सहज उपलब्ध रहते थे।
अशोक गहलोत और टीकाराम जूली ने जताया शोक
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर बाबूलाल बैरवा के साथ अपनी एक पुरानी तस्वीर साझा कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
बाबूलाल बैरवा जी का जाना कांग्रेस परिवार और राजस्थान की राजनीति के लिए एक बड़ी क्षति है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे और परिवार को संबल दे।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया। बाबूलाल बैरवा के परिवार में उनके दो बेटे अवधेश और अमिताभ हैं। अवधेश भी स्थानीय राजनीति में सक्रिय हैं।
बाबूलाल बैरवा का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव रोनिजाथान (कठूमर) में रविवार को किया जाएगा। उनके जाने से क्षेत्र ने एक सादगी पसंद और समर्पित जनसेवक खो दिया है।
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