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जागेश्वर धाम: डीएम की बड़ी चूक: जागेश्वर धाम के गर्भगृह में हथियार के साथ घुसे बरेली DM के गनर, पुजारियों ने जताई कड़ी आपत्ति; जानें क्या है पूरा विवाद

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अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम में बरेली के डीएम अविनाश सिंह के गनर के हथियार सहित गर्भगृह में प्रवेश करने पर विवाद खड़ा हो गया है। पुजारियों ने इसे धार्मिक मर्यादा का उल्लंघन बताया है।

HIGHLIGHTS

  • बरेली डीएम अविनाश सिंह के गनर ने हथियार के साथ जागेश्वर धाम के गर्भगृह में प्रवेश किया।
  • पुजारियों का आरोप है कि पीएम और सीएम भी यहां बिना हथियार के सुरक्षाकर्मियों के साथ आते हैं।
  • डीएम ने सफाई दी कि गनर अनजाने में पानी देने के लिए अंदर आ गया था।
  • एएसआई ने अब मंदिर परिसर में हथियारों पर पाबंदी के चेतावनी बोर्ड लगाने का फैसला किया है।
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अल्मोड़ा | उत्तराखंड की सुरम्य वादियों में स्थित प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में सोमवार को एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने धार्मिक आस्था और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के बीच एक बड़ी बहस छेड़ दी है।

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के जिलाधिकारी (DM) अविनाश सिंह अपनी पत्नी के साथ मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे थे, लेकिन उनके सुरक्षाकर्मी की एक हरकत ने विवाद को जन्म दे दिया।

बताया जा रहा है कि पूजा के दौरान डीएम के गनर ने हथियार (कार्बाइन) के साथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश किया, जो सदियों पुरानी परंपराओं के खिलाफ माना जाता है।

क्या है पूरा मामला?

जागेश्वर धाम में सोमवार को बरेली डीएम अविनाश सिंह अपने परिवार के साथ धार्मिक अनुष्ठान करने पहुंचे थे। वे वहां नवग्रह पूजा कर रहे थे।

इस दौरान उनके सुरक्षा घेरे में तैनात गनर भी उनके साथ मंदिर के भीतर तक गया। विवाद तब बढ़ा जब गनर अपनी लोडेड कार्बाइन के साथ गर्भगृह के अंदर दाखिल हो गया।

जैसे ही वहां मौजूद पुजारियों और स्थानीय श्रद्धालुओं की नजर हथियारबंद सुरक्षाकर्मी पर पड़ी, उन्होंने तुरंत इसका कड़ा विरोध करना शुरू कर दिया।

धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन

मंदिर के मुख्य पुजारियों, जिनमें नवीन चंद्र भट्ट और मनोज भट्ट शामिल हैं, ने इस घटना पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है।

उनका कहना है कि जागेश्वर धाम की परंपरा के अनुसार, गर्भगृह में किसी भी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है।

पुजारियों ने तर्क दिया कि यह स्थान अत्यंत पवित्र है और यहां नियमों का पालन करना हर किसी के लिए अनिवार्य है, चाहे वह कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो।

पीएम और सीएम का उदाहरण

विवाद के दौरान पुजारियों ने देश के शीर्ष पदों पर बैठे व्यक्तियों का उदाहरण देते हुए प्रशासन को आईना दिखाया।

उन्होंने कहा कि जब देश के प्रधानमंत्री या राज्य के मुख्यमंत्री भी जागेश्वर धाम आते हैं, तो उनकी सुरक्षा में तैनात कमांडो बाहर ही रुक जाते हैं।

शीर्ष राजनेताओं की सुरक्षा व्यवस्था अत्यंत कड़ी होने के बावजूद, वे कभी भी हथियार लेकर गर्भगृह में प्रवेश नहीं करते हैं।

सुरक्षा कर्मियों का अपना तर्क

वहीं, दूसरी ओर डीएम की सुरक्षा में लगे कर्मियों का कहना था कि वे केवल अपने प्रोटोकॉल का पालन कर रहे थे।

VIP सुरक्षा नियमों के तहत, सुरक्षाकर्मी को अपने संरक्षित व्यक्ति (Protectee) के साथ हर समय साये की तरह रहना होता है।

हालांकि, स्थानीय लोगों ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया और इसे धार्मिक परंपरा का अपमान करार दिया।

डीएम अविनाश सिंह की सफाई

मामला बढ़ता देख बरेली डीएम अविनाश सिंह ने अपनी ओर से स्पष्टीकरण जारी किया है। उन्होंने इस घटना को एक अनजानी भूल बताया है।

डीएम ने कहा कि उनका इरादा किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था। पूजा के दौरान कुछ ऐसी परिस्थितियां बनीं कि यह घटना हो गई।

उन्होंने बताया कि पूजा के बीच में उन्हें पानी की जरूरत महसूस हुई थी, जिसे देने के लिए गनर अचानक अंदर आ गया था।

निजी दौरे पर थे डीएम

अविनाश सिंह ने यह भी साझा किया कि वह मंदिर में किसी आधिकारिक काम से नहीं, बल्कि एक निजी और भावुक उद्देश्य से आए थे।

उनके पिता का हाल ही में निधन हुआ था, जिसकी शांति और आत्मिक शांति के लिए वे अपनी पत्नी के साथ हवन-पूजन करने आए थे।

उन्होंने दोहराया कि वे खुद धार्मिक मान्यताओं में गहरा विश्वास रखते हैं और मंदिर की मर्यादा का सम्मान करते हैं।

कौन हैं आईएएस अविनाश सिंह?

अविनाश सिंह 2014 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी हैं। वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के रहने वाले हैं।

प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने यूपी के कई जिलों में महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया है, जिससे उन्हें एक अनुभवी अधिकारी के रूप में जाना जाता है।

उन्होंने गोरखपुर में नगर आयुक्त के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं, जहां उन्होंने शहर के विकास के लिए कई कड़े फैसले लिए थे।

मिर्जापुर और अंबेडकर नगर का सफर

गोरखपुर के बाद उन्हें मिर्जापुर में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के पद पर तैनात किया गया था। वहां उन्होंने ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अच्छा काम किया।

साल 2023 में उन्हें पहली बार अंबेडकर नगर जिले का जिलाधिकारी बनाया गया, जहां उन्होंने कानून-व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया।

वर्तमान में वे बरेली के जिलाधिकारी के रूप में तैनात हैं और जिले के प्रशासनिक ढांचे को मजबूती से संभाल रहे हैं।

प्रशासन की त्वरित कार्रवाई

विवाद के बाद स्थानीय प्रशासन और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) भी हरकत में आ गया है।

एएसआई ने मंदिर परिसर में हथियारों के प्रवेश को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।

अब मंदिर के प्रवेश द्वारों पर स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाए जा रहे हैं, जिन पर हथियारों की मनाही का उल्लेख होगा।

स्थानीय जनता में रोष

इस घटना के बाद अल्मोड़ा के स्थानीय लोगों और जागेश्वर के निवासियों में काफी गुस्सा देखा जा रहा है।

लोगों का कहना है कि अधिकारियों को आम जनता के लिए मिसाल पेश करनी चाहिए, न कि नियमों को तोड़ना चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी इस घटना की तस्वीरें और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिस पर लोग तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

जागेश्वर धाम का महत्व

जागेश्वर धाम को भगवान शिव के आठवें ज्योतिर्लिंग के रूप में भी मान्यता प्राप्त है। यह 124 मंदिरों का एक समूह है।

यहां की वास्तुकला और आध्यात्मिक ऊर्जा दुनिया भर के पर्यटकों और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है।

इतने महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर इस तरह का प्रोटोकॉल विवाद मंदिर की छवि के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा है।

जांच के आदेश

उत्तराखंड शासन ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है और स्थानीय प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

अधिकारियों का कहना है कि वे सुनिश्चित करेंगे कि सभी आगंतुक, चाहे वे कितने भी प्रभावशाली हों, स्थानीय रीति-रिवाजों का पालन करें।

यह मामला अब केवल एक सुरक्षा चूक का नहीं, बल्कि आस्था बनाम प्रशासनिक शक्ति का बन गया है।

पुजारियों की मांग

मंदिर प्रबंधन ने मांग की है कि भविष्य में किसी भी वीआईपी के आने पर उन्हें पहले ही नियमों की जानकारी दे दी जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षाकर्मियों को मंदिर के बाहर ही रुकने के लिए एक निश्चित स्थान निर्धारित किया जाना चाहिए।

पुजारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में ऐसा हुआ, तो वे पूजा बीच में ही रोककर विरोध प्रदर्शन करेंगे।

निष्कर्ष

यह घटना हमें याद दिलाती है कि पद और शक्ति से ऊपर आस्था और परंपराएं होती हैं।

लोकतंत्र में एक लोक सेवक का उत्तरदायित्व है कि वह जनता की भावनाओं का सम्मान करे।

उम्मीद है कि इस विवाद से सबक लेते हुए प्रशासन भविष्य में ऐसी गलतियों से बचेगा।

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