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राजस्थान

Barmer: बाड़मेर: विधायक भाटी और बीडीओ में सफाई पर तीखी बहस, VIDEO

गणपत सिंह मांडोली गणपत सिंह मांडोली

बाड़मेर (Barmer) में रामसर पंचायत समिति (Ramser Panchayat Samiti) की बैठक में विधायक रविंद्र भाटी (Ravindra Bhati) और बीडीओ विक्रम जांगिड़ (Vikram Jangid) के बीच सफाई को लेकर तीखी बहस हुई। भाटी ने स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) के कार्यों पर सवाल उठाए।

HIGHLIGHTS

  • विधायक रविंद्र भाटी और बीडीओ विक्रम जांगिड़ के बीच सफाई व्यवस्था को लेकर तीखी बहस हुई। विधायक ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत हुए कार्यों और भुगतान का ब्योरा मांगा। बीडीओ ने मीटिंग में तैयारी के साथ न आने और कागजात उपलब्ध न करा पाने की बात कही। विधायक ने पंचायत समिति के पीछे की गंदगी की तस्वीरें दिखाकर सवाल उठाए।
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विधायक-बीडीओ में तीखी बहस

बाड़मेर: बाड़मेर (Barmer) में रामसर पंचायत समिति (Ramser Panchayat Samiti) की बैठक में विधायक रविंद्र भाटी (Ravindra Bhati) और बीडीओ विक्रम जांगिड़ (Vikram Jangid) के बीच सफाई को लेकर तीखी बहस हुई। भाटी ने स्वच्छ भारत अभियान (Swachh Bharat Abhiyan) के कार्यों पर सवाल उठाए।

राजस्थान के बाड़मेर जिले में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच जवाबदेही और कार्यप्रणाली को लेकर अक्सर बहस देखने को मिलती है। यह घटना स्थानीय शासन में पारदर्शिता और प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता को रेखांकित करती है।

शनिवार को रामसर पंचायत समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक में ऐसा ही एक वाकया सामने आया, जब शिव विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी और खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) विक्रम जांगिड़ के बीच स्वच्छ भारत अभियान के तहत चल रहे सफाई कार्यों और उनके भुगतान को लेकर तीखी नोकझोंक हो गई।

इस बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना दर्शाती है कि कैसे जमीनी स्तर पर सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन अक्सर चुनौतियों से भरा होता है और जनप्रतिनिधियों को जनता के हितों की रक्षा के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है।

बैठक में तैयारी की कमी पर विधायक की फटकार

बैठक की शुरुआत में ही विधायक रविंद्र भाटी ने बीडीओ विक्रम जांगिड़ से रामसर क्षेत्र में साफ-सफाई की वर्तमान स्थिति और स्वच्छ भारत अभियान (एसबीएम) के तहत हुए कार्यों का विस्तृत ब्योरा मांगा। विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अधिकारियों को ऐसी महत्वपूर्ण बैठकों में पूरी तैयारी के साथ आना चाहिए।

उन्होंने यह भी जानना चाहा कि कितने सफाई टेंडर जारी किए गए हैं और किन-किन स्थानों पर उनका भुगतान किया गया है, इसका पूरा लेखा-जोखा तत्काल उपलब्ध कराया जाए। विधायक का यह रुख दर्शाता है कि वे जनता के पैसे के सही इस्तेमाल को लेकर कितने गंभीर हैं और किसी भी तरह की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं करना चाहते।

बीडीओ जांगिड़ ने विधायक के सवालों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि 'मीटिंग एजेंडा छोड़ दो और मेरे सवालों का उत्तर दो, इस तरीके से कैसे सवाल होते हैं।' बीडीओ का यह जवाब विधायक को नागवार गुजरा। इस पर विधायक भाटी ने तल्ख लहजे में जोर देकर कहा कि 'बीडीओ साहब सवाल का जवाब देना पड़ेगा, यह एजेंडे में भी है।'

उन्होंने तत्काल टेंडर और भुगतान का ब्योरा उपलब्ध कराने की अपनी मांग दोहराई।

यह स्थिति बैठक के माहौल को और भी गरमा गई, क्योंकि एक जनप्रतिनिधि जनता के मुद्दों पर जवाब मांग रहा था और एक अधिकारी अपनी तैयारी की कमी को छिपाने का प्रयास कर रहा था।

अकाउंटेंट की छुट्टी का बहाना और कागजात उपलब्ध कराने में असमर्थता

बीडीओ ने जवाब दिया कि 'आज तो मिलेंगे नहीं, अकाउंटेंट छुट्टी पर है। मैं आपको उपलब्ध करवा दूंगा।' इस जवाब से विधायक भाटी बिल्कुल संतुष्ट नहीं हुए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक अधिकारी को हमेशा तैयार रहना चाहिए और जनता से जुड़े महत्वपूर्ण कागजात हर समय उपलब्ध होने चाहिए, चाहे कोई कर्मचारी छुट्टी पर ही क्यों न हो।

यह बहस उस समय हुई जब रामसर पंचायत समिति की बैठक प्रधान की अध्यक्षता में चल रही थी, जिसमें शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी, एसडीएम रामलाल मीणा और बीडीओ विक्रम जांगिड़ सहित अन्य अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद थे।

यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी को स्पष्ट रूप से दर्शाती है, जहां अधिकारी महत्वपूर्ण जानकारी को तत्काल उपलब्ध कराने में आनाकानी करते हैं।

स्वच्छ भारत अभियान की जमीनी हकीकत और दावों की पोल

विधायक भाटी ने केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी स्वच्छ भारत अभियान (एसबीएम) की जमीनी स्थिति पर सीधे सवाल किए।

उन्होंने पूछा कि 'एसबीएम की क्या स्थिति है?' बीडीओ ने जवाब दिया कि 'टेंडर सभी पंचायतों में हो गए हैं।' इसके बाद विधायक ने अगला सवाल दागा, 'साफ-सफाई हो रही है क्या?' बीडीओ ने कहा, 'कई ग्राम पंचायतों में हो रही है, जिसमें नहीं हो रही है, उसका भुगतान नहीं होगा।'

यह जवाब अधूरा और असंतोषजनक था, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं करता कि किन पंचायतों में काम हो रहा है और किन में नहीं।

विधायक ने भुगतान के संबंध में और सटीक जानकारी मांगी, 'कितनी ग्राम पंचायतों में भुगतान हुआ है?'

बीडीओ ने बताया कि 'भुगतान केवल रामसर और गागरिया का हुआ है।' विधायक ने विशेष रूप से रामसर में सफाई की स्थिति पर पूछा, जिस पर बीडीओ ने कहा, 'अभी दो दिन से नहीं हुई, लेकिन करीब-करीब हमेशा होती है।' यह जवाब भी विरोधाभासी था, क्योंकि 'हमेशा होती है' और 'दो दिन से नहीं हुई' जैसी बातें जमीनी हकीकत पर सवाल उठाती हैं।

जियो-टैगिंग फोटो से सबूत और 'राजनीतिक मुद्दा' बनाने का आरोप

बहस उस समय और भी गरमा गई जब विधायक भाटी ने अपने मोबाइल में रामसर पंचायत समिति के ठीक पास की जियो-टैगिंग फोटो दिखाते हुए कहा, 'अभी रामसर पंचायत समिति में बैठे हैं, उसके पास का जीओ टैगिंग का फोटो है। यह मोदी जी का विजन वाला प्रोग्राम है।' यह फोटो स्पष्ट रूप से गंदगी और अव्यवस्था को दर्शा रही थी।

बीडीओ ने स्वीकार किया कि उन्हें इसकी जानकारी है, लेकिन सफाई की स्थिति पर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।

जब विधायक ने सफाई न होने की बात पर जोर दिया और फोटो को सबूत के तौर पर पेश किया, तो वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने भी 'कहां सफाई हुई?' कहकर विधायक का समर्थन किया। इस पर बीडीओ ने अपना बचाव करते हुए कहा, 'इसको आप राजनीतिक मुद्दा मत बनाओ।'

विधायक ने बीडीओ के इस आरोप को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया, 'राजनीतिक मुद्दा नहीं है? बीडीओ साहब आप इधर देखकर बात करो। अगर साफ-सफाई हो रही है तो यह फोटो कहां से आया?'

बीडीओ ने जांच का आश्वासन दिया, लेकिन विधायक ने कड़े शब्दों में कहा, 'इस विजन की इस तरीके से धज्जियां उड़ रही है रामसर पंचायत समिति में।' यह स्थिति बताती है कि कैसे सरकारी योजनाओं को लेकर अधिकारी और जनप्रतिनिधि अलग-अलग धरातल पर खड़े होते हैं।

बीडीओ का बचाव, बहाने और पंचायत समिति सदस्य का हस्तक्षेप

बीडीओ ने अपना बचाव करते हुए एक और बहाना पेश किया। उन्होंने कहा, 'साहब आप मेरी भी सुन लो, किसी के घर में शादी है, उसने सारा कचरा लाकर रोड पर डाल दिया, जो सफाई की वो तो पानी में गई। साहब ऐसा नहीं होता है।' यह तर्क विधायक को रास नहीं आया, क्योंकि उनका मानना था कि नियमित सफाई व्यवस्था होती तो ऐसी स्थिति नहीं बनती।

इस बीच, पंचायत समिति सदस्य आसुराम सियाग ने हस्तक्षेप करते हुए कहा, 'साहब साधारण मीटिंग है, इसको जनसुनवाई मत बनाओ। यह सभा है या फिर मेला है। जो जनप्रतिनिधि आए हैं, उनको बैठाओ, कोरम पूरा कर लो। फिर एमएलए साहब अपनी सुनवाई कर लेंगे।'

आसुराम सियाग का यह बयान बैठक के माहौल में तनाव को कम करने की कोशिश थी, लेकिन विधायक भाटी जनता के मुद्दे पर पीछे हटने को तैयार नहीं थे।

विधायक भाटी ने आसुराम सियाग की बात को खारिज करते हुए कहा कि यह जनसुनवाई नहीं बल्कि स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दा है, जो किसी व्यक्ति विशेष या राजनीतिक पक्ष का नहीं बल्कि पूरे रामसर गांव और उसके निवासियों का है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जब सरकार लाखों रुपए साफ-सफाई के लिए भेज रही है, तो उसका सही उपयोग होना चाहिए, ताकि गांव स्वच्छ दिखे और सबको अच्छा लगे।

उन्होंने आरोप लगाया कि ये लाखों रुपए सफाई पर खर्च नहीं हो रहे हैं और किसी अन्य मद में जा रहे हैं, जिससे आम लोगों का नुकसान हो रहा है। उन्होंने मांग की कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि यह पैसा कौन खा रहा है।

डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की हकीकत और अधिकारियों की टालमटोल

विधायक ने डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण की व्यवस्था पर भी विस्तार से सवाल उठाए। उन्होंने बीडीओ से सीधा पूछा, 'डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण हो रहा है?'

बीडीओ ने पहले तो गोलमोल जवाब दिया, 'आप एक तरफ कचरा उठाने का कह रहे हो, दूसरी तरफ कचरा उठाने की बात कहते हो।'

विधायक ने उन्हें सीधे जवाब देने को कहा और याद दिलाया कि टेंडर में डोर-टू-डोर सफाई का स्पष्ट प्रावधान है, जिसका पालन होना चाहिए।

बीडीओ ने अंततः स्वीकार किया कि 'बिल्कुल होती है' और 'पूरे गांव में सफाई होती है।' विधायक ने यह भी पूछा कि कितनी गाड़ियां इस कार्य में लगी हैं, जिस पर बीडीओ ने 'दो गाड़ियां' बताईं।

विधायक ने यह भी जानना चाहा कि इसकी प्रॉपर तरीके से जांच कौन कर रहा है, जिस पर बीडीओ ने 'ग्राम पंचायतें देखती हैं और मैं भी देखता हूं' कहकर जवाब दिया।

हालांकि, विधायक ने फिर से कचरे के ढेर की तस्वीरें दिखाते हुए पूछा कि अगर रेगुलर सफाई हो रही है तो ऐसे ढेर क्यों लगे हैं, जिस पर बीडीओ ने जांच करवाने का आश्वासन दिया।

यह दर्शाता है कि जमीनी हकीकत और कागजी कार्रवाई में कितना अंतर हो सकता है।

टेंडर के ब्योरे पर फिर अड़चन और विधायक का कड़ा रुख

विधायक भाटी ने बीडीओ से यह भी पूछा कि रामसर और गागरिया के अलावा किन-किन ग्राम पंचायतों में सफाई के टेंडर किए गए हैं।

बीडीओ ने बताया कि 'गागरिया ग्राम पंचायत में टेंडर किया है, और कहीं नहीं किया है टेंडर।'

विधायक ने बाकी ग्राम पंचायतों के टेंडर की स्थिति और अब तक किए गए टेंडरों का एक आधिकारिक लेटर मंगवाकर दिखाने को कहा।

बीडीओ ने एक बार फिर अकाउंटेंट की छुट्टी का बहाना बनाते हुए कहा कि 'आज तो मिलेंगे नहीं, छुट्टी का दिन अकाउंटेंट वगैरा यहां पर नहीं है।'

इस पर विधायक ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, 'हम यहीं बैठे हैं। जब दोगे तब जाएंगे। आज अकाउंटेंट छुट्टी पर यह कौनसा तरीका हो गया।'

बीडीओ ने कहा कि अगर उन्हें पहले पता होता तो वे कागज तैयार करके रखते। यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और जनता के प्रति जवाबदेही की कमी को दर्शाती है, जहां अधिकारी महत्वपूर्ण जानकारी को तत्काल उपलब्ध कराने में आनाकानी करते हैं।

विधायक का यह रुख जनता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो सरकारी कामकाज में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

जवाबदेही और पारदर्शिता की अंतिम मांग

विधायक रविंद्र भाटी ने इस पूरी बहस के दौरान स्पष्ट किया कि यह मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष या राजनीतिक पक्ष का नहीं है, बल्कि स्वच्छ भारत अभियान जैसे महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम की सफलता और जनता के पैसों के सही इस्तेमाल से जुड़ा है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि 'यह मोदी जी के विजन का प्रोग्राम है' और 'हमारे जो पंचायती राज मंत्री हैं, उनका फोकस हमेशा इस पर रहता है।' उन्होंने बीडीओ को उनकी और अपनी जिम्मेदारी याद दिलाते हुए कहा कि इन तमाम चीजों को धरातल पर लाना हम सबकी जिम्मेदारी है।

विधायक ने कहा कि वे यह देखेंगे कि कितने काम धरातल पर आए हैं और कितने नहीं। उन्होंने एक बार फिर सभी टेंडर और भुगतान के ब्योरे को तत्काल उपलब्ध कराने की मांग की, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लाखों रुपए का फंड कहां और कैसे खर्च हो रहा है।

यह घटना राजस्थान में स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच संवाद और जवाबदेही की चुनौतियों को उजागर करती है।

विधायक भाटी की यह कोशिश जनता के प्रति अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देती है, ताकि जनता के पैसे का सही उपयोग हो सके और स्वच्छ भारत का सपना साकार हो।

यह बहस स्थानीय शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता पर एक महत्वपूर्ण प्रकाश डालती है।

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