बाड़मेर | राजस्थान के बाड़मेर जिले में यातायात नियमों और धार्मिक आस्था के बीच टकराव का एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां पुलिस ने एक वाहन पर आराध्य देव का नाम लिखे होने के कारण 500 रुपये का चालान काट दिया, जिससे एक नया विवाद खड़ा हो गया है। इस घटना पर स्थानीय विधायक ने कड़ी आपत्ति जताई है।
राम राज्य में राम नाम पर चालान?: गाड़ी पर लिखा था इष्टदेव का नाम, पुलिस ने काटा चालान, MLA भाटी भड़के
बाड़मेर में गाड़ी पर भगवान का नाम लिखने पर 500 रुपये का चालान, शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने उठाया सवाल।
HIGHLIGHTS
- बाड़मेर में गाड़ी पर भगवान का नाम लिखने पर 500 रुपये का चालान काटा गया।
- वाहन मालिक का दावा है कि उसने किसी अन्य यातायात नियम का उल्लंघन नहीं किया था।
- शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने पुलिस कार्रवाई पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
- भाटी ने इस कार्रवाई को आम जनता की धार्मिक आस्था के साथ खिलवाड़ बताया।
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गाड़ी पर भगवान का नाम, कटा 500 का चालान
यह घटना बाड़मेर शहर की है, जहां एक स्थानीय वाहन मालिक को यातायात पुलिस ने नियमित जांच के दौरान रोका। वाहन मालिक के अनुसार, उनकी गाड़ी में सभी दस्तावेज पूरे थे।
उनके पास प्रदूषण नियंत्रण (PUC) प्रमाण पत्र, बीमा और अन्य सभी जरूरी कागजात मौजूद थे। उन्होंने सीट बेल्ट भी लगा रखी थी और गति सीमा का भी उल्लंघन नहीं किया था।
इसके बावजूद, पुलिस ने उनकी गाड़ी के आगे इष्ट देवता का नाम लिखा होने को नियम का उल्लंघन मानते हुए 500 रुपये का चालान काट दिया।
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इस अप्रत्याशित कार्रवाई ने वाहन मालिक को हैरान कर दिया और उन्होंने इस घटना की जानकारी स्थानीय जनप्रतिनिधियों को दी, जिसके बाद मामला राजनीतिक रूप ले गया।

विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने खोला मोर्चा
मामले की जानकारी मिलते ही शिव विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने पुलिस की इस कार्रवाई को असंवेदनशील और जनता की आस्था पर चोट बताया।
भाटी ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर इस मुद्दे को उठाते हुए राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि यह आम जनता की धार्मिक भावनाओं के साथ सीधा खिलवाड़ है और प्रशासन को ऐसे मामलों में अधिक व्यवहारिकता और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
'राम राज्य में इष्ट का नाम लिखना भी गुनाह है?'
विधायक भाटी ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखा, जिसने तुरंत सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।
"राम राज्य में अपने इष्ट का नाम लिखना भी क्या गुनाह हैं?"
उन्होंने अपने इस पोस्ट में प्रधानमंत्री कार्यालय (@PMOIndia), राजस्थान के मुख्यमंत्री कार्यालय (@RajCMO), राजस्थान पुलिस महानिदेशक (@PoliceRajasthan) और बाड़मेर पुलिस (@Barmer_Police) को टैग किया।
भाटी ने इस टैगिंग के माध्यम से शीर्ष अधिकारियों से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग की।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि यातायात नियमों का पालन कराना ही है, तो यह सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए, चाहे वह कोई रसूखदार व्यक्ति हो या आम नागरिक।
नियम और आस्था के बीच बहस
इस घटना ने एक बार फिर मोटर वाहन अधिनियम के नियमों और लोगों की व्यक्तिगत आस्था के बीच की महीन रेखा पर बहस छेड़ दी है।
हालांकि, नंबर प्लेट पर कुछ भी लिखना गैरकानूनी है, लेकिन गाड़ी की बॉडी पर धार्मिक चिन्ह या नाम लिखने को लेकर नियमों में स्पष्टता की कमी है, जिसका अलग-अलग तरीके से निर्वहन किया जाता है।
यह मामला अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है, जहां लोग दो गुटों में बंटे नजर आ रहे हैं। एक पक्ष इसे आस्था पर हमला बता रहा है तो दूसरा नियमों के पालन की वकालत कर रहा है।
इस पूरे विवाद ने प्रशासन के सामने यातायात नियमों के क्रियान्वयन और जनता की धार्मिक भावनाओं के बीच संतुलन बनाने की एक बड़ी चुनौती पेश की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या स्पष्टीकरण देता है।
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