बीकानेर | सिंचाई पानी की मांग को लेकर बीकानेर संभाग में किसानों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। खाजूवाला क्षेत्र में लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बाद अब जैसलमेर के इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र में भी किसानों ने मोर्चा खोल दिया है। किसानों का आरोप है कि पर्याप्त पानी नहीं मिलने से खड़ी फसलें संकट में हैं और उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सिंचाई पानी पर किसानों का उबाल: बीकानेर संभाग में सिंचाई पानी के लिए किसानों का आंदोलन तेज
बीकानेर संभाग में सिंचाई पानी की कमी से फसलें संकट में हैं। खाजूवाला और जैसलमेर के किसान सड़कों पर हैं, जिससे आगामी पंचायत चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल गरमा गया है।
HIGHLIGHTS
- बीकानेर संभाग के खाजूवाला और जैसलमेर में सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हुआ।
- किसानों ने जैसलमेर के नहरी क्षेत्र में 1,800 क्यूсеक पानी की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया।
- आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों के पुतले फूंके, फसलों के खराब होने का जताया डर।
- पंचायत चुनाव से पहले पानी का मुद्दा बना बड़ा राजनीतिक सवाल, सरकार ने जारी किया नया रेगुलेशन।
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खाजूवाला और जैसलमेर में किसानों का मोर्चा
खाजूवाला क्षेत्र में किसान सिंचाई पानी के अपने हिस्से की मांग को लेकर आंदोलन कर चुके हैं। सितंबर में किसानों ने 58 प्रतिशत सिंचाई पानी की मांग को लेकर घड़साना में बड़े आंदोलन का ऐलान किया था।
इसके बाद आंदोलन ने चक्काजाम और बाजार बंद जैसे रूप भी लिए। अब यह मुद्दा राजनीतिक रूप से भी गरमाता दिखाई दे रहा है।
राजनीतिक विरोध और पुतला दहन
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किसानों के बीच केंद्र और राज्य सरकार के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों को लेकर नाराजगी के स्वर तेज हुए हैं। आंदोलनकारी किसानों की ओर से विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
किसानों ने अपनी मांगों को लेकर निम्नलिखित नेताओं के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया है:
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विरोध।
- केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल का पुतला दहन।
- सिंचाई मंत्री सुरेश रावत के खिलाफ प्रदर्शन।
जैसलमेर में अनिश्चितकालीन धरना
जैसलमेर के नहरी क्षेत्र में किसानों का आंदोलन फिलहाल विशेष रूप से गंभीर है। किसानों ने जीरो आरडी क्षेत्र में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है।
उनका कहना है कि जिले के हिस्से का पर्याप्त सिंचाई पानी उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। इसके कारण नहर की टेल तक पानी नहीं पहुंच रहा और खड़ी फसलें प्रभावित हो रही हैं।
1,800 क्यूसेक पानी की मांग
किसानों ने जैसलमेर के हिस्से के करीब 1,800 क्यूसेक पानी की मांग का मुद्दा उठाया है। किसानों का कहना है कि अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार नहीं हुआ।
महापंचायत में आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी दी गई है। किसानों ने आगामी दिनों में चक्काजाम जैसे कड़े कदम उठाने का ऐलान किया है।
फसलों पर मंडराता आर्थिक संकट
पश्चिमी राजस्थान में खेती का बड़ा हिस्सा नहर के पानी पर निर्भर है। सिंचाई के निर्धारित पानी में कमी सीधे किसानों की फसल और आय को प्रभावित करती है।
जैसलमेर और बाड़मेर में पानी की व्यापक कमी को देखते हुए राज्य सरकार ने अकाल राहत के उपायों को वर्ष के अंत तक बढ़ाया है।
बीकानेर संभाग में किसानों का कहना है कि सिंचाई पानी की समस्या केवल इस मौसम की फसल का सवाल नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ रहा है।
पंचायत चुनाव और सरकारी कदम
यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है जब राजस्थान में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। पानी का सवाल अब ग्रामीण क्षेत्रों में राजनीतिक चर्चा का प्रमुख मुद्दा बनता जा रहा है।
6 अक्टूबर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। इसमें केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल सहित क्षेत्र के भाजपा नेताओं ने मुलाकात की।
नया सिंचाई रेगुलेशन कार्यक्रम
सरकार की ओर से रबी 2026-27 के लिए इंदिरा गांधी नहर परियोजना में पांच सिंचाई बारियों का रेगुलेशन कार्यक्रम जारी किया गया है।
उपलब्ध जल संसाधनों के आधार पर पानी देने की योजना बताई गई है। अब किसानों की निगाह इस बात पर है कि घोषित रेगुलेशन के मुताबिक वास्तव में नहर की टेल तक कितना पानी पहुंचता है।
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