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राज्य

परमिट का खेल, परिवहन विभाग फेल?: बीकानेर: कॉन्ट्रैक्ट परमिट पर स्टेज कैरिज का खेल, विभाग मौन

महेन्द्रसिंह शेखावत

बीकानेर में 100 से अधिक बसें कॉन्ट्रैक्ट परमिट की आड़ में अवैध रूप से यात्री ढो रहीं, परिवहन विभाग पर मिलीभगत के गंभीर आरोप।

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HIGHLIGHTS

  • बीकानेर में 100+ बसें कॉन्ट्रैक्ट परमिट पर अवैध चल रहीं।
  • परिवहन विभाग पर मिलीभगत और कार्रवाई न करने का आरोप।
  • शिकायतों के बावजूद केवल जुर्माना लगाकर बसों को छोड़ा गया।
  • ऑनलाइन टिकट बुकिंग कर नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रहीं।
bikaner private bus permit scam transport department allegations

बीकानेर | बीकानेर संभाग में निजी बसों के अवैध संचालन का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें परिवहन विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि 100 से अधिक बसें कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट की आड़ में अवैध रूप से स्टेज कैरिज की तरह संचालित हो रही हैं।

क्या है परमिट का यह 'खेल'?

कानूनी तौर पर, कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट वाली बसें केवल पहले से बुक किए गए समूह को एक निश्चित स्थान से दूसरे स्थान तक ले जा सकती हैं। वे रास्ते में सवारियां नहीं बैठा सकतीं।

इसके विपरीत, स्टेज कैरिज परमिट वाली बसें नियमित रूट पर चलती हैं और अलग-अलग स्टॉप से यात्रियों को टिकट देकर बैठा सकती हैं।

शिकायतकर्ता के अनुसार, बीकानेर में नियमों को ताक पर रखकर यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है, जिससे सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है।

ममता ट्रैवल्स पर लगे गंभीर आरोप

शिकायत में विशेष रूप से ममता ट्रैवल्स का नाम लिया गया है, जिसकी कई बसें इस अवैध संचालन में शामिल बताई गई हैं।

ये बसें बीकानेर से नोहर, भादरा, पल्लू, रावतसर और हरियाणा तक दैनिक रूप से यात्रियों को टिकट बेचकर परिवहन कर रही हैं।

आरोप है कि ये बसें ऑनलाइन टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध हैं, जो परमिट के नियमों का सीधा उल्लंघन है।

"हमने संपर्क पोर्टल से लेकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री तक हर जगह सबूतों के साथ शिकायत की, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यह अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।"

शिकायतों के बावजूद विभाग क्यों है मौन?

शिकायतकर्ता ने बताया कि राजस्थान संपर्क पोर्टल पर 20 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जिन्हें बिना किसी प्रभावी कार्रवाई के बंद कर दिया गया।

आरोप है कि जब भी विभाग इन बसों को पकड़ता है, तो केवल मामूली जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाता है, जबकि परमिट रद्द करने जैसी कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

शिकायत में कुछ परिवहन निरीक्षकों और अधिकारियों के नाम का भी उल्लेख किया गया है, जिन पर इस अवैध संचालन को संरक्षण देने का आरोप है।

यात्रियों की सुरक्षा भी दांव पर

इस तरह के अवैध संचालन से न केवल सरकारी खजाने को चूना लग रहा है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ हो रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता है ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर कार्रवाई हो।

यह पूरा प्रकरण परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है, जिसका जवाब जनता मांग रही है।

*Edit with Google AI Studio

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