बीकानेर | परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और लगातार हो रही कार्रवाइयों से परेशान होकर बीकानेर के निजी बस संचालकों ने एकजुट होकर मोर्चा खोल दिया है। बीकानेर बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन की राह पकड़ेंगे।
बस ऑपरेटर्स की चेतावनी: परिवहन विभाग से नाराज़ बस ऑपरेटर्स, आंदोलन की चेतावनी
बीकानेर में परिवहन विभाग की अकर्मण्यता से परेशान निजी बस ऑपरेटर्स ने उत्पीड़न और वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
HIGHLIGHTS
- बीकानेर में परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली के खिलाफ निजी बस संचालक लामबंद हो गए हैं।
- एसोसिएशन ने विभाग पर वादाखिलाफी, उत्पीड़न और अकर्मण्यता के गंभीर आरोप लगाए हैं।
- समस्याओं का समाधान न होने पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने की चेतावनी दी गई है।
- 15 अगस्त को मुख्यमंत्री के बीकानेर आगमन पर भी विरोध प्रदर्शन करने की योजना है।
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विभाग पर वादाखिलाफी और उत्पीड़न का आरोप
एसोसिएशन के अध्यक्ष समुद्रसिंह राठौड़ ने कहा कि विभाग ने अपने वादे पूरे नहीं किए हैं। उन्होंने बताया कि फरवरी 2026 में चक्काजाम आंदोलन समाप्त होते समय जिन मांगों पर सहमति बनी थी, वे आज तक लागू नहीं हुई हैं।
इसके विपरीत, परिवहन विभाग ने एक बार फिर बसों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी है, जिससे संचालकों में भारी रोष है।
पुराने नियमों को लेकर विवाद
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बस ऑपरेटर्स का एक प्रमुख मुद्दा वर्ष 2019 तक निर्मित स्लीपर बसों से जुड़ा है। उनका कहना है कि इन बसों पर नए नियमों को जबरन लागू कर कार्रवाई की जा रही है, जो कानूनी रूप से सही नहीं है।
एसोसिएशन ने तर्क दिया कि एक स्लीपर बस अपने आठ साल के संचालन में सरकार को लगभग एक करोड़ रुपये का राजस्व देती है। ऐसे में वर्षों से चल रही और नियमित टैक्स चुकाने वाली बसों को अचानक गलत ठहराना अनुचित है।
तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं
संचालकों ने परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। आरोप है कि पिछले तीन-चार महीनों से कई सेवाओं में लगातार बाधाएं आ रही हैं।
इनमें वीएलटीडी डिवाइस, ऑनलाइन पोर्टल, फिटनेस प्रक्रिया, और ड्राइविंग टेस्ट जैसी सेवाएं शामिल हैं, जिनमें अनियमितताओं के कारण परिवहन व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
एक और समस्या इमरजेंसी गेट के कारण हटाई गई सीटों को लेकर है। इन सीटों की संख्या अभी तक आरसी में दर्ज नहीं की गई है, जिसके चलते संचालकों से अतिरिक्त टैक्स वसूला जा रहा है।
बढ़ती लागत और आर्थिक संकट
बस ऑपरेटर्स ने डीजल, ऑयल और अन्य परिचालन लागतों में हो रही लगातार वृद्धि का भी मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि खर्च तो बढ़ रहे हैं, लेकिन यात्री किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।
इस वजह से पूरा व्यवसाय गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। संचालकों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो 15 अगस्त को मुख्यमंत्री के बीकानेर आगमन के दौरान भी विरोध दर्ज कराया जाएगा।
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