शिवपुरी | मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने राज्य की कानून-व्यवस्था और सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। यहां के पिछोर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने एक पुलिस अधिकारी को सरेआम धमकी दी है।
विधायक का गुस्सा इस कदर फूटा कि उन्होंने एसडीओपी (SDOP) स्तर के अधिकारी को पांच दिन का अल्टीमेटम दे दिया। उन्होंने कहा कि अगर अधिकारी ने माफी नहीं मांगी, तो वे उनके घर को गोबर से भरवा देंगे। यह पूरा मामला विधायक के बेटे से जुड़ा हुआ है।
BJP विधायक की पुलिस को खुली धमकी: '5 दिन में माफी मांगो वरना गोबर से भरवा दूंगा घर', शिवपुरी में BJP विधायक प्रीतम लोधी की SDOP को खुली धमकी, कांग्रेस हमलावर
मध्य प्रदेश के शिवपुरी में भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने एक पुलिस अधिकारी को सरेआम धमकी दी है। उनके बेटे पर थार से लोगों को कुचलने का आरोप है, जिसकी जांच से नाराज विधायक ने एसडीओपी को पांच दिन का अल्टीमेटम दिया है।
HIGHLIGHTS
- विधायक प्रीतम लोधी ने एसडीओपी को 5 दिन के भीतर माफी मांगने की चेतावनी दी।
- मामला विधायक के बेटे दिनेश लोधी द्वारा थार से 5 लोगों को कुचलने से जुड़ा है।
- विधायक ने धमकी दी कि माफी न मिलने पर 10 हजार लोगों के साथ घर में गोबर भरवा देंगे।
- कांग्रेस ने इस मामले पर कड़ा विरोध जताते हुए विधायक के खिलाफ एफआईआर की मांग की है।
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क्या है पूरा विवाद?
दरअसल, यह पूरा विवाद एक सड़क हादसे से शुरू हुआ। आरोप है कि विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी ने अपनी तेज रफ्तार थार गाड़ी से पांच लोगों को कुचल दिया था। यह घटना शिवपुरी के करेरा इलाके में 16 अप्रैल की सुबह हुई थी।
इस हादसे में पांच लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए जांच शुरू की। पुलिस ने विधायक के बेटे दिनेश लोधी को थाने बुलाकर उनके बयान दर्ज किए और घटना का मौका मुआयना भी किया।
विधायक की तीखी धमकी
पुलिस की इस कार्रवाई से विधायक प्रीतम लोधी काफी नाराज नजर आए। उन्होंने सीधे तौर पर एसडीओपी को निशाने पर लिया। विधायक ने कहा कि पुलिस अधिकारी अपनी मर्यादा में रहें और उनके परिवार को परेशान न करें।
विधायक ने भरे मंच से या सार्वजनिक रूप से यह चेतावनी दी कि अधिकारी के पास केवल पांच दिन का समय है। यदि इन पांच दिनों में उन्होंने माफी नहीं मांगी, तो अंजाम बुरा होगा। विधायक ने कहा कि वे 10 हजार लोगों को इकट्ठा करेंगे।
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'गोबर से भरवा दूंगा घर'
विधायक प्रीतम लोधी के शब्द काफी कड़े और अपमानजनक माने जा रहे हैं। उन्होंने कहा, "अगर पांच दिन में माफी नहीं मांगी गई, तो मैं तुम्हारे घर पहुंचूंगा और पूरे घर को गोबर से भरवा दूंगा।" यह बयान अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
इस धमकी के दौरान विधायक ने देश के शीर्ष नेतृत्व का नाम भी घसीटा। उन्होंने पुलिस अधिकारी से सवाल किया कि क्या वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के आदेश पर यह सब कर रहे हैं? इस सवाल ने मामले को और अधिक राजनीतिक रंग दे दिया है।
थार गाड़ी और अवैध उपकरण
पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि जिस थार गाड़ी से हादसा हुआ, उसमें कई अवैध चीजें लगी थीं। पुलिस के अनुसार, गाड़ी के शीशों पर काली फिल्म चढ़ी हुई थी, जो कानूनन जुर्म है। इसके अलावा गाड़ी में अवैध हूटर भी लगा पाया गया।
पुलिस ने मोटर व्हीकल एक्ट के तहत गाड़ी का चालान काटा है। साथ ही, आरोपी दिनेश लोधी के ड्राइविंग लाइसेंस को निरस्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि वे केवल कानून के मुताबिक काम कर रहे हैं।
आरोपी बेटे का आपराधिक इतिहास
विधायक के बेटे दिनेश लोधी का विवादों से पुराना नाता रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, दिनेश के खिलाफ ग्वालियर में भी मारपीट और अन्य आपराधिक धाराओं के तहत कई मामले दर्ज हैं। वह पहले भी कई बार विवादों में रह चुका है।
यही कारण है कि पुलिस इस बार मामले को गंभीरता से ले रही है। लेकिन विधायक का मानना है कि उनके बेटे को जानबूझकर फंसाया जा रहा है या पुलिस जरूरत से ज्यादा सख्ती दिखा रही है। इसी नाराजगी ने इस बड़े विवाद को जन्म दिया है।
कांग्रेस ने बोला हमला
इस घटना के बाद मध्य प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने भाजपा सरकार को घेरा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा के विधायक सत्ता के नशे में चूर हैं। वे अब कानून के रक्षकों को ही धमकाने पर उतारू हो गए हैं।
कांग्रेस ने मांग की है कि विधायक प्रीतम लोधी के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। पार्टी का कहना है कि जब एक पुलिस अधिकारी ही सुरक्षित नहीं है और उसे सरेआम बेइज्जत किया जा रहा है, तो आम जनता का क्या होगा?
पुलिस महकमे में आक्रोश
विधायक की इस धमकी के बाद पुलिस विभाग के भीतर भी अंदरूनी तौर पर काफी गुस्सा देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि इस तरह की धमकियों से पुलिस का मनोबल गिरता है। एक जनप्रतिनिधि को कानून का सम्मान करना चाहिए, न कि उसे चुनौती देनी चाहिए।
शिवपुरी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बड़ा बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि विभाग इस मामले की रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी में है। कानून के जानकारों का कहना है कि यह 'ड्यूटी में बाधा' डालने का मामला बन सकता है।
प्रीतम लोधी का विवादों से नाता
यह पहली बार नहीं है जब प्रीतम लोधी अपने बयानों के कारण चर्चा में आए हैं। इससे पहले भी वे ब्राह्मण समाज के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी कर चुके हैं। उस समय भाजपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था, हालांकि बाद में उनकी वापसी हो गई थी।
लोधी को क्षेत्र में एक दबंग नेता के रूप में जाना जाता है। उनके समर्थक उन्हें एक ऐसा नेता मानते हैं जो अपने लोगों के लिए किसी से भी भिड़ सकता है। लेकिन इस बार मामला एक ऑन-ड्यूटी पुलिस अधिकारी को धमकी देने का है, जो गंभीर श्रेणी में आता है।
क्या कहते हैं कानून के जानकार?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, किसी लोक सेवक को डराना या धमकाना भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध है। यदि पुलिस अधिकारी लिखित शिकायत करते हैं, तो विधायक की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
हालांकि, राजनीतिक दबाव के चलते अक्सर ऐसे मामलों में समझौता हो जाता है या मामले ठंडे बस्ते में डाल दिए जाते हैं। लेकिन जिस तरह से कांग्रेस ने इसे मुद्दा बनाया है, उससे लगता है कि यह मामला अभी शांत होने वाला नहीं है।
घटना का जनता पर प्रभाव
शिवपुरी की जनता के बीच भी इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। कुछ लोग विधायक के तेवर को सही बता रहे हैं, तो अधिकतर लोग इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि सड़क हादसे में घायल हुए पांच लोगों को न्याय मिलना चाहिए।
घायलों के परिजनों का आरोप है कि विधायक का परिवार अपनी शक्ति का इस्तेमाल कर मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है। वे पुलिस की अब तक की कार्रवाई से संतुष्ट तो हैं, लेकिन विधायक की धमकी के बाद उन्हें डर सता रहा है कि कहीं जांच प्रभावित न हो जाए।
निष्कर्ष और आगे की राह
अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पुलिस अधिकारी विधायक की धमकी के आगे झुकेंगे या फिर कानून अपना काम करेगा। पांच दिन की समय सीमा खत्म होने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है।
यदि विधायक अपने कहे अनुसार 10 हजार समर्थकों के साथ सड़क पर उतरते हैं, तो शिवपुरी में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। प्रशासन के लिए यह एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाली है। क्या भाजपा नेतृत्व अपने विधायक पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगा, यह भी एक बड़ा सवाल है।
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