नई दिल्ली | सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) भारत की आर्थिक प्रगति के इंजन के रूप में उभर रहे हैं। यह क्षेत्र न केवल विकास को गति दे रहा है, बल्कि समावेशी उन्नति का आधार भी बन गया है।
ग्रामीण MSME की नई उड़ान: ग्रामीण MSME का सशक्तिकरण: भारतीय अर्थव्यवस्था की नई रीढ़
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में MSME की बढ़ती भूमिका और सरकार के बड़े कदम।
HIGHLIGHTS
- MSME क्षेत्र भारत की जीडीपी में 31% से अधिक का महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
- देश के कुल निर्यात में लघु उद्योगों की हिस्सेदारी 48.58% तक पहुंच गई है।
- उद्यम पोर्टल के माध्यम से 7.9 करोड़ से अधिक उद्यम औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बने।
- पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 30 लाख से अधिक कारीगरों ने पंजीकरण कराया है।
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भारतीय अर्थव्यवस्था में MSME का बढ़ता वर्चस्व
MSME क्षेत्र वर्तमान में भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में 31.1 प्रतिशत से अधिक का योगदान दे रहा है। यह आंकड़ा देश की आर्थिक मजबूती को दर्शाता है।
निर्यात के मोर्चे पर भी इन छोटे उद्योगों ने बड़े झंडे गाड़े हैं। भारत के कुल निर्यात में इनकी हिस्सेदारी लगभग 48.58 प्रतिशत है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
विनिर्माण उत्पादन में इस क्षेत्र का योगदान 35.4 प्रतिशत के करीब है। यह दर्शाता है कि स्थानीय उत्पादन प्रणालियां कितनी सशक्त हो चुकी हैं।
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रोजगार सृजन का सबसे बड़ा माध्यम
कृषि के बाद MSME क्षेत्र रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। यह देश भर में लगभग 32.8 करोड़ लोगों की आजीविका का सहारा बना हुआ है।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में इन उद्यमों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। वे स्थानीय स्तर पर गैर-कृषि रोजगार के अवसर पैदा करते हैं।
7.47 करोड़ से अधिक उद्यम विनिर्माण, सेवा और व्यापार गतिविधियों में शामिल हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण भारत की आर्थिक जरूरतों को पूरा करता है।
औपचारिक अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ते कदम
सरकार ने असंगठित उद्यमों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में लाने के लिए ठोस प्रयास किए हैं। इसके लिए डिजिटल पंजीकरण को एक मिशन के रूप में लिया गया है।
उद्यम और उद्यम असिस्ट पोर्टल की सफलता
उद्यम पोर्टल और उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म (UAP) ने पंजीकरण की प्रक्रिया को बहुत सरल बना दिया है। इससे छोटे व्यापारियों को काफी लाभ हुआ है।
मार्च 2026 तक 7.9 करोड़ से अधिक उद्यम इन पोर्टल्स पर पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें सूक्ष्म उद्यमों की संख्या सबसे अधिक है।
पंजीकरण के कारण अब ये उद्यम बैंकिंग सुविधाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ उठा पा रहे हैं। औपचारिक पहचान ने उनके लिए नए द्वार खोल दिए हैं।
"MSME क्षेत्र हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो यह सुनिश्चित करता है कि विकास समावेशी हो और ग्रामीण भारत के हर कोने तक पहुंचे।"
वित्तीय सहायता और ऋण की सुलभता
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के सूक्ष्म उद्यमों के लिए समय पर ऋण उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता रही है। इसके लिए कई योजनाएं संचालित हैं।
क्रेडिट गारंटी योजना (CGS) के नए आयाम
सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) बिना किसी गारंटी के ऋण प्रदान करने में मदद करता है। यह उद्यमियों के लिए वरदान है।
बजट 2025-26 के अनुसार, गारंटी कवरेज की सीमा 5 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये कर दी गई है। यह बैंकों को अधिक ऋण देने के लिए प्रोत्साहित करता है।
ट्रांसजेंडर उद्यमियों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। उन्हें गारंटी शुल्क में 10% की रियायत और 85% तक का बढ़ा हुआ गारंटी कवरेज दिया जा रहा है।
सेल्फ रिलायंट इंडिया (SRI) फंड
SRI फंड के माध्यम से MSME को 50,000 करोड़ रुपये का इक्विटी समर्थन देने का लक्ष्य है। इसमें सरकार और निजी निवेश दोनों शामिल हैं।
नवंबर 2025 तक इस फंड ने 682 MSME को 15,442 करोड़ रुपये का निवेश प्रदान किया है। यह पूंजी छोटे उद्योगों को विस्तार करने में मदद करती है।
बजट 2026-27 में इस फंड के लिए अतिरिक्त 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इससे सूक्ष्म उद्यमों को जोखिम पूंजी मिलना जारी रहेगा।
ECLGS: संकट के समय का सहारा
आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS) ने महामारी के दौरान उद्योगों को टूटने से बचाया। इसने लाखों व्यापारियों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान की।
जनवरी 2023 तक इस योजना के तहत 3.61 लाख करोड़ रुपये की गारंटी जारी की गई थी। इससे लगभग 1.19 करोड़ कर्जदारों को सीधा लाभ हुआ।
एसबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना ने 14.6 लाख MSME खातों को एनपीए होने से बचाया। इनमें से 98.3% सूक्ष्म और लघु इकाइयां थीं।
कानूनी सुरक्षा और भुगतान समाधान
MSME इकाइयों के लिए समय पर भुगतान प्राप्त करना उनके अस्तित्व के लिए बहुत जरूरी है। सरकार ने इसके लिए सख्त कानूनी ढांचे तैयार किए हैं।
MSMED अधिनियम और भुगतान सुरक्षा
MSMED अधिनियम 2006 के तहत खरीदारों को 45 दिनों के भीतर भुगतान करना अनिवार्य है। देरी होने पर उन्हें ब्याज सहित भुगतान करना पड़ता है।
देश भर में 161 सूक्ष्म और लघु उद्यम सुविधा परिषदें (MSEFCs) स्थापित की गई हैं। ये परिषदें भुगतान विवादों का तेजी से निपटारा करती हैं।
समाधान (SAMADHAAN) पोर्टल की भूमिका
समाधान पोर्टल के माध्यम से उद्यमी अपने लंबित भुगतानों की शिकायत ऑनलाइन दर्ज कर सकते हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और प्रभावी है।
दिसंबर 2022 तक केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा 1,65,034 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। यह पोर्टल की सफलता का प्रमाण है।
जून 2025 में लॉन्च किया गया ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) पोर्टल इस दिशा में एक और बड़ा कदम है। यह समय और लागत दोनों की बचत करता है।
डिजिटलीकरण और बाजार पहुंच
डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने MSME के काम करने के तरीके को बदल दिया है। अब छोटे उद्यमी भी वैश्विक बाजारों तक पहुंच बना रहे हैं।
डिजिटल इकोसिस्टम का विस्तार
GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस) ने सरकारी खरीद में MSME की भागीदारी बढ़ाई है। अब वे सीधे सरकार को अपना सामान बेच सकते हैं।
TReDS प्लेटफॉर्म के माध्यम से बिलों की डिस्काउंटिंग आसान हो गई है। इससे उद्यमियों के पास कार्यशील पूंजी की कभी कमी नहीं होती।
MSME चैंपियंस पोर्टल शिकायतों के निवारण और हैंडहोल्डिंग सहायता के लिए एक प्रभावी मंच बन गया है। यह उद्यमियों की समस्याओं का समाधान करता है।
उद्यमिता और आजीविका प्रोत्साहन
सरकार नई इकाइयों की स्थापना और पारंपरिक शिल्पकारों को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजनाएं चला रही है। यह ग्रामीण विकास का मूल मंत्र है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP)
PMEGP एक प्रमुख क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी योजना है। यह गैर-कृषि क्षेत्रों में नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के लिए वित्तीय मदद प्रदान करती है।
विनिर्माण क्षेत्र के लिए 50 लाख रुपये और सेवा क्षेत्र के लिए 20 लाख रुपये तक की परियोजना लागत निर्धारित है। इसमें भारी सब्सिडी दी जाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष श्रेणियों के लिए सब्सिडी 35% तक है। पिछले पांच वर्षों में इस योजना ने 36.3 लाख लोगों के लिए रोजगार पैदा किया है।
पीएम विश्वकर्मा योजना: शिल्पकारों का सम्मान
2023 में शुरू हुई यह योजना पारंपरिक कारीगरों को समग्र सहायता प्रदान करती है। इसमें 18 विभिन्न ट्रेडों के शिल्पकारों को शामिल किया गया है।
कारीगरों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाण पत्र और पहचान पत्र दिया जाता है। उन्हें आधुनिक टूलकिट के लिए 15,000 रुपये का ई-वाउचर भी मिलता है।
इस योजना के तहत 3 लाख रुपये तक का ऋण केवल 5% ब्याज पर उपलब्ध है। मार्च 2026 तक 30 लाख से अधिक कारीगर इससे जुड़ चुके हैं।
भविष्य की राह और निष्कर्ष
MSME क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकार की रणनीति व्यापक है। यह ऋण, अनुपालन और बाजार पहुंच जैसी संरचनात्मक बाधाओं को दूर करती है।
बजट 2026-27 में SME ग्रोथ फंड के लिए 10,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। यह भविष्य की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और वित्तीय संस्थानों के बीच बढ़ता तालमेल अंतिम मील के उद्यमियों तक लाभ पहुंचाएगा। यही भारत की आत्मनिर्भरता का असली आधार है।
निष्कर्षतः, ग्रामीण और अर्ध-शहरी MSME न केवल आर्थिक विकास के वाहक हैं, बल्कि वे सामाजिक परिवर्तन के भी अग्रदूत हैं। उनकी सफलता ही भारत की सफलता है।
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