कौन-सा कैंसर है सबसे घातक? WHO ने बताए लक्षण
WHO और वेरीवेल हेल्थ के अनुसार, फेफड़ों और कोलोरेक्टल कैंसर सबसे जानलेवा हैं। इनके शुरुआती लक्षणों को पहचानना और समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है।
HIGHLIGHTS
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, फेफड़ों का कैंसर दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण है।
- कोलोरेक्टल कैंसर (आंतों का कैंसर) दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है।
- इन कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य होते हैं, जिन्हें लोग नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है।
- WHO के अनुसार, यदि कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में हो जाए, तो इलाज की सफलता की संभावना बहुत बढ़ जाती है।
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जब भी कैंसर की बात होती है, तो यह सवाल मन में जरूर आता है कि आखिर कौन-सा कैंसर सबसे ज्यादा खतरनाक होता है। कई लोग यह सोचते हैं कि हर कैंसर एक जैसा होता है, लेकिन मेडिकल साइंस के अनुसार, कुछ कैंसर ऐसे होते हैं जो शरीर में बहुत खामोशी से फैलते हैं।
जब तक इन साइलेंट किलर कैंसर का पता चलता है, तब तक अक्सर काफी देर हो चुकी होती है, जिससे इलाज मुश्किल हो जाता है।
WHO और वेरीवेल हेल्थ की रिपोर्ट
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और वेरीवेल हेल्थ (Verywell Health) की रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों में कुछ खास प्रकार के कैंसर सबसे आगे हैं। इन घातक कैंसर में फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer) और कोलोरेक्टल कैंसर (Colorectal Cancer) यानी आंतों का कैंसर सबसे ऊपर आते हैं।
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आइए समझते हैं कि कौन-सा कैंसर सबसे ज्यादा जानलेवा है और शरीर में दिखने वाले किन संकेतों को हमें कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
फेफड़ों का कैंसर (Lung Cancer): सबसे बड़ा खतरा
वेरीवेल हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में पुरुषों और महिलाओं, दोनों में कैंसर से होने वाली मौतों का सबसे बड़ा कारण फेफड़ों का कैंसर ही है।
इसकी सबसे खतरनाक बात यह है कि इसके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग इन्हें आम खांसी या धूल-प्रदूषण का असर समझकर छोड़ देते हैं। जब तक बीमारी गंभीर रूप नहीं ले लेती, तब तक इसका सही पता नहीं चल पाता।
इन संकेतों को कभी न करें इग्नोर
- लगातार बनी रहने वाली खांसी, जो हफ्तों बाद भी ठीक न हो।
- खांसी के साथ बलगम में खून का आना।
- बिना किसी वजह के सांस फूलना या छाती में लगातार दर्द रहना।
- बिना डाइटिंग या कसरत के अचानक से वजन का बहुत कम हो जाना।
कोलोरेक्टल कैंसर (आंतों का कैंसर): तेजी से बढ़ता खतरा
WHO के मुताबिक, कोलोरेक्टल कैंसर दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है। यह कैंसर हमारे पेट के निचले हिस्से यानी बड़ी आंत और मलाशय में होता है।
यह कैंसर धीरे-धीरे आंतों के अंदर छोटी-छोटी गांठों (जिन्हें पॉलिप्स कहते हैं) के रूप में शुरू होता है, जो बाद में कैंसर का रूप ले लेती हैं। खराब लाइफस्टाइल, जंक फूड और शारीरिक एक्टिविटी न होना इसके बड़े कारण माने जाते हैं।
पेट से जुड़े इन बदलावों पर दें ध्यान
- पेट की आदतों में अचानक बदलाव आना।
- मल में खून आना।
- पेट में हर वक्त मरोड़, गैस या दर्द महसूस होना।
- हर वक्त कमजोरी और बहुत ज्यादा थकान महसूस होना।
क्या है बचाव का रास्ता?
WHO के डॉक्टर साफ तौर पर कहते हैं कि कैंसर कितना भी जानलेवा क्यों न हो, अगर इसकी पहचान शुरुआती स्टेज (Early Stage) में हो जाए, तो इलाज की सफलता की संभावना बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
अगर आपकी उम्र 45-50 साल से ज्यादा है, या आपके परिवार में किसी को पहले कैंसर रहा है, तो डॉक्टर की सलाह पर समय-समय पर रूटीन चेकअप या कोलोनोस्कोपी जैसे टेस्ट जरूर करवाएं।
जीवनशैली में करें ये बदलाव
तंबाकू, सिगरेट और शराब से पूरी तरह दूरी बना लें। फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा कारण धूम्रपान ही है। अपने खाने में हरी सब्जियां, फल और फाइबर की मात्रा बढ़ाएं। पैकेज्ड फूड, लाल मांस (Red Meat) और ज्यादा ऑयली चीजों से परहेज करें।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।