जयपुर | राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि शासन सचिवालय राज्य प्रशासन का सबसे महत्वपूर्ण और बड़ा निकाय है। यह वह स्थान है जहां से राज्य की नीतियां और योजनाएं आकार लेती हैं। मुख्यमंत्री गुरुवार को राजस्थान सचिवालय सेवा अधिकारी संघ के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने नवनिर्वाचित अध्यक्ष अभिमन्यु शर्मा और उनकी पूरी कार्यकारिणी को पद की शपथ दिलाई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सचिवालय के कर्मचारी सुशासन के संकल्प को साकार करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं।
भजनलाल सरकार का कर्मचारियों को तोहफा: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सचिवालय कर्मियों को दी बड़ी सौगात, प्रमोशन के नए अवसर और भत्तों में बढ़ोतरी का किया ऐलान
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सचिवालय सेवा अधिकारी संघ के शपथ ग्रहण समारोह में कर्मचारियों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने पदोन्नति के नए पद सृजित करने और कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण की बात कही।
HIGHLIGHTS
- सचिवालय में सहायक शासन सचिव के 15 नए पदों के सृजन की घोषणा की गई है।
- पदोन्नति में 2 वर्ष की छूट का लाभ अब और अधिक काडरों को मिल सकेगा।
- कर्मचारियों के लिए ग्रेच्यूटी की सीमा 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये की गई।
- आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर विचार के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन होगा।
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सचिवालय: सुशासन की धुरी
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि जब सचिवालय के अधिकारी और कर्मचारी पूरी निष्ठा से काम करते हैं, तो सरकारी कामकाज में तेजी आती है। इसका सीधा फायदा प्रदेश की जनता को मिलता है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का मुख्य लक्ष्य आमजन की समस्याओं का प्राथमिकता से निस्तारण करना है। जनता की सेवा ही किसी भी सरकार का सर्वोपरि धर्म होना चाहिए। कर्मचारियों को चाहिए कि वे फाइलों के निस्तारण में देरी न करें।
प्रधानमंत्री का सेवा मंत्र और मिशन कर्मयोगी
भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। इसी भावना के साथ केंद्रीय सचिवालय का नाम 'कर्तव्य भवन' रखा गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय को अब 'सेवातीर्थ' के रूप में जाना जाता है। यह नाम बदलाव केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह कार्यशैली में बदलाव का संकेत है।
मुख्यमंत्री ने 'मिशन कर्मयोगी' की चर्चा करते हुए कहा कि यह कर्मचारियों की कार्यकुशलता बढ़ाने का एक बड़ा जरिया है। राजस्थान के कर्मचारियों को भी इस मिशन से जुड़कर अपनी क्षमता का विकास करना चाहिए। उन्होंने प्रशासन के लिए 'नागरिक देवो भव' का मूल मंत्र दिया। उनका मानना है कि जब हम नागरिक को देवता मानकर सेवा करेंगे, तो जीवन की गुणवत्ता में सुधार होगा।
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कर्मचारी कल्याण के लिए ऐतिहासिक कदम
राज्य सरकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले सवा दो साल में कर्मचारियों के लिए कई बड़े फैसले लिए गए हैं। सरकार ने ग्रेच्यूटी की अधिकतम सीमा को 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दिया है। इससे सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। साथ ही समयबद्ध पदोन्नति की प्रक्रिया को भी सरल और तेज बनाया गया है।
आरजीएचएस योजना में भी मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए बड़े बदलाव किए गए हैं। अब महिला और पुरुष कर्मचारी अपने माता-पिता या सास-ससुर में से किसी एक को योजना का लाभ देने के लिए चुन सकते हैं। यह फैसला पारिवारिक सामंजस्य और बुजुर्गों की सेवा की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि कर्मचारी बिना किसी तनाव के अपना काम करें।
भविष्य की तैयारी और आठवां वेतन आयोग
मुख्यमंत्री ने बजट वर्ष 2026-27 के दूरगामी प्रावधानों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पदोन्नति और वेतनमान से जुड़े जटिल विषयों के अध्ययन के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बनाई गई है। यह समिति भविष्य में आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर भी गंभीरता से विचार करेगी। इससे कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही मांगों का वैज्ञानिक समाधान निकल सकेगा।
अधिकारियों की कार्यशैली को आधुनिक बनाने के लिए उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब हमें 'रूल बेस्ड' यानी केवल नियमों तक सीमित रहने के बजाय 'रोल बेस्ड' कार्यशैली अपनानी होगी। इसका मतलब है कि कर्मचारी अपनी भूमिका को समझें और परिणामों पर ध्यान दें। इसके लिए सरकार बजट का उचित प्रावधान कर रही है।
महिला कर्मचारियों को विशेष सौगात
महिला कर्मचारियों के लिए कार्यस्थल पर बेहतर वातावरण बनाने के लिए सरकार ने विशेष कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने 'मुख्यमंत्री शिशु-वात्सल्य सदन' की स्थापना की घोषणा की है। यहां महिला कार्मिकों के बच्चों की देखभाल की उचित व्यवस्था होगी। इसके अलावा एकल महिला कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव को 6 चरणों में स्वीकृत करने का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को भी अधिक उदार बनाया है। अब अनुकंपा नियुक्ति के दायरे में पुत्रवधू को भी शामिल किया गया है। यह फैसला सामाजिक सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब परिवार सुरक्षित महसूस करेगा, तभी कर्मचारी अपनी पूरी ऊर्जा काम में लगा पाएगा। सरकार हर कदम पर कार्मिकों के साथ खड़ी है।
प्रदेश का चहुंमुखी विकास और युवा नीति
सचिवालय के मंच से मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विकास का खाका भी पेश किया। उन्होंने बताया कि बिजली, पानी और कृषि के क्षेत्र में क्रांतिकारी काम हो रहे हैं। राम जल सेतु लिंक परियोजना और यमुना जल समझौते से प्रदेश की प्यास बुझेगी। 24 जिलों के किसानों को अब दिन में बिजली मिल रही है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। युवाओं के लिए लाई गई नई युवा नीति से उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा।
रोजगार के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक 1.25 लाख से ज्यादा सरकारी नियुक्तियां दी जा चुकी हैं। साथ ही 1.25 लाख नई भर्तियों का रास्ता भी साफ कर दिया गया है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पहले पेपरलीक से युवाओं के सपने टूटते थे। हमारी सरकार में एक भी पेपर लीक नहीं हुआ है, जो हमारी पारदर्शिता का प्रमाण है।
सचिवालय के लिए नई घोषणाएं
समारोह के अंत में मुख्यमंत्री ने सचिवालय कर्मियों के लिए बड़ी घोषणाएं कीं। उन्होंने सहायक शासन सचिव स्तर के 15 नए पद सृजित करने का ऐलान किया। पिछले साल भी 15 पद सृजित किए गए थे, जिससे अब पदोन्नति के अधिक अवसर मिलेंगे। इसके अलावा जिन काडर में पदोन्नति के लिए छूट नहीं मिल पाई थी, उनके लिए 2 वर्ष की विशेष छूट की घोषणा की गई है।
मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को निर्देश दिए कि वे सचिवालय सहित अन्य विभागों की आवश्यकताओं का आकलन करें। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं का समय पर समाधान करना सरकार की प्राथमिकता है। इस अवसर पर जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैया लाल और मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
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