धौलपुर | राजस्थान की पहचान विश्व पटल पर अपनी गौरवशाली विरासत और अरावली की पहाड़ियों के लिए रही है। अब इस कड़ी में धौलपुर के बीहड़ जुड़ने वाले हैं।
धौलपुर बनेगा नया टूरिज्म हब: राजस्थान पर्यटन: धौलपुर के खतरनाक चंबल बीहड़ों में शुरू होगा रोमांच, सरकार को भेजा गया मेगा टूरिज्म हब का प्रस्ताव
धौलपुर जिला प्रशासन ने चंबल के बीहड़ों को एक प्रमुख पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार को विस्तृत प्रस्ताव भेजा है, जिसमें ट्रेकिंग और सफारी जैसी गतिविधियां शामिल हैं।
HIGHLIGHTS
- धौलपुर के चंबल बीहड़ों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है।
- प्रस्ताव में बीहड़ ट्रेकिंग, जंगल सफारी, बीहड़ नाइट्स और लोक संगीत कार्यक्रमों को शामिल किया गया है।
- धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व भविष्य में दिल्ली और आगरा के पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनेगा।
- ऐतिहासिक शेरगढ़ किला, मचकुंड सरोवर और तालाब-ए-शाही को मिलाकर एक विशेष टूरिज्म पैकेज तैयार होगा।
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पूर्वी राजस्थान के धौलपुर जिले में पर्यटन की अपार संभावनाओं को देखते हुए जिला प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। चंबल नदी के किनारे बसे इन बीहड़ों को पर्यटन हब बनाने की तैयारी है।
जिला प्रशासन ने राज्य सरकार को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य धौलपुर को देश के पर्यटन मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करना है।
बीहड़ों में रोमांचक गतिविधियों की योजना
प्रस्ताव के अनुसार, चंबल के विख्यात बीहड़ों में ट्रेकिंग और जंगल सफारी जैसी गतिविधियां शुरू की जाएंगी। इससे साहसिक पर्यटन के शौकीनों को एक नया ठिकाना मिलेगा।
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पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए 'बीहड़ नाइट्स' का आयोजन करने की भी योजना है। इसमें रात के समय बीहड़ों के शांत वातावरण का अनुभव कराया जाएगा।
स्थानीय लोक संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए पर्यटकों को धौलपुर की मिट्टी की खुशबू से रूबरू कराया जाएगा। यह पहल स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करेगी।
धरोहरों को मिलाकर बनेगा विशेष पैकेज
प्रशासन का लक्ष्य केवल बीहड़ दिखाना नहीं है, बल्कि एक संपूर्ण पैकेज देना है। इसमें ऐतिहासिक शेरगढ़ किले को मुख्य केंद्र बनाया जाएगा।
धौलपुर का मचकुंड सरोवर, जिसे 'तीर्थराज' भी कहा जाता है, इस सर्किट का हिस्सा होगा। यहां की धार्मिक महत्ता पर्यटकों को अपनी ओर खींचेगी।
चोपड़ा मंदिर, वन विहार और तालाब-ए-शाही जैसी ऐतिहासिक धरोहरों को भी इस टूरिज्म पैकेज में शामिल किया गया है। इससे पर्यटकों का प्रवास जिले में बढ़ेगा।
ट्रेकिंग से बढ़ेगा पर्यटन का रोमांच
शहर से चंबल नदी के किनारे तक एक विशेष ट्रेकिंग ट्रैक बनाने की योजना है। यह ट्रैक बीहड़ों के बीच से होकर गुजरेगा, जो बेहद रोमांचक होगा।
वर्तमान में शेरगढ़ किले की ओर जाने वाले रास्ते को पक्का किया गया है। इससे पर्यटकों की आवाजाही में पहले के मुकाबले काफी बढ़ोतरी देखी गई है।
किले के नीचे की तरफ एक सुरक्षित ट्रेक तैयार किया जाएगा। यहां से पर्यटक चंबल नदी के खूबसूरत नजारों और घड़ियालों को देख सकेंगे।
चंबल सफारी और बोटिंग का आनंद
नगर परिषद ने हाल ही में चंबल नदी में बोटिंग की शुरुआत की है। इसे और बड़े स्तर पर विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।
बीहड़ क्षेत्र में पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इससे न केवल पर्यटन बढ़ेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
जिला प्रशासन ने पर्यटन स्थलों के प्रचार-प्रसार के लिए एक विशेष कैलेंडर भी जारी किया है। इसमें जिले के सभी प्रमुख स्थलों को खूबसूरती से दर्शाया गया है।
भूलभुलैया जैसे हैं चंबल के बीहड़
धौलपुर और मुरैना के बीच फैले ये बीहड़ अपनी भौगोलिक बनावट के लिए जाने जाते हैं। यह इलाका किसी प्राकृतिक भूलभुलैया से कम नहीं है।
बीहड़ के अंदर एक बार प्रवेश करने के बाद रास्ता खोजना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। यहां के छोटे-छोटे रास्ते और टीले भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं।
कंटीली झाड़ियों और मिट्टी के ऊंचे टीलों पर चढ़ना एक अलग तरह का अनुभव है। हालांकि, अब कुछ इलाकों में सड़कों का निर्माण होने से पहुंच आसान हुई है।
तीन राज्यों में फैला है विशाल साम्राज्य
चंबल नदी राजस्थान के पांच जिलों बारां, कोटा, सवाई माधोपुर, करौली और धौलपुर से होकर बहती है। यह क्षेत्र पारिस्थितिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है।
यह बीहड़ क्षेत्र राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कई जिलों को कवर करता है। लगभग पांच लाख हेक्टेयर भूमि इस बंजर क्षेत्र में आती है।
यह क्षेत्र अरावली पर्वतमाला और विध्य पठार के संगम पर स्थित है। इसकी विशिष्ट भू-आकृति इसे दुनिया के अन्य हिस्सों से बिल्कुल अलग बनाती है।
बॉलीवुड और चंबल का गहरा नाता
चंबल की ऊबड़-खाबड़ जमीन ने हमेशा से फिल्म निर्देशकों को आकर्षित किया है। यहां 'बैंडिट क्वीन' और 'पान सिंह तोमर' जैसी फिल्मों की शूटिंग हुई है।
एक समय था जब ये बीहड़ दस्युओं की शरण स्थली हुआ करते थे। मान सिंह, फूलन देवी और मलखान सिंह जैसे नामों से यह क्षेत्र जुड़ा रहा है।
लेकिन अब समय बदल चुका है और प्रशासन इस खौफनाक छवि को पर्यटन के रोमांच में बदलना चाहता है। अब यहां गोलियों की गूंज नहीं, पर्यटकों का शोर होगा।
टाइगर रिजर्व से बदलेगी धौलपुर की किस्मत
धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व आने वाले समय में गेम चेंजर साबित होगा। यह वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक नया और पसंदीदा गंतव्य बनने की ओर अग्रसर है।
रणथंभौर और सरिस्का के बाद धौलपुर टाइगर रिजर्व पर्यटकों की पहली पसंद बन सकता है। इसकी दिल्ली और आगरा से नजदीकी सबसे बड़ा प्लस पॉइंट है।
टाइगर रिजर्व में ट्रेकिंग एरिया और सफारी रूट तैयार किए जा रहे हैं। आगरा आने वाले विदेशी पर्यटक आसानी से धौलपुर तक पहुंच सकेंगे।
प्रशासनिक दृष्टिकोण और भविष्य की राह
धौलपुर के डीएफओ वी. चेतन कुमार के अनुसार, बीहड़ पर्यटन के लिहाज से एक 'अनएक्सप्लोर्ड' साइट है। यहां विकास की बहुत अधिक संभावनाएं मौजूद हैं।
सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में सुरक्षा और सुविधा दोनों का ध्यान रखा गया है। बीहड़ों को सुरक्षित तरीके से पर्यटकों के सामने पेश करना प्राथमिकता है।
आने वाले वर्षों में धौलपुर न केवल राजस्थान बल्कि उत्तर भारत का एक प्रमुख एडवेंचर टूरिज्म हब बनकर उभरेगा। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
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