thinQ360
thinQ360
🏠 टॉप 🔥 राजनीति 📍 राज्य 📰 लाइफ स्टाइल 🏏 खेल 🎬 मनोरंजन 👤 शख्सियत 💻 तकनीक ✍️ Blog ⭐ सफलता की कहानी 🚨 क्राइम 📰 मनचाही ▶️ YouTube
लाइफ स्टाइल

कमरे में घुसते ही भूलना बीमारी नहीं!: क्या आप भी कमरे में घुसते ही भूल जाते हैं काम? जानें क्या है 'डोरवे इफेक्ट' और इसे रोकने के वैज्ञानिक तरीके

बलजीत सिंह शेखावत

अक्सर लोग एक कमरे से दूसरे कमरे में जाते ही अपना काम भूल जाते हैं। विज्ञान में इसे 'डोरवे इफेक्ट' कहा जाता है, जो दिमाग की एक सामान्य और सुरक्षात्मक प्रक्रिया है।

HIGHLIGHTS

  • कमरे के दरवाजे को पार करते ही दिमाग पुरानी जानकारी को 'डिलीट' कर देता है।
  • साइंस में इस प्रक्रिया को 'इवेंट बाउंड्री' (Event Boundary) के नाम से जाना जाता है।
  • डॉ. विनीत बंगा के अनुसार, यह दिमाग का खुद को व्यवस्थित रखने का एक तरीका है।
  • तनाव, थकान और मल्टीटास्किंग के कारण यह समस्या अधिक बढ़ सकती है।
doorway effect science behind forgetting tasks entering new room

नई दिल्ली | क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी जरूरी काम से दूसरे कमरे में गए और वहां पहुंचते ही सोचने लगे कि आखिर आप वहां क्यों आए थे? यदि हां, तो आपको घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। यह कोई गंभीर बीमारी नहीं, बल्कि आपके दिमाग की एक बेहद सामान्य और स्मार्ट कार्यप्रणाली है। विज्ञान की दुनिया में इस रोचक स्थिति को 'डोरवे इफेक्ट' (Doorway Effect) के नाम से जाना जाता है।

क्या है डोरवे इफेक्ट का विज्ञान?

हेल्थ एक्सपर्ट्स और हालिया रिसर्च के मुताबिक, हमारा दिमाग सूचनाओं को अलग-अलग हिस्सों में स्टोर करता है। जब हम एक कमरे से दूसरे कमरे में प्रवेश करते हैं, तो दिमाग उस दरवाजे को एक 'इवेंट बाउंड्री' मान लेता है। डॉ. विनीत बंगा बताते हैं कि इस दौरान दिमाग पुराने माहौल से जुड़ी जानकारी को पीछे छोड़ देता है। वह नए कमरे या नए माहौल के लिए खुद को पूरी तरह तैयार करने लगता है। यही कारण है कि दरवाजे की चौखट लांघते ही पिछले कमरे की योजना दिमाग से ओझल हो जाती है। यह प्रक्रिया दर्शाती है कि आपका मस्तिष्क सक्रिय है और नई चुनौतियों के लिए जगह बना रहा है।

स्मार्टफोन की तरह काम करता है दिमाग

आप अपने दिमाग को एक आधुनिक स्मार्टफोन की तरह समझ सकते हैं। जैसे फोन में कई ऐप्स खुले रहने पर वह स्लो हो जाता है, वैसे ही दिमाग भी अनावश्यक डेटा को हटाता रहता है। एनआईएच (NIH) पर प्रकाशित शोध बताते हैं कि यह प्रक्रिया दिमाग की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है। यह भूलना कमजोरी नहीं, बल्कि दिमाग का खुद को रीसेट करने का तरीका है।

इन स्थितियों में बढ़ जाती है समस्या

हालांकि यह एक सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन कुछ विशेष स्थितियों में यह समस्या अधिक बार महसूस हो सकती है। अत्यधिक मानसिक तनाव और शरीर की थकान इसका मुख्य कारण बनते हैं। इसके अलावा, यदि आप एक साथ कई काम (Multitasking) कर रहे हैं या आपकी नींद पूरी नहीं हुई है, तो दिमाग पहले से ही ओवरलोड रहता है। ऐसी स्थिति में नई जगह जाते ही पुरानी जानकारी जल्दी हट जाती है।

भूलने की आदत को कैसे कम करें?

अगर आप इस स्थिति से परेशान हैं, तो कुछ आसान हेल्थ टिप्स अपना सकते हैं। सबसे पहले, जिस काम को करने जा रहे हैं, उसकी एक स्पष्ट मेंटल इमेज अपने दिमाग में बनाएं। दूसरा तरीका यह है कि कमरे की ओर जाते समय अपने काम को मन ही मन या धीरे-धीरे बोलकर दोहराते रहें। इससे जानकारी आपके वर्किंग मेमोरी में बनी रहती है।

सावधानी और डॉक्टर की सलाह

नए कमरे में घुसने से पहले दरवाजे पर महज 2 सेकंड के लिए रुकें। यह छोटा सा पॉज आपके दिमाग को पुरानी सूचनाओं को बरकरार रखने में मदद करता है। ज्यादातर मामलों में डोरवे इफेक्ट सामान्य है। लेकिन अगर आप रोजमर्रा के नाम, जरूरी मीटिंग्स या बेहद महत्वपूर्ण काम बार-बार भूलने लगें, तो यह मेमोरी लॉस का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है।

शेयर करें:

ताज़ा खबरें